Thursday, July 18, 2024
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आदतों में सुधार, अपराधों से तौबा चुके व उम्रदराज गुण्डा-बदमाशों को मिल सकती है माफी……विभाग को करनी होगी पहल

0 जिले के थानों में दर्ज हैं 100 गुण्डा व निगरानी बदमाश

थाने में निगरानी व गुण्डा-बदमाशों की परेड


कोरबा, (खटपट न्यूज़)। कालांतर में कानून तोड़ने वाले, गलत संगत में पड़कर अति उत्साहपूर्वक व अन्य कारणों से अपराध के दलदल में समाकर पुलिस के रिकार्ड में गुण्डा व निगरानी बदमाश बतौर नाम दर्ज करा चुके अनेक लोगों को माफी की दरकार है। इनके लिए जल्द ही जिला पुलिस अभियान चलाकर माफी बदमाश की सूची में नाम डाल सकती है। ऐसा होने पर अपराधों से दूर-दूर तक नाता तोड़ चुके लोगों के दामन से गुण्डा बदमाश का दाग धुल जाएगा।


पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार कोरबा जिले के भी सभी थानों में दर्ज गुण्डा व निगरानी बदमाशों की सूची निकालकर इनकी परेड कराते हुए व वर्तमान कामकाज तथा सक्रियता-निष्क्रियता के बारे में थाना व चौकी प्रभारियों के द्वारा जानकारी हासिल की जा रही है। वर्षों से इस सूची में शामिल होते आ रहे तत्कालीन समय के बदमाश, गुण्डा लोग अब अपराधों से तौबा कर चुके हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं जिनकी किसी भी तरह की आपराधिक पृष्ठभूमि तो नहीं लेकिन कानून का बार-बार उल्लंघन की वजह से गुण्डा-बदमाश की सूची में जुड़ गए हैं। वर्षों पहले के ये नामजद कई लोग अब उम्रदराज होने लगे हैं, उनमें इतनी क्षमता और मानसिकता नहीं रह गई कि किसी अपराध-वारदात को अंजाम दें। 40 वर्ष और इससे अधिक उम्र होने के साथ ही इनकी आदतों में भी सुधार आ चुका है और अपने घर-गृहस्थी, नौकरी-चाकरी में मशगूल हैं। ऐसे लोगों की चाह है कि अब गुण्डा-बदमाश की सूची से बाहर निकलने की इच्छा जताने लगे हैं। जिला पुलिस से इनकी अपेक्षा भी है कि अभियान चलाकर इनकी अपराधों के संबंध में निष्क्रियता और सक्रियता का पता लगाया जाए और गुण-दोष के आधार पर निगरानी, गुण्डा-बदमाश की सूची से बाहर कर कलंक से निजात दिलाएं।
0 पुलिस को विश्वास हो जाने पर दी जा सकती है माफी की राहत : करियारे

डीएसपी मुख्यालय रामगोपाल करियारे


डीएसपी मुख्यालय रामगोपाल करियारे ने इस विषय में बताया कि जिले के थानों में 100 गुण्डा, निगरानी बदमाश दर्ज हैं जिनकी सतत् निगरानी की जा रही है। समय-समय पर अभियान चलाकर 41 लोगों को जिलाबदर भी किया जा चुका है।  ऐसे लोग जो कम से कम 5 वर्ष या उससे अधिक समय से कोई घटनाकारित ना किए हों, अपराधों में उनकी संलिप्तता ना हो, आदत-व्यवहार में सुधार हो गया हो, उम्रदराज हो चुके हों और ऐसे लोगों पर पुलिस को विश्वास हो जाए तो माफी की राहत ऐसे गुण्डा-निगरानी बदमाशों को दी जा सकती है। इस संबंध में जिला पुलिस द्वारा जल्द ही उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में अभियान चलाया जा सकता है।

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