
कोरबा-कटघोरा (खटपट न्यूज़ )। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य के सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ का निर्माण कराया गया। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहरों और नगरों के प्रमुख स्थलों एवं उद्यानों का सौंदर्यीकरण करते हुए वहां अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं और उनका विधिवत लोकार्पण भी किया गया। राज्य के कुल 187 नगरीय निकायों, जिनमें 14 नगर निगम, 50 नगर पालिका और 123 नगर पंचायत शामिल हैं, में इस योजना को लागू किया गया। इसके लिए शासन द्वारा लगभग 46 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में स्वीकृत की गई। योजना के अनुसार नगर निगमों को 50 लाख रुपये, नगरपालिकाओं को 30 लाख रुपये तथा नगर पंचायतों को 20 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई स्थानों पर निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कोरबा जिले की कटघोरा नगर पालिका परिषद में निर्मित ‘अटल परिसर’ को लेकर भी ऐसे ही गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, जिसे स्थानीय लोग भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण बता रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कटघोरा नगर पालिका परिषद द्वारा इस परिसर का निर्माण कराया गया, जबकि निर्माण कार्य का ठेका नगर के व्यवसायी एवं ठेकेदार मनोज अग्रवाल को दिया गया था। आरोप है कि मनोज अग्रवाल ने यह कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कटघोरा मंडल अध्यक्ष को सौंप दिया। निर्माण कार्य कई महीनों तक चलता रहा, लेकिन सबसे बड़ा विवाद परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर सामने आया है।

ब्रॉन्ज की जगह लगा दी सीमेंट व पत्थर की प्रतिमा
आरोपों के मुताबिक, परियोजना के तहत परिसर में ब्रॉन्ज (तांबे) की प्रतिमा स्थापित की जानी थी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 14 लाख रुपये बताई जा रही है। लेकिन आरोप है कि वास्तविकता में ब्रॉन्ज की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय सीमेंट की प्रतिमा तैयार कर उस पर केवल ब्रॉन्ज रंग का पेंट कर दिया गया। दावा किया जा रहा है कि इस प्रतिमा की वास्तविक लागत निर्धारित राशि की तुलना में काफी कम है और शेष राशि का बंदरबांट कर लिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में हुई बारिश के बाद प्रतिमा पर चढ़ाया गया ब्रॉन्ज रंग जगह जगह उखड़ने लगा है, जिससे प्रतिमा की वास्तविक सामग्री सामने आने लगी है। लोगों का आरोप है कि यदि प्रतिमा वास्तव में ब्रॉन्ज की होती तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। यही वजह है कि अब पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पेटी कॉन्ट्रैक्टर भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी होने के साथ-साथ कटघोरा विधायक के करीबी कार्यकर्ता माने जाते हैं। ऐसे में विपक्ष और स्थानीय नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस पूरे निर्माण कार्य की जानकारी जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं थी।
यदि लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृतियों को समर्पित योजना की गरिमा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। अब स्थानीय नागरिक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।















