Wednesday, March 25, 2026
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KORBA:जंगल में सड़क का खेला,कार्यवाही के अभाव और संरक्षण में बुलंद हौंसले

0 बाल्को रेंज में 5 करोड़ बहाए तो चैतमा में 45 लाख

कथित WBM सड़क

कोरबा(खटपट न्यूज़)। हर्रा लगे न फिटकरी और रंग चोखा…जंगल में मोर नाचा किसने देखा…राम-राम जपना-सरकारी माल अपना…! और भी ना जाने कितने मुहावरे और कटाक्ष जिले के कोरबा और कटघोरा वन मण्डल में चरितार्थ हो रहे हैं। सरकार का विभिन्न मदों का खजाना तो खाली हो रहा है लेकिन काम अपेक्षित नहीं दिख रहा। आधे-अधूरे, गुणवत्ताहीन और मनमाने काम से न तो लाभ मिल रहा न सरकार की मंशा पूर्ण हो रही।
कोरबा वन मंडल के बालको वन क्षेत्र अंतर्गत दूधीटाँगर से फुटका पहाड़ के मध्य 14 किलोमीटर डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण के मामले में हुई शिकायत की फाइल जहां दबा कर रख दी गई है वहीं संबंधित ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर रेंजर से लेकर एसडीओ और वन विभाग के अधिकारी खेल कर रहे हैं। तत्कालीन डीएफओ श्रीमती प्रियंका पांडेय ने इस ओर से नजरें घुमाये रखी तो वर्तमान नव पदस्थ डीएफओ श्री अरविंद को अधीनस्थ अधिकारी और कर्मी गुमराह करने से बाज नहीं आ रहे। जंगल से ही मिट्टी, मुरूम और छोटे-बड़े पत्थर खोद कर सड़क के निर्माण में बेधड़क लगाया जा रहा है। दिखावे के लिए कुछ स्थानों पर गिट्टियों के ढेर जरूर खड़े किए गए हैं लेकिन काम की हकीकत यहां दिखती है।
उससे भी अहम यह है कि उक्त मार्ग में डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण की जरूरत नहीं थी। पूर्व में बालको प्रबंधन ने फुटका पहाड़ से निकलने वाली बॉक्साइट के परिवहन के लिए सड़क का निर्माण कराया था। न जाने क्यों इस सड़क को उखड़वाकर वन विभाग द्वारा डीएमएफ के लगभग 5 करोड़ इसमें अनुपयोगी सड़क में फूंके गए/जा रहे हैं। अधिकांश राशि निकल चुकी है तो कुछ बकाया बताया जा रहा है। सड़क को लेकर कोई सवाल ना उठे इसलिए यहां पर ट्रैकिंग आदि का बोर्ड लगा दिया गया है। रेंजर की मानें तो सड़क बन जाने से वनवासियों, पहाड़ी कोरवा को आवागमन में सुविधा होगी जबकि इस मार्ग में गांव नजर नहीं आते। कुल मिलाकर सरकार का पैसा पानी की तरह बहाना है और निर्माण के नाम पर ठेकेदार से लेकर अधिकारियों की जेब गर्म करना है।
0 कटघोरा में भी खेला

दूसरी ओर कटघोरा वन मंडल के चैतमा परिक्षेत्र में भी डब्ल्यूबीएम सड़क का निर्माण के नाम पर लाखों का खेला हो गया है। वर्ष 2020- 21 में इसका निर्माण कराया गया, जिसमें क्रेशर गिट्टी के स्थान पर जंगल के ही बोल्डर और मिट्टी- मुरुम का उपयोग कर 45 लाख 30 हजार की लागत से वन सड़क का निर्माण करा लिया गया।
वन परिक्षेत्र चैतमा अंतर्गत कक्ष क्रमांक पी- 71 एवं पी- 72, केराकछार से चटुवाभौना वनमार्ग में कैम्पा मद से 3 किलोमीटर सड़क बनाने 45. 30 लाख रुपए की मंजूरी गत 2020- 21 में मिली। जहां तत्कालीन डीएफओ शमा फारुखी के संरक्षण में पाली उप वनमंडल के एसडीओ, रेंजर एवं डिप्टी रेंजर ने भ्रष्ट्राचार का मोर जमकर नचाया। डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण में नियमतः 40 एमएम ग्रेनाइट या फिर मजबूत क्रेशर गिट्टी का उपयोग होना था, किन्तु जंगल से तोड़े गए अमानक पत्थरों को बिछाकर तथा आसपास वनभूमि से ही मिट्टी-मुरुम खोदकर बिना रोलर चलवाए सड़क निर्माण का काम पूर्ण करा लिया गया। वैसे सरकारी काम में अधिकारी और कर्मचारी अपनी कलम फंसाते नहीं हैं और सारा कुछ कागजों में पक्का दिखाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत इन कागजों को दरकिनार कर रही है।

