Wednesday, March 25, 2026
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SECL:समस्याओं को उलझाया जा रहा,घेरा जाएगा गेवरा प्रबंधन


0 भूविस्थापितों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय

कोरबा-दीपका(खटपट न्यूज़)। ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने जिला प्रशासन ,एसईसीएल और ऊर्जाधानी संगठन के मध्य विगत नवम्बर एवं फरवरी महीने में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप समस्यओं का निराकरण करने की बजाय अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए एसईसीएल प्रबन्धन एवं राजस्व विभाग द्वारा भू विस्थापितों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसा करने का आरोप लगाते हुए एक बार पुनः आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है और 31 मई को आक्रोश रैली के साथ अनिश्चित कालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा किया गया है ।

पुनर्वास ग्राम गांधीनगर बेलटिकरी में ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति की आयोजित विशेष बैठक में अपनी समस्याओं के निराकरण नही होने अधिकारियों द्वारा महज खानापूर्ति करने से आक्रोशित भुविस्थापितों ने एक बार फिर से उग्र आंदोलन में जाने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्व सम्मत्ति से पारित किया गया।
समिति के अध्यक्ष सपूरन कुलदीप ने बताया कि कि गत वर्ष नवम्बर माह में एसईसीएल बोर्ड डायरेक्टर्स तथा कलेक्टर व सभी उच्चधिकारियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुए बैठक में सार्थक निर्णय लिया गया था और कलेक्टर श्रीमती साहू द्वारा कड़ा फैसला लेते हुए खदानों से प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व व एसईसीएल के सयुंक्त टीम द्वारा एक माह तक सर्वेक्षण कर समस्याओ का आंकलन रिपोर्ट बनाया गया था । उसके बाद किये गए प्रगति कार्यो पर फरवरी महीने में समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी जिसमे विधायक द्वय पुरुषोत्तम कंवर एवं मोहित केरकेट्टा भी मौजूद थे । समीक्षा बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया गया था और तीन महीने में समस्याओ के निराकरण करने , किन्ही कारणवश छूटे हुए रोजगार के अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया था । इस बीच एससीएल प्रबन्धन द्वारा अपने कार्यो में गंभीरता जरूर दिखाई है किंतु वह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता । पुराने रोजगार के मामलों के आवेदनों में स्कूटनी के बाद रोजगार के लिए पात्र एवं अपात्र लोंगो को सूचित करने के बजाय केवल दस्तावेजो में कमी वाले लोंगो को सूचना भेजी गई थी और उसमें भी नौकरी नही लग सकता कहकर वापस लौटाया जा रहा है , अर्जन के बाद जन्म , रैखिक संबंध , अलग अलग अधिग्रहण , कोल इंडिया नीति 2012 में संशोधन करने , वैकल्पिक रोजगार के लिए आउटसोर्सिंग कम्पनियो में 70% भूविस्थापितों के आरक्षण , पुनर्वास ग्रामो की बुनियादी सुविधाओं , जमीन एवं मकानों के मुआवजा दर में बढ़ोतरी जैसी विषयों पर अब तक सार्थक पहल नही किया गया।
गजेन्द्र सिंह तंवर ने कहा कि प्रबन्धन केवल गुमराह करते आयी है और ग्रामीणों को आपस मे लड़वाकर अपनी स्वार्थ सिद्ध करती है । हमें इनकी झूठ और फरेब के खिलाफ एकताबद्ध लड़ाई को तेज करना होगा । रविन्द्र जगत ने कहा दीपका प्रबन्धन के अधिकारी किसी भी तरह से उत्पादन बढ़ाने पर चिंता करते हैं उनको भुविस्थापितों की परवाह नही है । प्रकाश कोर्राम ने आव्हान करते हुए कहा अब आर पार की लड़ाई ही एकमात्र रास्ता है । बसन्त कुमार कंवर , नरेंद्र राठौर , गणेश उइके , सुभद्रा कंवर , बृजकुँवर सहित अनेक लोंगो ने एसईसीएल प्रबन्धन और राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा भू विस्थापितों के अधिकार और पूनर्वास से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी तथा शोषण का आरोप लगाते हुए जब तक समस्या तब तक आंदोलन का नारा देते हुए अनिश्चित कालीन आंदोलन छेड़ने का आव्हान किया ।
बैठक में निर्णय लिया गया है कि 31 मई को दीपका मुख्य चौक में सुबह 10 बजे इकट्ठा होकर गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय तक आक्रोश रैली निकाली जाएगी और कार्यालय का घेराव करते हुए अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा ।

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