
कोरबा। एसईसीएल के गेवरा सीजीएम कार्यालय को पोंड़ी, बाहनपाठ और अमगांव के भू विस्थापितों ने दो मांगों को लेकर चार घंटे तक घेरे रखा। इस चक्कर में अधिकारी से लेकर कर्मी भीतर फंसे रह गए। तीन दिन बाद बिलासपुर में उच्च स्तरीय बैठक कराने के आश्वासन पर घेराव समाप्त हो सका।
जानकारी के अनुसार इस प्रदर्शन को किसान सभा ने समर्थन दिया। तीन गांव के लोगों ने अपने पुराने मसलों को लेकर चार घंटे तक कार्यालय का घेराव कर अधिकारियों को एक जगह कर केंद्रित कर दिया। उनकी मांग थी कि वैकल्पिक रोजगार और मुआवजा की बढ़ी दर का भुगतान किया जाना चाहिए। प्रभावित मनोज राठौर का कहना है कि नरईबोध, भठोरा, भिलाई बाजार और रलिया जैसे गांवों के भू विस्थापितों को कंपनी सेक्रेटरी के स्वीकृत मिनट्स 326 और निदेशक बोर्ड मीटिंग के अनुसार बढ़ी हुई मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। जबकि पोंडी, बाहनपाठ और अमगांव के भू विस्थापितों को समान अधिसूचना प्रकाशन (धारा 9) के बावजूद इस बढ़ी हुई राशि से वंचित रखा गया है। 14 साल बीतने पर भी उनके मसले यथावत हैं। खबर के अनुसार विस्थापितों द्वारा प्रदर्शन करने से परेशान प्रबंधन ने इस बारे में ऊपर जानकारी दी। स्थानीय पुलिस को भी अवगत कराया। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने 30 दिसंबर को इन मसलों पर बिलासपुर में बैठक करने पर सहमति दी। ग्रामीणों ने कहा कि अगर अच्छे नतीजे नहीं आते हैं तो और बड़ा आंदोलन होगा।















