0 श्रम विरोधी नीतियों के विरुद्ध 26 नवम्बर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल
कोरबा, (खटपट न्यूज़)। 26 नवंबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को कोयला उद्योग में कामयाब करने के लिए एटक कार्यालय में संयुक्त श्रम संगठन क्रमश: एटक, सीटू, एचएमएस एवं एसईकेएमसी के पदाधिकारियों की बैठक बुधवार को हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए दीपेश मिश्रा ने कहा कि भाजपा सरकार ने सभी को साथ लेकर चलने का जो मुखौटा अपने पहले कार्यकाल(2014-19) में पहना था, उसे 2019 के अपने दूसरे कार्यकाल में उतारकर फेंक दिया है। एक ऐसे वक्त में जबकि मांग की कमी के चलते अर्थव्यवस्था सभी पैमाने पर काफी सुस्त है, सरकार ने व्यापार करने में आसानी के नाम पर गलत नीतियों को जारी रखा। इसके फलस्वरूप व्यापक दरिद्रता की स्थिति और गंभीर हुई, संकट और गहरा गया है। इस प्रक्रिया में कारपोरेट करों को कम करने के अलावा सरकार ने विपक्षी दलों की अनुपस्थिति में संसद में तीन श्रम-विरोधी संहिताओं को नितांत अलोकतांत्रिक तरीके से पारित कर मजदूरों को गुलाम बनाकर बंधुआ मजदूरों के श्रेणी में ला खड़ा किया है। इसी तरह बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 पर 12 मुख्यमंत्रियों के विरोध को अनदेखा कर इसे संसद में प्रस्तुत कर बिल को विधिवत लागू किए बिना सरकार ने बिजली वितरण नेटवर्क का निजी करण शुरू कर मौजूदा कर्मचारियों को नए मालिकों के दया पर छोड़ दिया है। यह सरकार कमर्शियल माइनिंग के जरिए कोल इंडिया के एकाधिकार को पूरी तरह खत्म कर चुनिंदा उद्योग घरानों को लाभ पहुंचाना चाहती है। इन्हीं मसलों पर विरोध दर्ज कराने मजदूरों ने 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का ऐलान किया है। बैठक को एचएमएस के ए.विश्वास एवं सुरेंद्र मिश्रा, सीटू के जनक दास तथा एसईकेएमसी के किशोर सिन्हा ने भी संबोधित किया। इस दौरान राजू श्रीवास्तव, सुभाष सिंह, राजेश पांडे, राजेश दुबे, केके शर्मा, दिलीप सिंह,बी.आर.सुमन, अब्दुल मजीद, डीपी सिंह, दिलीप कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार,आर.एन.तिवारी आदि उपस्थित रहे।