कोरबा(खटपट न्यूज़)। ग्राम पंचायत साजापानी, जनपद पंचायत करतला के सरपंच/ सचिव एवं रोजगार सहायक के द्वारा फर्जी रसीद व केशमेमो के माध्यम से शासन की राशि आहरित कर गबन किये जाने के संबंध में शिवचरण चौहान, एडवोकेट विजय नगर डाकघर गेवरा प्रोजेक्ट के द्वारा लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई है। इसकी जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर आज तक ना तो एफआईआर और ना ही वसूली तय हो सकी है। इसी माह 10 दिन के भीतर दो पत्र जारी हो चुके हैं लेकिन कार्यवाही का ना होना आरोपियों को लगातार अभयदान कहा जा रहा है। वैसे इस प्रकरण में जिला सीईओ नूतन कंवर इससे पहले खामोशी बनाए रखे थे और अभी जब शिकायतकर्ता लगातार उच्च स्तर तक अपनी बात पहुंचा रहा है तो दो पत्र जिला सीईओ द्वारा जारी किए गए लेकिन इन पत्रों पर वे कार्रवाई करवाना सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं।

तत्संबंध में संदर्भित पत्र के माध्यम से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में जिला पंचायत सीईओ नूतन कंवर के द्वारा 1 सितंबर 2022 को कोरबा एसडीएम हरिशंकर पैकरा को पत्र जारी कर अवगत कराया है कि तत्कालीन साजापानी सरपंच श्रीमती मोहन बाई कंवर, तत्कालीन सचिव पुष्पेन्द्र कुमार कंवर द्वारा मूलभूत योजना से नियम विरूद्ध कार्य कराकर लापरवाही किये जाने के कारण राशि 175000/- रू. उपरोक्तानुसार कार्य में व्यय किया गया है। लखन लाल कंवर रोजगार सहायक के द्वारा ग्राम पंचायत साजापानी में फर्जी बिल देने के कारण तीनों (सरपंच/सचिव/रोजगार सहायक) दोषी हैं। अतः सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहाायक से राशि 1लाख 75000 रूपए की वसूली करते हुए संबंधितों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जाना प्रतिवेदित है। नियमानुसार कार्यवाही हेतु मूलतः आवेदन पत्र एवं प्रतिवेदन एसडीएम को प्रेषित कर प्रकरण के संबंध में कार्यवाही कर जिला पंचायत कार्यालय को अवगत कराना सुनिश्चित करने कहा गया है।विडंबना है कि उक्त पत्र पर आज पर्यंत कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

इसके पश्चात एक अन्य पत्र जिला पंचायत सीईओ के द्वारा 9 सितंबर 2022 को करतला जनपद सीईओ के नाम जारी किया गया। इस पत्र में संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर कराने के लिए निर्देशित किया गया है लेकिन 10 दिन बाद भी एफआईआर कराने की फुर्सत जनपद सीईओ को नहीं मिली है।
बता दें कि इससे पहले भी संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर करने के निर्देश जारी हो चुके हैं करतला जनपद के तत्कालीन सीईओ के द्वारा इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर एफआईआर के लिए प्रतिवेदित किया गया था लेकिन इस पत्र का भी क्रियान्वयन आज तक नहीं हो सका है। कुल मिलाकर वसूली, अनुशासनात्मक कार्यवाही और एफआईआर के लिए तीन पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन कार्यवाही अब भी लंबित होना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त है।















