Thursday, March 26, 2026
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बड़े झाड़ के जंगल की फर्जी रजिस्ट्री..? पूर्व एल्डरमैन ने उठाया करोड़ों का मुआवजा

0 बिलासपुर-कटघोरा एनएच के भूमि अधिग्रहण में बड़ा फर्जीवाड़ा
कोरबा-कटघोरा(खटपट न्यूज़)। बिलासपुर से कटघोरा तक बन रहे नेशनल हाईवे क्रमांक- 130 के लिए भूमि अधिग्रहण में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। नगर पालिका परिषद के पूर्व भाजपा एल्डरमैन दिनेश कुमार ने सांठगांठ से इस  फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया है। ग्राम मदनपुर से गुजरते वक्त राष्ट्रीय राजमार्ग में आ रही जंगल भूमि को फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा कर लगभग 2 करोड़ की मुआवजा राशि हासिल कर ली गई है। इसकी शिकायत पर जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार कटघोरा अनुविभाग के पाली तहसील अंतर्गत आने वाले मदनपुर प.ह.न.8, रा.नि.म. मदनपुर की भूमि खसरा न. 412, रकबा 1.58 एकड़ अधिकार अभिलेख में दर्ज शासकीय भूमि ( बड़े झाड़ का जंगल ) को पटवारी और भू- माफियाओं के जरिये फर्जी तरीके से पट्टा बनाकर बिना कलेक्टर की अनुमति से क्रय-विक्रय किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रीय राजमार्ग में बटांकन कर रकबा 412 दिनेश कुमार पिता श्यामलाल, सुंदर अग्रवाल व अन्य अनिल कुमार पिता श्यामलाल, प्रेमलाल पिता श्यामलाल, किरण कुमार पिता श्यामलाल, अशोक कुमार पिता श्यामलाल खातेदार के नाम पर लगभग 1करोड़ 90 लांख से अधिक का मुआवजा प्राप्त कर लिया गया। पटवारी तथा आरआई से सांठगांठ कर बड़े झाड़ के जंगल को फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा कर इस फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया है।

हालांकि यह बात भी सामने आ रही है कि दिनेश कुमार के परिजन द्वारा उक्त भूमि एक ग्रामीण से खरीदना बताया जा रहा है परंतु सवाल यह है कि जंगल मद की जमीन उस ग्रामीण के नाम पर कैसे आई? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि उक्त ग्रामीण से जमीन लेने के बाद 8 नवंबर 2017 को बटांकन/ नामांतरण का आवेदन लगाया जाता है और 15 नवंबर को सारी प्रक्रिया पूरी होकर नामांतरण भी हो जाता है। ग्रामीण से जमीन खरीदने वाली महिला अपने पुत्रों के नाम पर इसे करा लेती है। नियमतः इसके लिए जो प्रक्रियाएं अनिवार्य होती हैं या तो उसकी अनदेखी हुई है या फिर सांठगांठ से काम इतना तेज चला कि अमूमन आम लोगों के लिए 2 से 3 महीने में होने वाला कार्य महज 7 दिन के भीतर सारी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर करा लिया गया। इसकी निष्पक्ष और इमानदाराना जांच की जरूरत है क्योंकि नेशनल हाइवे में जमीन निकलने के बाद रजिस्ट्री होना, टुकड़ों-टुकड़ों में जमीन की खरीदी और इसके आधार पर बड़ा मुआवजा हासिल कर नेशनल हाईवे अथॉरिटी और सरकार को करोड़ों की चपत लगाई गई है। राजस्व विभाग के तत्कालीन पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम की भूमिका को जांच के दायरे में समाहित करना अत्यंत जरूरी है। यह एक बड़ा जमीन घोटाला हो सकता है अगर सरकार इसकी निष्पक्ष जांच कराए।

0 पाबन्दी के बाद भी धड़ाधड़ हुई रजिस्ट्रियां
नेशनल हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण के इस मामले में नियमों को ताक पर रखकर लाभ लेने वाले लोगों में विभिन्न राजनीतिक दल के नेता, कटघोरा- कोरबा के बड़े व्यापारी व अधिकारी भी शामिल हैं। यह सारा खेल पूर्व में तीन महीने के दौरान तब हुआ है जब प्रशासनिक अमला चुनावी तैयारियों में जुटा था। मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त 2018 के बाद अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी, मगर कम से कम 3 दर्जन से अधिक रजिस्ट्रियां कोरबा में हुई। यहां तक की एक राजस्व अधिकारी ने अपने अधीनस्थ छोटेे कर्मचारी के नाम से चार अलग-अलग रजिस्ट्री कराई। 25 से 30 लाख रुपए इसमें खर्च हुए तो भला अधिनस्थ छोटे कर्मचारी के पास इतनी कहांं से और कैसे आई, यह भी जांच का विषय है।
0 एसडीएम ने गठित किया जांच दल
इसकी लिखित शिकायत कटघोरा निवासी शशिकांत डिक्सेना के द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (रा) सूर्यकिरण तिवारी से गई तो इन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच कराने की बात कही। अनुविभागीय अधिकारी ने तहसीलदार के नेतृत्व में जांच टीम बनाई है और इस जांच में दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाने की बात कही है।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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