बिलासपुर। ट्रैफिक आरक्षक से बदसलूकी के मामले में पुलिस ने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष मोती थारवानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इससे बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय व्यथित हो गए हैं. उन्होंने एसपी प्रशांत अग्रवाल को पत्र लिखकर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है. इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए विधायक ने जिस ट्रैफिक जवान से कांग्रेस नेता का विवाद हुआ था, उसका एक वीडियो क्लिप भेजा है, जिसमें सिपाही लोगों से गाली-गलौज और मारपीट करते हुए दिख रहा है.विधायक ने पत्र में ये आरोप लगाया.विधायक शैलेष पांडेय ने लिखा कि, ”क्या ऐसे होते है कानून के रखवाले, बेगुनाह गरीबों पर अत्यचार करने वाले. शांति और अमन के बिलासपुर मे यही आपकी पुलिस कर रही है. इस आरक्षक जिसके लिए पुलिस पूरे बचाव में दिख रही है अपने पुलिस वाले की गंदी करतूतों को छुपाने का कार्य कर रही है, जो सरे आम जनता से गंदी-गंदी गालियां दे रहा है. ये वहीं आरक्षक है जिसने हमारे साथी मोती थावरानी से उसकी पत्नी के सामने गलियां दिया, लेकिन कानून ने केवल मोती को ही आरोपी बनाया क्यों ? इस आरक्षक को देख कर नहीं लगता है कि इसने मोती को गाली नहीं दिया होगा, फिर पूरा वीडियो जनता के सामने क्यों नहीं लाया गया, केवल वहीं हिस्सा जिसमें मोती ने गाली दिया उतना ही क्यों दिखाया गया ? ये आरक्षक अगर शराब के नशे में था तो उसका डॉक्टरी मुलायजा क्यों नहीं करवाया गया ? थाना सिविल लाईन में जब समझौता हुआ तो उसके कागज कहां गये ?”
विधायक ने कहा है, कि मोती थावरानी की पत्नी दामिनी की शिकायत क्यों नहीं ली गई. उसके छोटे भाई की बात भी अनसुनी कर दी गई.इस मामले में एसपी प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि आरक्षक का जो वीडियो अभी वायरल हुआ है. वो 30 जून 2019 का है. पड़ोसियों के बीच विवाद हुआ था. इसमें आरक्षक और उसके भाई के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया था. यदि आरक्षक के खिलाफ अभी भी कोई गलती मिलती है, तो विधिवत कार्रवाई की जाएगी.सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक का डॉक्टरी मुलायजा करवाया गया था. जिसमें उसने शराब का सेवन नहीं किया था. आरोपी थारवानी के पत्नी का शिकायत पत्र भी लिया गया था. जिसकी पावती भी दी गई थी. और उन्हें बयान के लिए भी बुलाया गया था लेकिन कोई भी बयान देने नहीं आया.
















