Tuesday, September 22, 2026
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पहले खोदते रहे फिर अनुमति का आवेदन! निर्माण में अवैध मुरूम का उपयोग जारी…सख्ती हवा-हवाई

कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोरबा जिले में खासकर ग्रामीण अंचलों में हो रहे बड़े-बड़े सड़क निर्माण के कार्यांें में अवैध मुरूम का बेधड़क और लगातार उपयोग किया जा रहा है। मुरूम का खनन एवं परिवहन के लिए नियमत: पंचायत को अनुमति देने का अधिकार नहीं है लेकिन ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित करा कर एवं अधिकृत तौर पर प्रशासन से किसी भी तरह की अनुमति लिए बगैर ही मुरूम खोदी जा रही है। आलम यह है कि मुरूम का बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर उसे उपयोग में लाया जा रहा है और जब बात उछली तो अनुमति के लिए आवेदन लगाया गया है। अब सवाल तो जायज है कि काम भले सरकारी हो,अनुमति तो जरूरी है और जब अनुमति ही नहीं ली गई तो खनन क्यों करते रहे? क्या प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस पर कार्यवाही रूपी अपना ईमानदाराना कर्तव्य निभाएंगे?

मामला करतला ब्लाक के ग्राम बासीनपाठ से उरगा तक 17.900 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ा है। इसके निर्माणकर्ता ठेकेदार के कर्मियों द्वारा ग्राम सुपातराई के तालाब से जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों के द्वारा दिए जाने पर उरगा पुलिस मौके पर पहुंची तो उन्हें ग्राम पंचायत का प्रस्ताव दिखाकर चलता कर दिया गया। मुरूम खनन की अनुमति एवं इसका अधिकार के संबंध में पुलिस को गुमराह किया गया वहीं संबंधित अधिकारी और अमला जानकर भी बेखबर बनते रहे।

इधर जब मामला सुर्खियों में आना शुरू हुआ तब 28 अप्रैल 2022 को ठेकेदार के द्वारा एक आवेदन खनिज विभाग को देते हुए गौण खनिज मुरूम/मिट्टी का शासकीय निर्माण कार्य में उपयोग करने हेतु अनुमति चाही गई। लोक निर्माण विभाग कोरबा के कार्यादेश अंतर्गत ग्राम लबेद से भैंसमा तक सड़क निर्माण में लगने वाले मुरूम/मिट्टी के लिए ग्राम सुपातराई तहसील करतला के शासकीय भूमि क्रमांक 80/1, 131 रकबा क्रमश: 1.21, 0.263 (0.65 एकड़) क्षेत्र पर तालाब गहरीकरण के दौरान निकलने वाले गौण खनिज/मुरूम को उक्त शासकीय निर्माण कार्य में उपयोग करने की अनुमति बावत अनुमति मांगी गई है।

संबंधित ठेकेदार के द्वारा आवेदन 28 अप्रैल गुरुवार को दिया गया जबकि निर्माण कार्य प्रारंभ है और स्थानीय लोगों के मुताबिक अनुमति मिलने से पहले ही न सिर्फ तालाब से बड़े पैमाने पर मिट्टी, मुरूम का खनन कर उपयोग में लिया जा रहा है बल्कि इस आवेदन की आड़ में ग्राम लबेद में कई स्थानों पर जेसीबी लगाकर अवैध उत्खनन कर मुरुम ,मिट्टी बीसों की संख्या में ट्रैक्टर में लोड करके सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। लगभग 4 जेसीबी और 15 से 20 ट्रैक्टर दिन-रात इसी काम में लगना बताया जा रहा है। अब ऐसे में सवाल तो जायज है कि अनुमति से पहले ही तालाब को क्यों खोदा गया? बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कोरबा कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने भी स्पष्ट हिदायत दी है कि संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि शासकीय सहित सभी तरह के निर्माण कार्यों में चोरी अथवा अवैध सामग्रियों का उपयोग न किया जाए। माना कि ठेकेदार ने अनुमति के लिए 28 अप्रैल को आवेदन किया है लेकिन क्या बड़े पैमाने पर अवैधानिक रूप से और बिना अनुमति उत्खनित किए गए मुरूम/मिट्टी पर जुर्माना अथवा यथोचित कार्यवाही विभागीय तौर पर संभव हो पाएगी?

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