Monday, March 23, 2026
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दोहरे प्रभार से हटाए गए डिप्टी कलेक्टर विकास चौधरी

0 कोरबा जनपद के सरोज,पोड़ी-उपरोड़ा में खगेश को जिम्मा

कोरबा(खटपट न्यूज़)। आखिरकार डिप्टी कलेक्टर विकास कुमार चौधरी की कोरबा एवं पोंडी उपरोड़ा दोनों जनपद पंचायतों से छुट्टी हो गई। कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी के दोहरे प्रभार से भारमुक्त कर दिया। जारी आदेश अनुसार डिप्टी कलेक्टर सरोज महिलांगे को जनपद पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है वहीं विकास विस्तार अधिकारी खगेश कुमार निर्मलकर को जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया।
गौरतलब है कि पिछले करीब 3 माह से अधिक समयावधि से डिप्टी कलेक्टर विकास कुमार चौधरी को जनपद पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा के कार्यकाल में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं जुलाई माह में अवकाश में रहे कलेक्टर सौरभ कुमार की जगह प्रभारी कलेक्टर के रूप में आईएएस (जिला पंचायत सीईओ) श्री विश्वदीप ने डिप्टी कलेक्टर विकास चौधरी को पोंडी उपरोड़ा जनपद सीईओ आर एस मिर्झा का सीईओ जनपद पंचायत सोनहत जिला कोरिया के पद पर भारमुक्त होने पर पोंडी उपरोड़ा जनपद सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया था जबकि कोरबा में ही प्रभारी जनपद सीईओ के तौर पर श्री चौधरी का कामकाज एवं कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे थे। पोंडी का अतिरिक्त प्रभार देते ही विरोध के स्वर फूटने लगे। जनपद पंचायत अध्यक्ष पोंडी उपरोड़ा द्वारा तो इन्हें जनपद सीईओ के प्रभार से हटाने आंदोलन की चेतावनी तक दी गई थी। वहीं कोरबा में डीएमएफ के कार्यों में अनियमितता ,पंचायतों से दबावपूर्वक फर्म के नाम पर चेक काटे जाने के गम्भीर आरोपों के बाद से श्री चौधरी की कार्यशैली पर कलेक्टर सौरभ कुमार की पैनी नजर थी। उन्होंने प्रशासन की छवि बेदाग पारदर्शी बनाए रखने दोनों जनपद पंचायतों के जनपद सीईओ के प्रभार से उन्हें भारमुक्त कर दिया है। हालांकि विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इनके कार्यकाल में डीएमएफ के कार्यों में हुई अनियमितता की जांच की मांग उठ सकती है ।
0 पूर्व जनपद सीईओ के साथ अन्याय,इधर कनिष्ठ को कुर्सी वरिष्ठ दरकिनार
पूर्व कलेक्टर ने पोंडी उपरोड़ा के जनपद सीईओ बी एस राज को अक्टूबर 2022 के बाद चिकित्सा अवकाश से वापस आने के बाद जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा सीईओ के पद पर पदस्थापना तक नहीं दी। उन्हें परियोजना कार्यालय में संलग्न कर दिया ।उनकी जगह क्षेत्र संयोजक आर एस मिर्झा को पोंडी उपरोड़ा जनपद सीईओ का प्रभार दे दिया। जबकि कायदे से उस दौरान वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार बी एस राज पर विधानसभा क्षेत्र का निवासी होने का नियम भी प्रभावी नहीं हो रहा था,ऐसे में किस उद्देश्य के साथ जनपद सीईओ बीएस राज को साल भर परियोजना कार्यालय में बिठाया गया जो चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि वर्तमान में चर्चा का विषय यह भी है कि कोरबा जनपद सीईओ के पद पर पदस्थ जीके मिश्रा को निलंबन से बहाली जॉइनिंग के बाद भी प्रभार क्यों नहीं सौंपा जा रहा? विकास विस्तार अधिकारी जैसे कनिष्ठ अधिकारी को वरिष्ठ अधिकारियों पर तरजीह देते हुए कैसे पोंडी उपरोड़ा जनपद के सीईओ का प्रभार सौंपा जा रहा?

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