Sunday, March 22, 2026
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KORBA के जंगल में हाथियों का झुंड,खदेड़ने ग्रामीण कर रहे हमला, वन अमला नदारद

कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोरबा जिले के वनांचल में हाथियों और मानव के बीच द्वंद बढ़ता जा रहा है। हाथियों की समस्या का कोई ठोस निदान नहीं होने तथा जान-माल के होने वाले नुकसान से बचने-बचाने के लिए अब ग्रामीण हाथियों पर हमलावर होने लगे हैं। ग्रामीणों की मंशा है कि हाथी जंगल से निकलकर उनके गांव की ओर ना आए इसलिए लोग अब खदेड़ने के लिए हाथियों पर हमला भी करने लगे हैं।
ऐसी ही एक घटना का वीडियो कोरबा वन मंडल अंतर्गत कोरबा वन परिक्षेत्र से सामने आया है, जहां कुछ ग्रामीण बिजली के हाईटेंशन टाॅवर पर चढ़कर हाथियों के झुंड पर टांगी और तीर कमान से हमला कर रहे हैं। टावर पर चढ़ा एक ग्रामीण हाथ में टंगिया पकडे हुए हैं और उसे हाथियों की और फेंक रहा है। कोरबा वनमंडल के ग्राम बाघमारा और गोड़मा में कुल करीब 35 से 40 हाथियों का अलग-अलग दल विचरण कर रहा है। सामने आए वीडियो में साफ-साफ देखने को मिल रहा है कि ग्रामीण हाथियों को किस तरह निशाना बना रहे है। इस दौरान ग्रामीण शोरगुल भी कर रहे हैं। एक अन्य वीडियो में बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथियों को देखने पहुंचे हुए हैं और हाथियों के नजदीक आते ही डरकर भाग रहे हैं।
कोरबा वन मंडल के जंगल से निकलकर सामने आया वीडियो चौंकाने वाला तो है ही, लेकिन जिस तरह से हाथियों के साथ व्यवहार किया जा रहा है वह निस्संदेह हाथियों के आक्रोश को बढ़ाने का ही काम करेगा। इस घटनाक्रम के दौरान दूर-दूर तक वन विभाग का कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी नजर नहीं आ रहा है जो हाथियों को ना छेड़ने की नसीहत ग्रामीणों को दे और उन्हें वहां से खदेड़े। बता दें कि अनेक मौकों पर हाथियों के आने और जाने की जानकारी वन अमले को नहीं हो पाती है और यही वजह है कि ग्रामीणों को भी समय रहते सतर्क नहीं कर पाते हैं।
0 सब्र का बांध टूट रहा
वन विभाग की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते आ रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है। हाथियों के आने की जानकारी होने से लेकर इन्हें एक रहवास क्षेत्र में रोके रखने संबंधी किए जाने वाले तमाम तरह के उपाय धरातल पर नहीं आ सके हैं। सिर्फ मन और कागजों में ही योजनाएं बनाई जा रही हैं, उनका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है और हाथी एवं मानव के बीच द्वंद बढ़ता जा रहा है। जंगलों के बीच बढ़ता अतिक्रमण और वन अधिकार पट्टा के लालच में बढ़ती दखल भी जंगल में रहने वाले जानवरों के साथ ग्रामीणों की मुठभेड़ की एक बड़ी वजह है लेकिन वन विभाग और इसका मैदानी अमला अतिक्रमण को रोक पाने में कोई खास सफल नहीं हो पा रहा है।

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