0 चेस्ट बैंक का खामियाजा किसानों को क्यों भुगताया?

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की कोरबा शाखा में किसानों को भरे गए विड्रॉल फार्म से कम रुपये देने का मामला तूल पकड़ चुका है। जब यह बात उजागर हुई तो किसानों से वसूली की बात को दबाने ठीकरा चेस्ट बैंक पर फोड़ा जा रहा है। बैंक शाखा और चेस्ट बैंक के बीच आखिर किसान को क्यों पीसा गया। चेस्ट बैंक से गड्डी में कम रुपये भेजे जा रहे हैं तो क्या शाखा प्रबंधक या कैशियर इसकी भरपाई ग्राहकों से करेंगे? 27 हजार की रकम निकालने वाले किसान ने बड़ी सहजता से स्वीकार किया कि उसे 26 हजार रुपये दिए गए। एक अन्य ग्रामीण ने 20 हजार रुपये के लिए फॉर्म भरा किन्तु 19 हजार 800 रुपये दिया गया। इन दोनों प्रत्यक्ष किसानों को लूज नोट दिए गए थे तो भला चूक कैसे हो सकती है? क्या कैशियर ने बिना गिने ही भुगतान किया, उनकी गिनती का तरीका क्या है? यह कोई चूक नहीं बल्कि वसूली का तरीका ही है। पूरा भुगतान न कर कमीशन काट कर इसलिए दिया गया ताकि पूरे रुपये मिलने के बाद वह किसान /ग्राहक निर्धारित वसूली की रकम देने से मना मत कर दे।
अब जब यह मामला खुल ही गया है तो कई तरह के बहाने बना कर खुद को पाक साफ बताने की कोशिश हो रही है। इन दो मामलों ने यह तो स्पष्ट किया है कि न जाने कितनों को कतार में लगने से बचाने के नाम पर चपत लगाई जा चुकी है/लगाई जा रही है और आगे भी लगाई जाएगी।
यह तो अच्छा है कि कलेक्टर इस मामले में जांच करा रही हैं पर इस बात की पूरी गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि चेस्ट बैंक यदि गड्डियों में नोट कम भेज रहा है तो क्यों और कैसे? क्या सिर्फ सहकारी बैंक में ही नोट कम भेजे गए हैं या फिर दूसरे बैंकों में भी इस चेस्ट बैंक से यह शिकायत है? क्या रुपये लाते वक्त चेस्ट बैंक का कोई कर्मी ही 2-4 नोट खींच लेता है?चेस्ट बैंक से नोट कम आने और अपनी जेब से भरपाई करने एक बड़ा गंभीर खुलासा सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक अजय सोनी ने कर दिया है जिसे गहन जांच के दायरे में रखना ही होगा। जांच के साथ ही प्राप्त तथ्य और होने वाली कार्यवाही सार्वजनिक भी हो।
कलेक्टर ने जिला सहकारी बैंक कोरबा के इस प्रकरण में तत्काल जांच कर प्रतिवेदन देने के निर्देश नोडल अधिकारी एस.के.जोशी और उप पंजीयक सहकारी संस्था बसंत कुमार को दिए हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि इनके द्वारा तथ्यात्मक जांच की जाएगी।
0 बैंक में गिनी जाती हैं गड्डियां और रुपये
बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि चेस्ट बैंक में रुपये पूरी तरह से गिनकर ही जमा लिए जाते हैं और गिनकर ही बैंकों को देते हैं। इसका पूरा रिकार्ड मेंटेन होता है। शाखा में नोट जाने पर गिनकर लेना वहां के प्रबंधक और कैशियर या स्टाफ की जिम्मेदारी है। गड्डी में नोट कम आ रहे हैं तो शिकायत भी करनी चाहिए। आखिर बैंक प्रबंधक कब तक अपनी जेब से भरपाई करता रहेगा, लेकिन ग्राहक से किसी सूरत में कटौती जायज नहीं है।
00 सत्या पाल 00(7999281136)















