0 रेडियोलॉजिस्ट को सीएमएचओ ने 3-3 बड़ी योजनाओ का बनाया नोडल ऑफिसर
0 डॉक्टर की मजबूरी-दफ्तर में करें काम या अस्पताल में मरीजों की सोनोग्राफी…

कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोरबा में स्वास्थ्य अमले ने ग्रामीण इलाकों में सोनोग्राफी करने मशीने तो लगा रखी है लेकिन सोनोग्राफी करने रेडियोलॉजिस्ट के अभाव का हवाला देते सोनोग्राफी नहीं हो पा रहा है। जो रेडियोलॉजिस्ट मौजूद भी है उनको स्वास्थ्य अमले ने जिले के 3 अहम कार्यक्रमो के नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी दी रखी है। आलम ये है कि लोगो को सोनोग्राफी मशीन नज़दीक होने के बाद भी मरीजों को 40 से 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय आना पड़ता है वहीं लाखो की मशीनों का भी उपयोग साबित नहीं हो रहा है।

कहने को तो कोरबा के कटघोरा व पाली सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र में सप्ताह में एक दिन रेडियोलॉजिस्ट भेजा जाता है लेकिन ये एक दिन पूरे सप्ताह के मरीजों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है मज़बूरन लोगो को कोरबा की दौड़ लगानी पडती है। कोरबा की कटघोरा से 40 किलोमीटर और पाली से 60 किलोमीटर दूरी है। इस व्यवस्था के पीछे स्वास्थ्य विभाग रेडियोलॉजिस्ट की कमी का हवाला दे रहा है जबकि विभाग ने करतला में पदस्थ एक रेडियोलॉजिस्ट डॉ राकेश अग्रवाल को नर्सिंग होम एक्ट, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना और पीएनडीटी का नोडल बना रखा है साथ ही मेडिकल कॉलेज में संलग्न कर रखा गया है।

अब ऐसे में डॉक्टर साहब अपने कार्यक्रमो की मॉनिटरिंग करें या 40-60 किलोमीटर दूर जाकर मरीजों की सोनोग्राफी करें। जबकि इन डॉक्टर साहब को इन कार्यक्रमों से मुक्त करने पर निश्चित रूप से उनको यहां नियमित रूप से सोनोग्राफी करने भेजा जा सकता है जिससे कटघोरा व पाली के मरीजों को सप्ताह में 3-3 दिन सोनोग्राफी की सुविधा मिल सकती है। इससे न केवल उनको कोरबा तक कि दौड़ लगानी पड़ेगी बल्कि शासकीय अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा मिलने से आर्थिक लाभ भी होगा वहीं विभाग में मौजूद अन्य चिकित्सको को नर्सिंग होम एक्ट व आयुष्मान भारत की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों की माने तो जिले में कई अस्पताल बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे है जहां लाइसेंस है भी वहां मानकों का पालन नहीं हो रहा है ऐसे में नियमित निरीक्षण से व्यवस्था में बदलाव देखने मिलेगा।

0 वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कटघोरा और पाली में एक-एक दिन सोनोग्राफी कराई जा रही है। विभागीय काम अस्पताल समय के बाद रेडियोलॉजिस्ट करते है इससे सोनोग्राफी पर कोई असर नहीं होता है। गायनेकोलॉजिस्ट को भी सोनोग्राफी करने प्रशिक्षित किया जाएगा।
- डॉ एस एन केसरी, सीएमएचओ कोरबा















