0 अनजाने में ही सही, आप खुद ही परोस देते हैं डेटा एक्ससेस,
0 साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता, सतर्कता व सुरक्षा पर कमला नेहरु काॅलेज में वर्कशाॅप आयोजित

कोरबा। ये कुछ नया नहीं, ज्यादातर यूजर की जिंदगी में यही घट रहा है। हम सोचते हैं, कि सिर्फ दो मिनट मोबाइल देखकर पढ़ाई करने बैठूंगा। सोशल मीडिया पर चैट करुंगा या कुछ मिनट रील देखकर फोन बंद कर दूंगा। पर कब एक घंटा निकल गया, दोपहर से शाम हो गई, पता ही नहीं चलता। आप बस एक बार डिस्कस कर के देखो, कि मुझे गोवा घूमने जाना है और ढेर सारे टूर पैकेज, होटल समेत आपकी स्क्रीन पर उनके विज्ञापनों की बाढ़ आ जाएगी। अनजाने में ही सही, आप खुद ही अपनी गैलरी, निजी डिटेल की एक्ससेस दे देते हैं, फिर कैसे न हो डेटा की चोरी? ध्यान रखें कि आपका फोन ही आपकी आवाज, आपके हर मूवमेंट की निगरानी कर रहा है।

यह बातें बुधवार को स्पैम के माध्यम से डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति सतर्कता-सजगता एवं सुरक्षा, साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता पर कमला नेहरु महाविद्यालय कोरबा में आयोजित वर्कशाॅप को संबोधित करते हुए विषय विशेषज्ञ जतिन भट्ट ने कही। प्राचार्य डाॅ प्रशांत बोपापुरकर के मार्गदर्शन में कंज्यूमर एजुकेशन वर्कशॉप पर फोकस करते हुए इस वर्कशाॅप के मुख्य वक्ता के रूप में इंदौर से आए वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के कस्टमर सर्विस विभाग के सहायक महाप्रबंधक जतिन भट्ट ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने साइबर अपराध से संबंधित विभिन्न प्रकार की ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया सुरक्षा एवं डिजिटल सतर्कता पर विस्तार से जानकारी दी। साइबर अपराध से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताने के साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं के प्रश्नों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। प्राचार्य डाॅ प्रशांत बोपापुरकर ने इस कार्यशाला को आवश्यक व उपयोगी बताते हुए छात्र-छात्राओं को ध्यानपूर्वक ज्ञानवर्धन करने प्रेरित किया। कंप्यूटर साइंस विभाग के समन्वयन से यह कार्यक्रम कंप्यूटर लैब में रखी गई थी। इस अवसर पर आईटी विभागाध्यक्ष डॉ बिना विश्वास, आशुतोष शर्मा, अभिषेक तिवारी, सुधा जायसवाल समेत महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

यूसीसी से फ्राॅड के पैंतरे व डीएनडी के फायदे भी समझाए
कार्यशाला में छात्र-छात्राओं के साथ परस्पर संवाद स्थापित करते हुए पहले तो उनकी जानकारी का आंकलन किया गया, उसके बाद सस्पेक्टेड स्पैम, अन्सोलिसिटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन (यूसीसी), डिजिटल अरेस्ट, एसएमएस और वाइस काॅल के जरिए मोबाइल यूजर्स से धोखाधड़ी या बेचने का झांसा देकर फ्रॉड पर महत्वपूर्ण बातें साझाकी गई। साथ ही डू नाॅट डिस्टर्ब (डीएनडी) एक्टिवेट करने व ट्राई के एप पर साइबर ठगी से बचने की विधियों से भी अवगत कराया गया। हमारा डेटा कैसे लीक होता है, सोशल मीडिया व अन्य तरीके से डेटा चोरी, यूजर के हर स्टेप की निगरानी किस तरह से हो रही है, इसके लिए यूजर द्वारा कॉन्टैक्ट शेयर करने, गैलरी का एक्सेस परमिशन प्रदान करने जैसी असावधानी बताते हुए सजग किया गया।।
















