
कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी एसईसीएल के गेवरा परियोजना ने 50 मिलियन से अधिक उत्पादन कर इतिहास रच दिया है। इसकी खुशियाँ पूरे कोल इंडिया में मनाई जा रही है।
केंद्रीय कोयला मंत्री ने शुभकामनाएं प्रेषित की तो एसईसीएल बिलासपुर के सीएमडी डॉ.प्रेम सागर मिश्रा गेवरा में आयोजित कार्यक्रम में एरिया टीम को बधाई देने पहुंचे। अधिकारी, श्रमिक संगठनों के नेताओं के साथ फोटो खिंचवाया और धन्य हो गए। एसईसीएल इस वर्ष के 200 पार के स्लोगन को पूरा करने के लिए कुछ ही कदम दूर है और वह भी पूरा हो जाएगा। इस खुशी में पूरा एसईसीएल परिवार शामिल हो रहा है।
एक तरफ उत्पादन की उपलब्धि का जश्न है तो दूसरी तरफ पिछले दो-तीन पीढ़ी से उचित पुनर्वास, रोजगार, मुआवजा की आस में भटक रहे भूविस्थापित परिवार की समस्याओं की दूर-दूर तक सुनवाई नहीं हो रही है।
कोरबा की धरती के रहवासी वर्ष 1959-60 से देश हित में अपने पुरखों की जमीन कुर्बान करते आ रहे हैं। जमीन देने के बाद असहाय होते जा रहे भू विस्थापित कोल इंडिया और एसईसीएल की दोहरी नीति, बार-बार रोजगार विहीन अधिग्रहण कानून, नीतियों को अपने अनुसार परिवर्तन करने का दंश झेलने विवश हैं।
भूमि अधिग्रहण में मनमानी,रिकॉर्डों से हेरफेर कर फर्जी नौकरी को मदद व संरक्षण भी दे रहे हैं। एसईसीएल के राजस्व अमले की मनमानी,उनके लिपिकीय त्रुटि और जानबूझकर सुधार नहीं करने तथा इसकी आड़ लेकर पात्र लोगों को नौकरी के लिए सालों साल तक भटकाने की भी पीड़ा पात्र लोग भुगत रहे हैं। आधी उम्र बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने का दर्द ओहदे पर बैठे अधिकारी शायद ही समझ पाएं लेकिन ऐसे परिवारों का भविष्य,उनके बच्चों की बेहतर परवरिश, शिक्षा,स्वास्थ्य को दरकिनार कर सिर्फ अपने लक्ष्य की पूर्ति में लगे कंपनी के अधिकारियों की यह उपलब्धि बेमायने है।
भू विस्थापितों की पीड़ा को सुनने के लिए किसी के पास न तो समय है और न ही नेक नीयत। प्रभावित क्षेत्र की जनता भी कोल डस्ट, वायु-जल प्रदूषण,सड़क सहित मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की मार झेल रही है। अपने जायज अधिकार और मांगों के लिए भू-विस्थापित, किसान संघर्ष के लिए सड़क और कानून की लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्रबन्धन अपनी षड्यंत्रकारी नीति से केवल अपने उत्पादन पर ध्यान रख रहा है और कुछ जयचंद हैं जो इस आंदोलन को कमजोर करने में भी सक्रिय रहकर प्रबन्धन को मदद कर अपना सीआर बढ़ाने और जेब भरने में मशगूल हैं। अलग-अलग सन्गठन को सामने कर अपनी ठेकेदारी चमकाने का भी कार्य किया जा रहा है।
श्रमिक और भू-विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ रहे ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपूरन कुलदीप ने प्रभावित भूविस्थापित किसानों के दर्द को उकेरते हुए कहा है कि हजारों की संख्या में लड़ने के लिए मैदान में उतरने वाले भूविस्थापित सैनिकों से आव्हान है कि अपना वर्तमान जैसा भी हो,भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। खासकर इस काले हीरे से भरी धरती माँ की कोख को खोद कर खाली कर देने के बाद हमारी भावी पीढ़ी के सामने आने वाले संकट से बचाने के लिए अपनी एकता और सन्गठन को और मजबूत करें। देशहित में कोयला जरूरी है तो वहीं भूविस्थापितों, प्रभावितों के हितों की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।















