
कोरबा। नो-एंट्री में घुसी एक लग्जरी बस और उसमें सवार 28 लोगों के बारे में जानकारी मिलने पर मानिकपुर क्षेत्र के लोग हरकत में आए। सूचना मिलने पर मानिकपुर पुलिस ने बस को कई घंटे के लिए चौकी में खड़ा करा दिया। बाद में पूछताछ और अधिकारियों के निर्देशन में बस चालक पर पेनाल्टी की गई और फिर इसे तमिलनाडु जाने के लिए छोड़ दिया गया।
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण बरती जा रही सख्ती के बावजूद काम के सिलसिले में लोगों का एक से दूसरे प्रदेश में आना-जाना जारी है। मानिकपुर पुलिस ने एक ऐसी ही बस क्रमांक एनएल-01बी-1558 को पकड़ा है जिसमें तमिलनाडू जाने की फिराक में 5 युवक व 23 युवतियां सवार थी। मानिकपुर क्षेत्र के पार्षद फूलचंद सोनवानी ने कुछ लोगों को आसपास मंडराते देखा। बस भी यहीं खड़ी हुई थी। इसकी सूचना पार्षद ने तत्काल मानिकपुर चौकी प्रभारी अशोक पाण्डेय को दी।
खबर मिलते ही अशोक पाण्डेय मौके पर पहुंचे जहां बस खड़ी हुई थी। बस के चालक से पूछताछ की जा रही है। युवतियों से पूछताछ में पता चला है कि बस सवार लोगों को दोपहर 2 बजे तमिलनाडु के लिए रवाना होना था। इस दौरान ज्ञात हुआ कि बस में सवार सभी लोग मार्च तक तमिलनाडु के त्रिपुर जिले में सिविंग कंपनी में काम कर रहे थे। लॉकडाउन होने पर कंपनी ने अपने साधन से इन लोगों को कोरबा में छोड़ा। अब हालात सामान्य होने पर कामकाज शुरू होने की जानकारी देकर कंपनी ने यह बस कोरबा भेजी। इसके जरिए कामगारों को तमिलनाडु ले जाया जा रहा था। चौकी प्रभारी ने बताया कि नो-एंट्री क्षेत्र में बस के प्रवेश करने पर पेनाल्टी की कार्यवाही की गई है। तथ्यों के आधार पर वाहन और उसमें सवार लोगों को तमिलनाडु जाने के लिए रवाना कर दिया गया है।















