Tuesday, March 31, 2026
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कोरबा:प्रतिबंध में भी हरे बांस काट रहे,बेच भी रहे हैं,अमला जानकर भी बेखबर, बीटगार्ड अब सक्रिय नहीं..?देखें वीडियो

कोरबा(खटपट न्यूज)। कटघोरा वन मंडल एक बार फिर बांस की अवैध कटाई के मामले में सुर्खियां बटोर रहा है। कुछ साल पहले जिस बीट गार्ड ने बड़ी दिलेरी दिखाते हुए अपने रेंजर को बांस कटाई के मामले में आरोपी बनाया, उसी बीट गार्ड के कार्यक्षेत्र से हरे-हरे बांस काट कर बेचे जा रहे हैं। प्रतिबंध अवधि में बांस की कटाई से बीट गार्ड और वन महकमा आश्चर्यजनक तरीके से अनजान है। उस बार की तरह इस बार भी बताया जा रहा है कि ट्री गार्ड के लिए टेढ़े-मेढ़े और गिरे हुए बांसों को लिया जा रहा है जबकि कटाई तो प्रतिबंध अवधि में होना ही नहीं चाहिए। लीपापोती की तैयारी शुरू कर दी गई है और वन अमला एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

कटघोरा वन मंडल के कटघोरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत बांकीमोगरा निस्तार डिपो का यह मामला है जिसके पीछे बांस का जंगल है। यहां छोटे, मझोले और बड़े हरे-भरे बांस को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा है। बांस कटाई की नियमावली के अनुसार 1 जुलाई से 15 अक्टूबर तक बांस की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। यह समय सीमा खत्म होने में अभी वक्त है लेकिन मनमानी करने वालों के लिए नियम की कोई पाबंदी नहीं होती। यहां बांस को काटकर बेचने की भी बातें सामने आई हैं। 25 रुपये प्रति नग में बांस बेचा गया है/बेचा जा रहा है। एक तरह से बांस की अवैध कटाई, चोरी और तस्करी हो रही है। यह सब उस बीटगार्ड के क्षेत्र में हो रहा है जिसके कर्तव्यनिष्ठा के कसीदे पूर्व में गढ़े जा रहे थे। बताया जा रहा है कि निस्तार डिपो के जंगल से काटे गए बांस स्थानीय स्तर पर कुछ व्यवसायियों को घेराबंदी करने के लिए भी उपलब्ध कराए गए/बेचे गए।

https://youtu.be/sus7VbG2pZI

0 लीपापोती करने में जुटे
प्रतिबंध अवधि में हरे बासों की कटाई पर जानकारी के लिए कटघोरा डीएफओ श्रीमती प्रेमलता यादव से संपर्क किया गया किंतु उनका फोन नहीं उठा। कटघोरा रेंजर अशोक मन्नेवार ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े और गिरे हुए बांस को ट्री गार्ड के लिए एकत्र किया जा रहा है,अवैध कटाई जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कोई बात है तो वे मौके पर निरीक्षण के लिए जा रहे हैं। दूसरी ओर हकीकत यही है कि छोटे और सीधे बांस को भी काटा गया है जिसका वीडियो वायरल है। इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से भी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

https://youtu.be/jZCy8V03BtE

0 जंगल में मोर नचा कर जेब भर रहे
वैसे बता दें कि जंगलों में वर्षों से कतिपय रेंजर,डिप्टी रेंजर, बीट गार्ड और डीएफओ के संरक्षण में भ्रष्टाचार का मोर नाच रहा है। इमारती महत्त्व के कीमती वृक्षों की कटाई/चोरी/ तस्करी का मामला हो या विभिन्न मदों से निर्मित होने वाली वन सड़कों, तालाब,डबरी, विभिन्न निर्माण की बात हो या फिर अनेक निर्माण कार्यों में फर्जी मजदूरों के नाम लाखों का असली भुगतान का मामला हो, वन अमले के भ्रष्ट लोगों पर आज तक कार्यवाही नहीं हो पाई है( कुछ मामलों में छोड़कर)। कभी अधिकारी-कर्मियों की कमी तो कभी व्यस्तता का हवाला देकर जांच को न सिर्फ शिथिल किया जा रहा है बल्कि दोषियों को बचाने की पूरी कवायद भी हो रही है। अवैध रूप से बांस कटाई का पुराना मामला अभी भी लंबित है जिसे भाजपा के नेताओं ने मौके पर पहुंच कर देखा और प्रमाणित किया था। भाजपा के नेताओं ने ही छत्तीसगढ़ विधानसभा में पुटुवा स्टॉप डेम की जानकारी छिपाने का मुद्दा लाया लेकिन बाद में इन मुद्दों पर पानी फेरने का काम अधिकारियों द्वारा शुरू किया गया। आज भी कई मामले और मुद्दे जीवित हैं लेकिन उनके नाम पर कोई ठोस कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है।
0 माननीयों के मुखौटे भी दे रहे संरक्षण
कटघोरा और कोरबा वन मंडल में भ्रष्टाचार की एक से बढ़कर एक इबारत लिखी जा रही है किंतु जनप्रतिनिधियों से लेकर शीर्ष स्तर तक के अधिकारी भी भ्रष्टाचार की गंगा में हाथ धो रहे हैं। भले ही अनेक जनप्रतिनिधि लोगों के बीच जाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की बात करते हैं लेकिन ऐसे अनेक जनप्रतिनिधि जो माननीयों के मुखोटे बनकर आम जनता के बीच अपनी पहुंच बनाए हुए हैं, वह भी दोनों वन मंडल में विकास व निर्माण कार्य का ठेका हासिल कर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं बल्कि भ्रष्ट अधिकारियों और वन कर्मियों को संरक्षण देने का भी काम कर रहे हैं। यही वजह है कि आंखों देखी भ्रष्ट कार्यों को भी अनदेखा किया जा रहा है और सरकार का कैम्पा/डीएमएफ सहित विभिन्न मदों का पैसा पानी की तरह बहकर सरकार का खजाना खाली तो हो रहा है लेकिन विकास धरातल पर कहीं नजर नहीं आता।

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