कवि हृदय संभागायुक्त महावर की कविताओं पर केन्द्रित ’कविता का नया रूपाकार’ का लोकार्पण

0 किताब में कविता की 30 समीक्षकों-आलोचकों की विवेचनाएं शामिल
कोरबा /दुर्ग (खटपट न्यूज़) । छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि और प्रशासनिक अधिकारी त्रिलोक महावर की पूर्व प्रकाशित कविताओं पर केन्द्रित किताब ’कविता का नया रूपाकार’ का लोकार्पण वर्चुअल तरीके से लेखक एवं कवि विनोद कुमार शुक्ल ने किया। त्रिलोक महावर की कविताओं पर आधारित इस पुस्तक में उनकी कविताआंे पर समय-समय पर की समीक्षा और टिप्पणियां संग्रहित की गईं हैं। इस पुस्तक में 30 आलोचकों, समीक्षकों, सुधि पाठकों ने महावर के काव्य संग्रह पर अपनी प्रतिक्रियाएं एवं विवेचनाएं दी हैं।

पुस्तक का प्रकाशन पहले-पहल प्रकाशन भोपाल द्वारा किया गया है। संग्रहित गद्य को नया रूप देने में कथाकार शशांक एवं कवि कथाकार राम कुमार तिवारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।
इस अवसर पर कवि एवं लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि त्रिलोक महावर स्थानीयता से जुड़े हुए कवि हैं। उनकी कविताओं में स्थानीयता के बिम्ब है जिन्हें उन्होंने स्थायी बना दिया है। पायली सोली जैसे नापने की अनेक प्रचलित स्थानीय मापकों का धीरे-धीरे विलुप्त हो जाना और महावर कविताओं में उनका वापस लौट आना प्रीतिकर लगता है। बस्तर के लोकेल को महावर ने अपनी कविताओं में गंभीरता से चित्रित किया है। स्थानीयता उनकी कविताओं की जान है। प्रसिद्ध कवि एवं लेखक संजीव बख्शी ने कविताओं पर कही बात का भी संकलन कर किताब के रूप में प्रकाशित करने को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि समीक्षक रमेश अनुपम ने त्रिलोक महावर की कविताओं को स्थानीयता और स्मृतियों के बीच आवाजाही करती हुई इंगित किया और कहा कि तीस सुधि पाठकों की आंख से इन कविताओं को देखना, उससे गुजरना और उसमें कहीं ठहर जाना एक विलक्षण अनुभव है। कवि राजेश जोशी ने महावर की कविताओं को अनुभव की पाठशाला से पैदा हुई बताया तो कवि नरेन्द्र जैन ने उन्हें प्रश्न आकुलता को बढ़ाने वाली तथा समय की जटिलताओं को परत दर परत खोलने वाली कहा।
अपनी ही कविताओं के बारे में कही गई बातों के संकलन के लोकार्पण पर कवि एवं प्रशासनिक अधिकारी त्रिलोक महावर ने कहा कि कविताओं की शुरूआत में बस्तर के जंगल, पहाड़, नदी, झरने, आदिवासी जनजीवन की छवियां उनकी कविताओं में सहज ही आ गईं हैं। नौकरी पर रहते हुए और अनेक जगहों पर काम करके जीवन, समाज व प्रकृति को बहुत पास से देखने के अवसर और अनुभव ने उनके कविता संसार को समृद्ध किया है। महावर ने कहा समय के साथ-साथ जीवन के अनुभवों ने मनुष्य की अपराजेय जिजीविषा और समाज की सामूहिकता का ज्ञान कराया है। उन्हांेने कहा कि प्रकृति के वैभव और सौंदर्य ने उन्हें यदि अभिभूत किया है तो मनुष्य की वेदना ने भीतर तक द्रवित भी किया है।
उल्लेखनीय है कि त्रिलोक महावर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कवि हैं। उनके ’ विस्मित ना होना, इतना ही नमक, नदी के लिये सोचों, हिज्जे सुधारता है चांद, शब्दों से परे ’ पांच कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। कवि के रूप में महावर पंडित मदन मोहन मालवीय नई दिल्ली, अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार, पंजाब कला साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के दुर्ग संभाग के संभागीय आयुक्त हैं।

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