Thursday, March 26, 2026
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KORBA:जंगल में 70 लाख का स्कूल..! विद्यार्थी नहीं,चोर आ रहे..कौन है जिम्मेदार

0 सर्व सुविधा युक्त विद्यालय भवन खंडहर हो रहा
0 राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा विभाग का मामला
कोरबा(खटपट न्यूज़)। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा विभाग, कोरबा के द्वारा वर्ष 2013 में 70 लाख रुपये खर्च कर कोरबा विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत तिलाईडांड में नवीन हाई स्कूल भवन का निर्माण कराया गया। निर्माण पूर्ण होने के 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी सर्व सुविधा युक्त भवन में ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को हायर सेकेंडरी की शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो विचारणीय व चिंतनीय है।

विद्यालय भवन निर्माण कराए जाने के समय ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच एवं पीडब्ल्यूडी के साथ ही राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के अधिकारियों की लापरवाही और अदूरदर्शिता की वजह से क्षेत्र के बच्चे हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी की पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं।
0 डीईओ ने बताया सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित है
इस संबंध में समाजसेवी मनीराम जांगड़े ने गत दिनों जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भरद्वाज से चर्चा किया तब जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा यह बताया गया कि गांव से उक्त भवन लगभग 2 किलोमीटर दूर है और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से उक्त भवन में पढ़ाई संचालित करना संभव नहीं है। यह सत्य है कि उक्त भवन जंगल के बीच में बना दिया गया है जो कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए उक्त भवन में विद्यालय संचालित करना उचित नहीं है लेकिन विभाग एवं निर्माण एजेंसी के साथ ही तत्कालीन सरपंच के द्वारा उक्त स्थान को चयनित करना पूर्णत: निंदनीय है। शासकीय राशि 70लाख रुपए की क्षति हुई है।

0 आज भी मजबूत है भवन

उक्त भवन इतना मजबूत बना है कि 7 वर्ष बाद भी मजबूती झलक रही है। हालांकि असामाजिक तत्वों द्वारा खिड़की-दरवाजा चोरी कर लिया गया है। बाकी पूर्ण रूप से व्यवस्थित और मजबूत है। मनीराम जांगड़े ने बताया है यहां हर तरह की सुविधा है लेकिन यह मजबूत भवन मवेशियों /जानवरों के रहने के लायक बन गया है।

मनीराम जांगड़े ने कहा है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करने वाले संबंधित अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति ना हो और शासन की राशि का सही जगह सही उपयोग हो।जिले में सैकड़ों ऐसे विद्यालय हैं जो जर्जर हैं और सर्वसुविधा ना होने के बावजूद भी बच्चे व शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर पठन-पाठन का कार्य कर रहे हैं। साथ ही भवन ना होने की स्थिति में बच्चे कहीं पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं तो टूटे- फूटे भवन का सहारा है। अगर इतनी बड़ी राशि जिले में अन्य जर्जर भवनों की मरम्मत कार्य में लगा दिया जाता तो ग्रामीण अंचल के छात्र-छात्राओं को सुविधा पूर्ण शिक्षा प्राप्त होती।

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