कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरबा जनपद पंचायत का कार्यालय नूरा कुश्ती का अखाड़ा बनकर रह गया है। बीते लगभग 7-8 माह से सीईओ एसएस रात्रे को हटाने की मांग जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती कौशिल्या देवी वैष्णव के द्वारा की जा रही है। उपाध्यक्ष ने सीईओ पर महिला जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहारिक रवैय्या ठीक नहीं होने एवं जनपद सदस्यों, सरपंचों व सचिवों के माध्यम से लगातार मिल रही शिकायतों व उनसे गाली-गलौच करने जैसा गंभीर आरोप लगाया है।
जनपद कार्यालय में कामकाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप की चर्चा यहां के कर्मचारियों सहित आने वाले पंचायत प्रतिनिधियों के बीच होती है। यह मामला जिले से निकलकर राज्य तक जा पहुंचा है और पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर के साथ उपाध्यक्ष श्रीमती कौशिल्या देवी व अन्य ने सीधे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर कार्यवाही की अपेक्षा की थी। जल्द कार्यवाही का आश्वासन आज तक अधूरा है। हाल ही में राज्य महिला आयोग एवं पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से भी आवश्यक जांच हेतु पत्र जिले को जारी किया गया।

इन सब गतिविधियों के मध्य कोरबा ब्लाक के पंचायत सचिवों ने 23 नवंबर को सीईओ रात्रे के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर स्थानांतरण की मांग की है। जिला पंचायत सीईओ को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि श्री रात्रे को नहीं हटाने पर कलमबंद हड़ताल की जाएगी। जनपद उपाध्यक्ष के बाद अब सचिवों के द्वारा सीईओ के खिलाफ शिकायत से जहां मुद्दा गर्म है वहीं दूसरी ओर जनपद अध्यक्ष श्रीमती हरेश कंवर का अपने 15 मई को कलेक्टर को सीईओ के खिलाफ सांैपे गए ज्ञापन में सीईओ को हटाने और उन पर लगाए गंभीर आरोपों से किया गया पलटवार भी सुर्खियों में है। 23 नवंबर को श्रीमती हरेश कंवर ने सीईओ श्री रात्रे को सचिवों की शिकायत के मामले में क्लीन चिट देते हुए शिकायत को असत्य एवं झूठा करार दिया है। इनकी माने तो श्री रात्रे के कार्यकाल में जनपद पंचायत क्षेत्र में शासन की सभी योजनाओं का तीव्र क्रियान्वयन हो रहा है। कुछ सचिव जो अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभा पाने में असक्षम है वे झूठी शिकायत का सहारा लेकर अपनी कमियों को दबा रहे हैं। क्षेत्र भ्रमण के दौरान सरपंचों ने भी श्री रात्रे की कार्यशैली को अच्छा बताया है। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक श्री रात्रे का स्थानांतरण न किया जाए। अध्यक्ष के इस उलट बयान से इस बात पर संशय उत्पन्न हुआ है कि वे सीईओ के खिलाफ पहले की शिकायत में सही थी या अभी पक्ष लेना सही है।
बहरहाल मामूली सी शिकायतों पर जब अधिकारियों को हटा दिया जाता है, तब उच्च स्तरीय व महिला संबंधी गंभीर शिकायत के बाद भी जनपद सीईओ श्री रात्रे को नहीं हटाना अनेक सवालों को जन्म देता है। वे भी आरोपों को झेल कर न जाने क्यों कुर्सी बदल नहीं रहे?


















