0 43 लाख की गड़बड़ी को 1.75 लाख में समेटा अधिकारियों ने

कोरबा (खटपट न्यूज)। फर्जी बिल लगाकर 43 लाख रुपए से अधिक की राशि का गबन करने के मामले में जांच दल द्वारा शिकायत सही पाए जाने के बाद लीपापोती करने के लिए दोबारा जांच करवाई गई। शिकायतकर्ता की आशंकाओं को सही साबित करते हुए फर्जी बिलों में हेर-फेर किया गया और गबन की राशि को 1 लाख 75 हजार तक पहुंचा दिया। इस पर वसूली और एफआईआर का निर्देश देकर जिला अधिकारी भूल गए। अब गबनकर्ता को पूरी-पूरी राहत देने की तैयारी है।
मामला जनपद पंचायत करतला के ग्राम पंचायत साजापानी का है जो जनपद से लेकर जिला पंचायत तक सुर्खियां बंटोर चुका है। इस मामले के शिकायतकर्ता अधिवक्ता शिवचरण चौहान ने एक बार फिर कलेक्टर का ध्यानाकर्षण कराया है। सौंपे गए शिकायत में बताया कि सीईओ जिला पंचायत द्वारा कराई गई जांच में जय हनुमान ट्रेडर्स ग्राम कांशीपानी के नाम से 47 नग फर्जी बिल बनाए जाकर वर्ष 2015-16 से 2018-19 तक 43 लाख 10 हजार 200 रुपए का गबन किया गया। इसकी जांच कर प्रतिवेदन सौंपा गया। बाद में फिर से जांच कराई गई और 47 नग फर्जी बिल में से 38 बिल को गायब कर दिया गया। मिलता-जुलता जय हनुमान ट्रेडर्स ग्राम कांशीपानी ग्राम पंचायत लबेद के नाम से 38 नग बिल राशि 35 लाख 90 हजार रुपए का समावेश अवैध ढंग से कर दिया गया। मात्र 1 लाख 75 हजार रुपए की खानापूर्ति वसूली का मामला तैयार कर एफआईआर का निर्देश जिला पंचायत सीईओ नूतन कंवर के द्वारा दिया गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 35 लाख 90 हजार रुपए का काम होना बताया गया है जबकि उक्त कार्य का मूल्यांकन नहीं हुआ है, कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली थी। उक्त ट्रेडर्स के नाम पर क्रय सामान का भुगतान व धनादेश जारी नहीं हुआ है। 2016-17 में लगभग 6 लाख का मुरुमीकरण दर्शित है जिसे 11 जुलाई 2022 को मौके पर मुरुमीकरण पाया जाना संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के भ्रष्टाचार को इंगित करता है। पंचायत कार्य में मुरुमीकरण शासन से वर्जित है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि उसकी शंका के बावजूद गंभीरता नहीं दिखाई गई और जांच को बार-बार परिवर्तित किया गया जिनके ऊपर आरोप है ऐसे सचिव, सरपंच, रोजगार सहायक से वर्तमान तक सेवा ली जा रही है। अपने आदेश का पालन करा पाने में एवं सरकारी धन के गबन में सहयोग में जिला सीईओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिवचरण चौहान ने जिला सीईओ, करतला जनपद सीईओ, करारोपण अधिकारी कलेश्वर सिंह कंवर एवं उदय सिंह कंवर ग्राम साजापानी के संबंधित सचिव, सरपंच एवं रोजगार सहायक से 35 लाख 90 हजार रुपए की वसूली हेतु कलेक्टर से आग्रह किया गया है। देखना यह है कि फर्जी बिल गायब करने, शासकीय राशि का गबन करने के इस लंबित मामले में कलेक्टर किस हद तक संज्ञान लेकर और किस तरह की प्रभावी कार्यवाही करते हैं।
0 मनरेगा तालाब राख से पाटने के मामले में सब खामोश
तालाबों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईन का खुला उल्लंघन कोरबा जिले में किया गया। जनपद कोरबा के अंतर्गत ग्राम बरीडीह में मनरेगा के लगभग 13 लाख रुपए से निर्मित तालाब को नजदीकी संयंत्र की राख से पटवा दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और चंद धनलोलुप जनप्रतिनिधियों ने एक तरह से सांठ-गांठ कर तालाब की हत्या कर दी। सारे प्रमाण खिलाफ में होने के बाद भी किसी तरह की कार्यवाही आज तक तय नहीं हो सकी है जबकि इस मामले से तत्कालीन कलेक्टर, वर्तमान जिला सीईओ, कोरबा प्रवास पर आए केंद्रीय पंचायत मंत्री गिरिराज सिंह भी वाकिफ हुए। रामपुर विधायक ननकीराम कंवर के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया लेकिन वे भी खामोश हैं। पूर्व वित्त आयोग के अध्यक्ष विरेन्द्र पांडेय ने इस मामले में लिखा-पढ़ी की और खामोश बैठ गए। कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासनिक और चंद जनप्रतिनिधियों की सांठ-गांठ से सुप्रीम कोर्ट हो या मनरेगा, उसके निर्देशों का उल्लंघन बेखौफ किया जा सकता है और यह कोरबा जिले में बहुत ही आसान है। जिला पंचायत के अधिकारी राख डम्प करने वाले ठेकेदार से लेकर अनुमति देने वाले अधिकारी, जिम्मेदार सचिव, सरपंच, मनरेगा रोजगार सहायक एवं इसमें संलिप्त अन्य लोगों को पूरी तरह से बचाने का काम कर रहे हैं जो इनकी अपने पदीय दायित्व के निर्वहन में खोट उजागर करता है।















