0 अपने मांगो के समर्थन के लिए जिले के मंत्री ,सांसद ,विधायक से छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य- गीत के साथ करेंगे अपील
कोरबा(खटपट न्यूज़)। भूविस्थापितो की समस्याओ छोटे खाते व पुराने अर्जन में लंबित रोजगार , शासकीय भूमि पर बने मकान में 100% सोलिशियम सहित भूविस्थापित एवं किसानो की ज्वलंत मांगो को लेकर एसईसीएल गेवरा कार्यालय के धरना स्थल से सीएमडी कार्यालय और उच्च न्यायालय बिलासपुर तक पदयात्रा करने का फैसला लिया गया इस पदयात्रा को न्याय यात्रा का नाम दिया गया है ।

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के कार्यकारणी की बैठक में एसईसीएल सहित जिले के अन्य संस्थानों में रोजगार , बसाहट , मुआवजा , से जुड़ी हुई सभी समस्याओं का विस्तार से चर्चा किया गया । जिसमें सन्गठन द्वारा उठाये गए मुद्दों पर अब तक प्राप्त उपलब्धियों के बारे बताया गया । बैठक में अध्यक्ष सपूरन कुलदीप ने बताया कि वर्ष 2014 से लगातार इतिहासिक जुझारु संघर्षो के जरिये पूरे जिले भर में भूविस्थापित किसानो को न्याय और सम्मान दिलाने में कई महत्वपूर्ण जीत हासिल किया है। सन्गठन के आन्दोलन के दबाव में एस ई सी एल को अपने कई नियमो में संशोधन करने के लिए बाध्य होना पड़ा है और गरीब किसानो को राजस्व मामलो में न्याय मिला है। पिछले वर्षों में चलाये गए एस ई सी एल के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन के कारण मुख्यालय स्तर और कलेक्ट्रेड में बैठके आयोजित की गयी और भूविस्थापितो की समस्याओं के निराकरण के लिए पहली बार प्रभावित ग्रामो के हर घर में राजस्व अधिकारियों ने सर्वे किया वर्षों से अटके पड़े पुराने रोजगार का रास्ता आसान हुआ जिसमें रैखिक सबंधों, अलग अलग समय मे अर्जन, दस्तावेजो की कमी के कारण रुके हुए रोजगार के लिए द्वार खोल गए, जिससे कई लोंगो को नौकरी मिल पाया इसके साथ कई बड़े बदलाव किए गए हैं जैसे बसाहट के बदले दी जाने वाली मुआवजा राशि 3 लाख से बढाकर 10 लाख और एकमुश्त गांव द्वारा लेने पर 15 लाख रुपये, परिसम्पतियों के मूल्यांकन के समय 18 वर्ष आयु होने पर अलग परिवार मानते हुए बसाहट के लिए पात्र होंगे। रोजगार के लिए कम जमीन वाले अपात्र को न्यूनतम 50 हजार से बढाकर 5 लाख रूपये व प्रति एकड़ पर 10 लाख, एन्युटी स्किम में बड़ा पैकेज आफर किया गया है। वही अर्जन के बाद जन्म वाले मामले पर भी हाई कोर्ट के डबल बेंच में पिटीशन लगाने का सुझाव दिया गया। 5 लाख रुपये तक की टेंडर भूविस्थापित के लिए आरक्षित किया गया है तथा आउटसोर्सिग कंपनियों में 70 प्रतिशत भर्ती शुरू की गई है। युवाओ और महिलाओ को स्वरोजगार दिलाने के लिए प्रशिक्षण तथा मशीन दिया जा रहा है। बसाहट को सर्वसुविधा युक्त मार्डन कालोनी बनाने का निर्णय लिया गया है। ये सभी जीत हम सबकी एकताबद्ध संघर्षो का नतीजा है जिसमे कोई राजनैतिक स्वार्थ नही रहा। इन सभी बातो को आम जनता तक पर्चा , मीटिंग के जरिये पहुचाई जाए । अब हमारी लड़ाई शासकीय व वन भूमि एवं भूमिहीन लोंगो की जमीन पर बने मकानों की सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता हर खाते (छोटा हो बड़ा बिना भेदभाव ) पर रोजगार पुराने रोजगार के मामलो का जल्द से जल्द निराकरण करने और अर्जन के बाद जन्म में रोजगार देने, गाँव का अर्जन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की व्यवस्था, पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापसी, पुनर्वास ग्रामो व प्रत्यक्ष प्रभावित ग्रामो में जिला खनिज न्यास मद संस्थान के नियमानुसार 60 प्रतिशत खर्च करने, शिक्षा, स्वास्थ और रोजगार सृजन के लिए सुनिश्चित कराने के लिए, भूविस्थापितो के बच्चो को निशुल्क उच्च शिक्षा पढाई लिखाई और इलाज की सुविधा गाँव में रहने वाले गरीब किसानो की राजस्व मसलों फौती, बंटाकन नामांतरण, सीमांकन आदि की समस्या को दूर कराने के लिए अपने संघर्ष को बड़ा करना है।

बैठक में अध्यक्ष द्वारा रखे गए रिपोर्ट पर अपनी सुझाव रखते हुए विजयपाल सिंह सचिव , बसन्त कवर दीपका अध्यक्ष , गजेंद्र सिंह कोरबा संयोजक , दीपक यादव गेवरा अध्यक्ष , रुद्र महंत , ललित महिलांगे , श्रीकांत सोनकर , सन्तोष चौहान , भागीरथी यादव , दिलहरन दास , गोपाल बिंझवार , दशरथ बिंझवार ,तिरिथ राम केशव आदि ने कहा कि एसईसीएल और राजस्व विभाग में लटके मामले के साथ हाई कोर्ट में अटके पड़े मामलों पर हमें छत्तीसगढ़िया सत्याग्रह करनी होगी , और हमारे जिले के जनप्रतिनिधियों के कार्यालय के समक्ष लोक गीत नृत्य के साथ समर्थन प्रदर्शन करनी चहिये और निर्णय लिया गया कि 2 दिसम्बर को एसईसीएल गेवरा धरना स्थल से एक न्याय यात्रा निकाली जाएगी जो पाली रतनपुर के रास्ते हाई कोर्ट पहुंचकर चीफ जस्टिस को भुविस्थापितों को लंबित प्रकरणो की जल्दी सुनवाई पूर्ण करने की मांग की जाएगी । इससे पूर्व अलग अलग तारीखों में जिले के विधायक , सांसद और मंत्री को भुविस्थापिटो को समर्थन के लिए छत्तीसगढ़ की लोकगीतों के साथ अपील किया जाएगा ।















