Wednesday, March 25, 2026
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कलेक्टर साहब,जरा इनकी भी खबर लीजिए!मनरेगा तालाब पाट कर खींसे निपोर रहे..न एफआईआर न कोई दण्ड…?

तत्कालीन जांच की तस्वीर

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जल संरक्षण के लिए अमृत सरोवर योजना के तालाब नहीं खुद पाने पर कोरबा कलेक्टर संजीव कुमार झा ने सख्त तेवर दिखाए हैँ। स्थल अनुपयुक्त बताने वाले आरईएस के sdo से लेकर मनरेगा के एपीओ तक को बुरी तरह फटकारा है। जाहिर सी बात है कि योजना को फाइल में कैद कर देंगे तो जनता को लाभ नहीं मिलेगा और लाभ नहीं तो सरकार की किरकिरी होगी जो शीर्ष अधिकारी को पसंद नहीं। अब इससे कहीं ज्यादा गंभीर और दंडनीय अपराध किया गया है मनरेगा के निर्मित तालाब को पाट कर। सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन अधिकारियों की शह और चंद जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से हुआ है। फ्लाई ऐश (राख) पाटने वाले ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के मनरेगा तालाब को ही राख से पटवा दिया गया। इसकी जांच प्रशासन ने दो टीम से कराया,तालाब को पाटना सही पाया गया लेकिन आज तक कार्यवाही नहीं हो सकी है। चंद जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार की योजना का बंटाधार होने के बाद भी प्रशासन को कार्यवाही न करने के लिए सांठगांठ कर खींसे निपोर रहे हैं। क्या कलेक्टर इस मामले में संज्ञान लेंगे और संलिप्त सभी लोगों पर कार्यवाही/एफआईआर/अर्थदण्ड/रिकव्हरी आदि से इन्हें दंडित कर पाएंगे, यह बड़ा सवाल है। चूंकि पूर्व कलेक्टर ने तो इस मामले में कुछ किया ही नहीं।
0 यह है मामला
फिर से बता दें कि कोरबा जिले के विकासखंड व जनपद कोरबा के ग्राम बरीडीह के धनवार पारा में मनरेगा के तहत वर्ष 2016-17 में तालाब का निर्माण स्वीकृत हुआ था। 12 लाख 81 हजार 700 रुपए की स्वीकृत राशि के साथ 30 दिसंबर 2016 को आदेश जारी हुआ। 23 जनवरी 2019 को कार्य प्रारंभ होकर 29 जून 2019 को कार्य पूर्ण हुआ जिसमें श्रमिक लागत 12 लाख 57 हजार 410 रुपए आई। 1700 मीटर लंबाई-चौड़ाई क्षेत्रफल में निर्मित इस तालाब को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के विपरीत जाकर राखड़ से पाट दिया गया है।
खटपट न्यूज़ ने इस मामले को सामने लाया तो कलेक्टर/जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर कोरबा जनपद के सीईओ जीके मिश्रा, जिला पंचायत से परियोजना अधिकारी बीपी भारद्वाज, आरईएस के एसडीओ कमल साहू, उपयंत्री दिनेश कुमार साहू एवं कोरबा जनपद से करारोपण अधिकारी श्री चतुरानन ने मौका मुआयना किया। यहां तालाब की शिलापट्टिका जरूर मिली लेकिन तालाब का नामोनिशान मिट चुका था। टीम ने इस मनरेगा तालाब को राख से पाटना प्रमाणित किया। कार्यवाही की अनुशंसा कर बड़ी जल्द दोनों जांच रिपोर्ट जिला सीईओ को सौंप दी गयी। सीईओ नूतन कंवर द्वारा संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया जिसकी स्थिति बताने के लिए वे फोन उठाते ही नहीं। जांच प्रतिवेदन में सरपंच और रोजगार सहायक को बर्खास्त करने एवं सचिव पर निलंबन की अनुशंसा की गई है लेकिन ठेकेदार…? दूसरी ओर इस मामले को दबाने/ रफा-दफा कराने के मंसूबे में कुछ नेता नुमा दलाल सफल हुए हैं। इनके द्वारा संबंधित ठेकेदार जिसने राख फिंकवाया है, उसे बचाने के लिए जोर लगाया गया है जबकि वह एफआईआर का हकदार है।
0 आदेश कहीं का,फायदा उठा लिया ठेकेदार ने
गांव बरीडीह में रेत के चोरों ने स्थानीय राजनीतिक संरक्षण में अवैध खनन कर 3-4 बड़े-बड़े डबरीनुमा गड्ढे बना दिये थे। इसमें भरे पानी में बच्चों की मौत के बाद गड्ढों को पटवाने के लिए 29 जनवरी 2021 को ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराया गय। तत्कालीन कोरबा एसडीएम सुनील कुमार नायक एवं क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल अधिकारी द्वारा पंचायत भवन के आसपास एवं धनवार पारा के गड्ढों को पाटने की अनुमति 17 जुलाई 2021 को दी गई थी जिसका दायरा न जाने क्यों ज्यादा लिखा गया। इस अनुमति का दुरुपयोग कर व ग्राम पंचायत की शह पर लैंको के ठेकेदार को लाभ पहुंचाने तालाब को ही पटवा दिया गया। सरपंच-सचिव ने जानते हुए भी नियमों का उल्लंघन किया वहीं रोजगार सहायक ने भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा। सरपंच कृपाल सिंह, सचिव गजराज सिंह तथा रोजगार सहायक सहित मनरेगा के जवाबदार लोगों की जानकारी में तालाब को पाटा गया। जांच होने उपरांत भी कोई रोक नहीं लगी बल्कि ऊपर मिट्टी पाटी जाती रही।

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