0 विधायक को विनती कर घर भेजा,कार्यवाही का पता नहीं
कोरबा(खटपट न्यूज़)। उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम सरगबुंदिया में कोल एडजस्टमेन्ट की आड़ में संचालित हो रहे कोल साइडिंग को लेकर विरोध के बीच मारपीट की घटना हो गई।
मंगलवार शाम 4 बजे रामपुर विधायक भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर के द्वारा साइडिंग में जाकर धरना दे दिया गया। सूचना पर उरगा थाना में पदस्थ एसआई ने उन्हें किसी तरह समझा कर घर भेजा और अधिकारियों के निर्देश अनुसार कार्यवाही का भरोसा दिया। इस दौरान साइडिंग पर खड़े वाहनों पर कार्यवाही की बात की गई लेकिन श्री कंवर के जाते ही सारे वाहन पार हो गए।
इधर दूसरी तरफ़ जब ननकीराम धरना दे रहे थे तब उधर कोल साइडिंग
के कर्मियों के द्वारा शाम लगभग 6:30 बजे वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र महतो के छोटे भाई पंकज महतो के साथ मारपीट किया गया। इस घटना से विरोध कर रहे ग्रामवासियों में नाराजगी व भय व्याप्त है। इसकी लिखित शिकायत उरगा थाने में की गई है।
ज्ञात हो कि सरगबुंदिया कोल साइडिंग का विरोध ग्रामवासियों द्वारा लम्बे समय से किया जा रहा है, किन्तु किसी भी प्रकार से कार्यवाही नहीं किया गया है। क्षुब्ध ग्रामीणों द्वारा अब सड़क पर उतर कर इसका विरोध प्रदर्शन करने का मन बना लिया गया है। इसके लिए ग्रामीणों द्वारा एक सप्ताह पूर्व कलेक्टर से लिखित शिकायत की गई है। कोल साइडिंग के विरोध का समाचार लगातार प्रकाशित किया जा रहा है जिससे क्षुब्ध होकर कोयला साइडिंग के संचालक द्वारा शानू और उसके साथी को भेजकर मंगलवार शाम महेंद्र महतो के छोटे भाई पंकज महतो के साथ मारपीट किया गया।
0 जनहित के मुद्दे पर कांग्रेसी पीछे, ननकीराम आगे
कोल साइडिंग के कारण न सिर्फ इस क्षेत्र के ग्रामवासियों का जीना दूभर हो गया है बल्कि इसके निकट संचालित विद्यालयों में अध्यनरत छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं है। महज 150 और 300 मीटर की दूरी पर दो स्कूलों का संचालन हो रहा है जिनमें से एक कोरबा लोकसभा के पूर्व सांसद रहे डॉक्टर स्व. बंशीलाल महतो के परिजन की स्मृति में संचालित विद्यालय भी शामिल है। अवैध कोल साइडिंग को बंद कराना इस क्षेत्र का ज्वलन्त मुद्दा है लेकिन इस जनहित के मुद्दे पर अकेले ननकीराम कंवर मोर्चा खोले हुए हैं। हालांकि पिछले दिनों सांसद प्रतिनिधि धनेश्वरी कंवर के द्वारा भी विरुद्ध में शिकायत कर बंद कराने की मांग की गई जो बाद में ठंड पड़ गया है। इस क्षेत्र में कांग्रेस के और भी पदाधिकारी व जनप्रतिनिधिथल हैं लेकिन जनहित के मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ वे खड़े नजर नहीं आ रहे। इसे लेकर प्रभावित गांवों में भी खासी चर्चा है। धनेश्वरी कंवर ने रामपुर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी से टिकट की मांग की है लेकिन जनहित के मामलों में जिस तरह से अनदेखी की जा रही है,उससे इस बात पर कोई संदेह नहीं की आगामी चुनाव में पार्टी और प्रत्याशी को नुकसान पहुंचेगा। क्या कोल साइडिंग को तवज्जो देने के लिए क्षेत्र के कांग्रेस पदाधिकारी वोट बैंक की तिलांजलि देने के लिए तैयार हैं? अभी तक के हालात को देखकर तो ऐसा ही लगता है और चुनावी दौर में इसकी चर्चा क्षेत्र में भी गर्म होने लगी है। चूंकि अब कोल साइडिंग के कर्मचारी ग्रामीणों के साथ मारपीट करने पर उतारू हो गए हैं, समय रहते हालत को संभाला नहीं गया तो तनाव बढ़ाने की संभावना बनी रहेगी।
0 सारा कुछ नपा-तुला तो एडजस्टमेंट किस बात का?
कोल साइडिंग को लेकर यह भी सवाल बार-बार लोगों के मन में उठ रहे हैं कि जब एसईसीएल की खदान से लोडिंग पॉइंट पर निर्धारित क्षमता और वजन के साथ नापतौल कर कोयला रेल के द्वारा गंतव्य के लिए रवाना किया जाता है तो ओवरलोडिंग कैसे हो जाता है? सरगबुंदिया में कथित तौर पर ओवरलोडिंग कोयला को गिराए जाने के बाद इसे वापस एसईसीएल को क्यों नहीं लौटाया जाता? आखिर ऐसा कौन सा मापदंड है जिसमें ओवरलोड के नाम पर निकाले गए कोयला को सड़क मार्ग से परिवहन कर ग्राम कोथारी के एक कोल डिपो में एकत्र किया जाता है और फिर यहां से उसकी बिक्री हो रही है। कुल मिलाकर जहां खदानों में कोयला चोरी रोकने के लिए मुस्तैदी की बात एसईसीएल कर रहा है तो दूसरी ओर रेल परिवहन के जरिए अवैध कोल साइडिंग के माध्यम से कोयला की चोरी कराई जा रही है। इस पूरे मामले में एसईसीएल, रेलवे और संदेश ट्रेडिंग कंपनी की भूमिका की जांच की मांग भी ग्रामीणों ने की है।
















