Tuesday, March 24, 2026
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रक्षा गैरजिम्मेदारों के भरोसे..? जंगल तस्करों के निशाने पर, कोरोना की आपदा में तलाशा अवसर…..

0 बरपाली-झींका मार्ग के जंगल असुरक्षित

कोरबा (खटपट न्यूज)। जब बिल्ली को ही दूध की रखवाली के लिए जिम्मा सौंपा जाए तो दूध आखिर कहां तक बचेगा? कुछ ऐसा ही हाल जंगलों का है जहां गैरजिम्मेदारों के भरोसे हरे-भरे वृक्षों की सुरक्षा का भार है और उनकी अनदेखी कोरोना के कारण जारी इस आपदा के वक्त तस्करों के लिए अवसर बनी हुई है। करतला वन परिक्षेत्र स्थित ऊपरी क्षेत्र बरपाली अंतर्गत आने वाले जंगल लकड़ी तस्करों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीें जहां उनके द्वारा हाल-फिलहाल लगाए गए लॉकडाउन काफी लाभदायक रहे।
करतला विकासखंड के ग्राम बरपाली से झींका जाने वाले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के किनारे के जंगल में दर्जनों पेड़ तस्करों की भेंट चढ़ चुके हैं। बरपाली उप परिक्षेत्र के अंतर्गत बरपाली, ढनढ़नी, मड़वारानी, भैसामुड़ा, सैंडल आदि गांव आते हैं परंतु बरपाली और ढनढनी के जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई की मात्रा अधिक है। उपरोक्त सभी गांवों में वन प्रबंधन समिति भी है परंतु निष्क्रिय समितियों को सक्रिय करने की भूमिका वाले वन कर्मचारियों द्वारा इन्हें ना तो कोई जानकारी दी जाती है और ना किसी योजना के बारे में बताया जाता है। वन प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी है कि गांव के सीमा क्षेत्र के जंगलों की देख-रेख की जा सके एवं गांव में कोई व्यक्ति यदि जंगल से लकड़ी काट के लाता है तो उसकी शिकायत वन समिति द्वारा वन विभाग को की जाए, परंतु ऐसा नहीं होता। वन विभाग के कर्मचारी ना तो इस समिति की ओर ध्यान देते हैं और ना ही इनको किसी योजना के बारे में बताते हैं। यह स्थिति तब है जब उक्त पक्की प्रधानमंत्री संड़क से वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का हर दिन आना-जाना होता है।
इस मामले में बरपाली के पूर्व उप सरपंच निलेश अग्रवाल का कहना है कि यहां का वन विभाग और अमला पूर्ण रूप से निष्क्रिय है जिन्हें ना तो वन की चिंता है और ना ही डिपो की। वन में ना तो पेड़ सुरक्षित हैं और न ही डिपो में लकड़ी मिलती है। इसी तरह उप सरपंच अजय सोनी बताते हैं कि मैं जब जंगल की ओर सैर के लिए जाता हूं तो मुझे भी रोड किनारे बहुत से कटे हुए पेड़ के ठूंठ दिखाई देते हैं जो साबित करते हैं कि जंगलों में पेड़ की अंधाधुंध कटाई हो रही है।
0 मामला गरमाया तो ग्रामीण पर कार्रवाई

पेड़ कटाई का मामला गर्म होने पर एक ग्रामीण के विरुद्ध कार्रवाई की गई। उप वनमंडलाधिकारी आशीष खेलवार, रेंजर जीवनलाल भारती के निर्देश पर 3 अक्टूबर को बरपाली सर्किल से स्टॉफ बीके शुक्ला डिप्टी रेंजर, सुरेंद्र कुमार सिदार परिसर रक्षक सण्डैल, हरिनारायण बंजारे बरपाली, वैद्यराज बिंझवार परिसर रक्षक पहाड़गांव, विजेन्द्र कुमार नेटी महोरा एवं वन समितियों के सदस्यों ने सण्डैल वन परिसर का गश्त किया। कक्ष क्र. पी-1161 बरपाली से झींका मार्ग पर ग्राम बरपाली निवासी साधराम पिता बरपलीह बिंझवार को रंगे हाथ लकड़ी की चोरी करते पकड़ा गया। विभाग के मुताबिक वह विगत कई दिनों से लकड़ी चोरी कर रहा था, उसके पास से एक टंगिया और साइकल जब्त किया गया है। साधराम के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की धारा 1927 के 33 (1) क के तहत कार्रवाई की गई है। इस ग्रामीण से कितनी मात्रा में और किस महत्व की लकड़ियां बरामद की गई, इसकी जानकारी नहीं दी गई। साधराम ने अब तक कितने पेड़ काटे और उसे कहां बेचा, इसके बारे में भी कोई जिक्र नहीं। मात्र एक ग्रामीण पर कार्रवाई और लकड़ियों का बरामद ना होना अनेक संदेहों को जन्म देने के लिए काफी है।

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