Tuesday, March 24, 2026
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निलंबन के बाद बहाल हुए रामपुर चौकी प्रभारी जांगड़े फिर लाइन अटैच, पुर्रे नए प्रभारी, टीआई अभय पसान गए, राणा लाइन में


कोरबा(खटपट न्यूज़)। पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने विभागीय कार्य में कसावट लाने के लिए चार पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में फेरबदल किया है। महकमे में चर्चित इस फेरबदल से रामपुर चौकी प्रभारी निरीक्षक राजेश जांगड़े पुन: प्रभावित हुए हैं। इससे पहले मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र में बतौर प्रभारी पदस्थ राजेश जांगड़े को एक शिकायत पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया गया। कुछ दिनों के बाद पुन: बहाल कर रामपुर चौकी का प्रभारी बनाया गया। कुछ ही महीने बीते हैं कि श्री जांगड़े को पुन: लाइन हाजिर कर दिया गया है। श्री जांगड़े के अलावा 3 अन्य निरीक्षक प्रभावित हुए हैं। रक्षित केंद्र से निरीक्षक पौरुष पुुुरेे को रामपुर चौकी का नया प्रभारी बनाया है। पसान थाना प्रभारी निरीक्षक आरके राणा रक्षित केंद्र भेजे गए हैं जबकि उनके स्थान पर निरीक्षक अभय सिंह बैस पसान के नए थाना प्रभारी होंगे।

हालांकि कुछ दिनों से जिले में चल रहे तबादला के तौर-तरीके पर महकमे के लोग भी विस्मित हैं। दबी जुबान में कहा जा रहा है कि कोतवाली के अधीन आने वाले रामपुर पुलिस सहायता केंद्र में सीनियर टीआई की पदस्थापना के मायने क्या हैं? इससे पहले मानिकपुर सहायता केंद्र में भी यही हुआ था जब सीनियर टीआई राजेश जांगड़े को उनसे जूनियर टीआई दुर्गेश शर्मा के अधीन पदस्थ किया गया। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत तो कुछ भी किया जा सकता है लेकिन कामकाज में जब सीनियर-जूनियर की बात आती है तो दबी-छुपी तौर पर मलाल रह ही जाता है। पौरुष पुर्रे 2003 बैच के सीनियर टीआई होने से व कोतवाली टीआई दुर्गेश शर्मा के 2008 बैच के होने से जूनियर के अंडर में सीनियर कैसे काम करेगा, आदेश फॉलो करेगा, यह भी चर्चा बनी है। यदि बैच एक समान हो तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन अनुशासन और सीनियर-जूनियर के फर्क का बखूबी पालन करने /कराने वाले इस विभाग में महकमे के लोग भी चाहते हैं कि काम के सिलसिले में टकराहट नहीं होनी चाहिए। वैसे भी एक थाना पूरे जिले में सुर्खी बना हुआ है जहाँ एक सीनियर एसआई समानान्तर टीआई की तरह काम कर रहे हैं। फर्क स्टार और ओहदे का है लेकिन सीनियर अपने रसूखदार परिचय के बलबूते अंगद का पांव की तरह टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे। इनकी विशेष तौर पर पदस्थापना कराने वालों के लिए ये कानूनी ढाल की तरह हैं जबकि गंभीर शिकायतों के बोझ को भी ढोये हुए हैं। इतनी शिकायतों पर तो खुद ही समक्ष में उपस्थित हो कर अपनी कार्य छवि को बेदाग साबित करने इन्हें फेरबदल करा लेना चाहिए पर इसे संज्ञान में न लेना, शिकायत जांच की कछुआ गति का रहस्य महकमे के लोग भी समझ नहीं पा रहे कि दागदार सीनियरों पर इतनी मेहरबानी किसलिए?

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