Wednesday, March 25, 2026
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RTI कार्यकर्ता मनीष ने लौटाई कार, राम प्रकाश के नाम खरीद कर नहीं पटा रहा था किश्त

कोरबा(खटपट न्यूज़)। राम प्रकाश जायसवाल निवासी एमपी नगर कोरबा के द्वारा पुलिस सहायता केंद्र रामपुर में शिकायत दर्ज कराया गया कि आरटीआई कार्यकर्ता मनीष राठौर वर्ष 2018 में राम प्रकाश जायसवाल के नाम पर जीप कम्पास वाहन फाइनेंस कराया था । इसका डाउन पेमेंट 6 लाख रुपए मनीष राठौर के द्वारा किया था , शेष रकम बाद में देने का वायदा कर आगे का क़िस्त राम प्रकाश जायसवाल को पटाने के लिए कहा था। मनीष राठौर की बातों में आकर रामप्रकाश जायसवाल के द्वारा आगे का क़िस्त पटाया जा रहा था।लगभग 3 साल व्यतीत हो जाने व क़िस्त का रकम 4 लाख से ऊपर हो जाने पर प्रार्थी रामप्रकाश द्वारा मनीष राठौर से रकम मांगने पर मनीष राठौर टालमटोल करता था किंतु लगातार मनीष राठौर के द्वारा किस्त का रकम नही देने पर प्रार्थी ने क़िस्त पटाना बंद कर दिया तब फाइनैंस कंपनी वाले प्रार्थी को परेशान करने लगे। इस बात की जानकारी मनीष राठौर को देने पर भी क़िस्त का रकम नही दे रहा था साथ ही फोन उठाना बंद कर दिया और गाड़ी वापस करने से मना कर दिया । प्रार्थी रामप्रकाश जायसवाल द्वारा पुलिस सहायता केंद्र रामपुर में शिकायत दर्ज कराया गया । शिकायत दर्ज होने की सूचना मिलने पर मनीष राठौर द्वारा प्रार्थी राम प्रकाश जायसवाल को कार वापस कर दिया गया है।

0 जनहित की बजाय स्वहित पर ज्यादा जोर: सूचना का अधिकार अधिनियम एक ऐसा हथियार है जिसके जरिए भ्रष्ट कार्यशैली को उजागर किया जाना है। यह पूरी तरह से जनहित के लिए बनाया गया अधिनियम है लेकिन अधिकांश आरटीआई कार्यकर्ता जनहित के इस अधिनियम का दुरुपयोग स्वहित साधने के लिए करते आ रहे हैँ। बहुत ही कम ऐसे लोग हैं जो आरटीआई से मिली जानकारी को साझा कर भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं लेकिन अधिकांश आरटीआई कार्यकर्ता जानकारी निकाल लेने के बाद उसके आधार पर ब्लैक मेलिंग से बाज नहीं आते। इतना ही नहीं आरटीआई कार्यकर्ता होने की धौंस दिखाकर अधिकारी वर्ग से लेकर अन्य वर्ग के लोग जो आरटीआई के दायरे में आते हैं उन्हें भी परेशान करते हैं। यह कोई पहला मौका या मामला नहीं है बल्कि ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें लोग आरटीआई कार्यकर्ता की हरकतों से परेशान हैं लेकिन वे अन्यान्य कारणों से सामने नहीं आते। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं कि अनेक अधिकारियों/अधीनस्थों की भ्रष्ट कार्यशैली के कारण अपना हित साधने वाले तथाकथित आवेदकों और कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं के मनोबल भी बढ़ें हैं। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों/अधीनस्थों को अपनी कार्यशैली सुधारने भी चाहिए वरना जो जैसा करता है उसे उसका परिणाम किसी न किसी सूरत में तो भुगतना ही है, फिर भले वह ब्लैकमेलिंग ही क्यों न हो !

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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