0 रटा-रटाया जवाब…देखते हैं, जांच करेंगे, कार्यवाही होगी
कोरबा और कटघोरा वनमंडल के जंगल में सड़क के नाम पर जो खेल हुआ है/हो रहा है, उसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार वन मण्डल अधिकारी, एसडीओ और रेंजर होते हैं। तकनीकी पहलुओं की तो बात ही बहुत कम होती है। डीएफओ ने डब्ल्यूबीएम के प्रोजेक्ट को अंतिम स्वीकृति दी और राशि स्वीकृत करवायी एवं सड़क का निरीक्षण किये तथा काम करवाए बिना सारे भुगतान की फाईल पास कर दी। रेंजर पूरे काम को अंजाम देते हैं और सड़क का पूरा प्रोजेक्ट इन्हीं की देखरेख में होता है। एसडीओ काम का वेरिफिकेशन करते है लेकिन उन्होंने ये काम भी रेंजर के ऊपर ही छोड़ दिया है। अब जब भी भ्रष्टाचार की बात होती है तो एसडीओ से लेकर डीएफओ तक का कहना होता है कि- शिकायत नहीं है, आपके माध्यम से जानकारी हुई है, देखते हैं, रेंजर से बात करेंगे, पूरी जानकारी ली जाएगी और जांच कर कार्रवाई करेंगे..आदि-आदि। कोरबा जिले में कोरबा वन मंडल हो या कटघोरा, दोनों ही वन मंडल में पूर्व के डीएफओ के संरक्षण में हुए कारनामों का चिट्ठा तो खुलता रहा लेकिन संरक्षण का आलम यह है कि किसी भी मामले में ना तो जांच हुई और हुई भी तो लीपापोती की गई। कार्यवाही तो बहुत ही कम देखने को मिली है वरना तत्कालीन डीएफओ शमा फारूकी ने तो स्टॉप डेम के मामले में विधानसभा को भी गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
0 बाजार भाव से कम दर पर सामान खरीदी
कटघोरा वनमंडल की तत्कालीन डीएफओ शमा फारूकी के कार्यकाल में कैम्पा मद में जमकर खेल हुआ। ब्रांडेड नाम अल्ट्राटेक से मिलते-जुलते सीमेंट हाईटेक की बोरियों की बड़े पैमाने पर खरीदी कर कार्यों में लगाया गया। लाखों की खरीदी हुई और जब खटपट न्यूज़ ने मामला उजागर किया तो बोरियों को बदला गया लेकिन इसकी ना तो रिकवरी हुई और ना ही वापसी बल्कि सीमेंट की बोरियां पत्थरों में तब्दील हो गईं। आखिर इनकी खरीदी में तो सरकार का ही पैसा लगा था। एक ऐसा भी कारनामा हुआ जिसमें बाजार के प्रचलित दर से भी कम दर पर छड़, गिट्टी, सीमेंट, रेत को संबंधित प्रदायकर्ता ठेकेदार ने दूरस्थ और जंगल में निर्माण स्थल तक पहुंचा कर दिया है। दरअसल करोड़ों का सामग्री और खरीदी घोटाला बिलासपुर के एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। जमीन के मामले में क्षेत्रीय विधायक को नाराज करने के कारण हटाई गई समा फारुकी के बारे में कहा जा रहा था कि उनके कार्यकाल के घोटालों और गड़बड़ियों की जांच नई डीएफओ श्रीमती प्रेमलता यादव से कराई जाएगी लेकिन यहां भी हालत ढाक के तीन पात वाली है। प्रमाणित तौर पर फर्जी मजदूरी घोटाला हुआ लेकिन जांच और नतीजा शून्य है। डीएफओ द्वारा तर्क दिया जाता है कि स्टाफ की कमी है तो जांच करें या कामकाज। कुल मिलाकर होना कुछ नहीं, बल्कि जो बीत गया सो बीत गया, हम अपनी देखते हैं की तर्ज पर काम हो रहा है।
0 तालाब से लेकर लैंटाना में जमकर खेल
शासन का खजाना लुटाने में सिर्फ सड़क का ही उपयोग नहीं किया गया है बल्कि जंगल में जानवरों के लिए तालाब, डबरी निर्माण से लेकर स्टॉप डेम बनाने के नाम पर भी खेल हुआ है। वनों का दुश्मन कहे जाने वाले लैंटाना के उन्मूलन में भी धांधली हुई है। करोड़ों रुपए इसके लिए खर्च कर दिए गए लेकिन उन्मूलन की बजाय अपना ही मूल्यांकन करते रहे। मजदूरी के नाम पर फर्जी लोगों के साथ-साथ हॉस्टल-छात्रावास के बच्चों, संभ्रांत परिवार के लोगों के भी नाम का उपयोग किया गया। अगर इसकी गहन जांच कराई जाए तो ऐसे-ऐसे नाम सामने आएंगे जिनके बारे में कल्पना नहीं की जा सकती कि वे मजदूरी कर सकते हैं, पर सवाल है कि यह करेगा कौन?

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