पार्टी के लिए यातनाएं झेलने वालों को भूल गए भाजपा नेता, मीसाबंदियों के सम्मान में भी कोताही…!

0 पूर्व मंत्री अमर के सामने जाहिर हुई नाराजगी, जिला प्रभारी गिरधर गुप्ता के भी संज्ञान में लाया फिर भी…..

कोरबा(खटपट न्यूज़)। देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक घोषित आपातकाल में कोरबा के भी तत्कालीन जनसंघी नेताओं ने यातना सही, उनकी गिरफ्तारी हुई। इन मीसाबंदियों के सम्मान में कोताही का तो सवाल ही नहीं लेकिन यह सब हुआ।

दरअसल जिला भाजपा ने 25 जून को आपात काल की बरसी पर मीसा बंदियों का सम्मान तो किया लेकिन भाजपा पदाधिकारियों को जिले में सिर्फ 2 ही मीसाबंदी मिले जबकि इनकी संख्या अधिक है। पार्टी के लिए जेल जाने वाले और संघर्षरत रहे नेताओं एवं उनके परिजनों को बिसरा देने को लेकर पार्टी कार्यालय में बवाल भी मचा।
आपातकाल की बरसी के पहले दिन जिला भाजपा कार्यालय में मीसा बंदियों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया लेकिन इस कार्यक्रम में मात्र 2 ही मीसाबंदी आरडी चंद्रा व मूरित राम साहू को सम्मानित किया गया। जिले के अन्य मीसाबंदियों का नाम सम्मान कार्यक्रम की सूची में नहीं होने को लेकर तीखी नोक-झोंक हुई। कार्यक्रम से पहले इस नाराजगी का सामना पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को भी करना पड़ा। जिला प्रभारी गिरधर गुप्ता तक भी यह बात पहुंची। एसईसीएल रेस्ट हाउस में ठहरे पूर्व मंत्री को जहां पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया और तत्कालीन जनसंघ के लिए यातना सहने वालों को भुला देने पर संगठन की कार्यशैली और गुटबाजी पर सवाल उठाए गए। यहां जिला अध्यक्ष डॉ. राजीव सिंह को भी काफी खरी-खोटी सुननी पड़ी और एकबारगी माहौल काफी गर्म हो गया था।

सम्मानित हुए मीसाबंदी

बताया जा रहा है कि जिला उपाध्यक्ष आकाश सक्सेना के द्वारा इस संबंध में मीसाबंदियों की जानकारी एकत्र की जा रही थी लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष के पास 2 नाम के अलावा और कोई नाम नहीं थे। बता दें कि स्व. रामकुमार टमकोरिया जो कोरबा में जनसंघ के संस्थापक रहे और आपातकाल में डेढ़ साल जेल में बिताए तथा उनके बड़े पुत्र शंकरलाल टमकोरिया ने भी आपातकाल में छह माह जेल में बिताया। इनके अलावा स्व. हरिराम चौरसिया, स्व. दुलीचंद केडिया, स्व. नंदकिशोर अंगनामल पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल, मूरित राम साहू, रामकुमार पांडेय सहित लगभग 15 मीसाबंदी दर्ज हैं। इन सभी को पार्टी नेताओं ने भुला दिया जबकि पार्टी के राज्य व राष्ट्र स्तर के शीर्ष नेताओं के साथ इन्होंने भी जेल औऱ यातनाएं सही।
कार्यक्रम के तहत मौजूदा मीसाबंदियों के अलावा जो मीसाबंदी दिवंगत हो गए हैं, उनके परिजनों को सम्मानित किया जाना है, लेकिन जिला भाजपा के इस विवादित सम्मान ने सवाल जरूर उठाया है कि आखिर जिला अध्यक्ष को उन लोगों की जानकारी क्यों नहीं है जिन्होंने पार्टी व संगठन के लिए अपने जीवन के कई वर्ष न्यौछावर किए और आज भी पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।

0 सम्मान में गुटबाजी ठीक नहीं: अमित
इस मामले को लेकर युवा नेता अमित टमकोरिया ने जिला भाजपा अध्यक्ष पर मीसाबंदियों के सम्मान में गुटबाजी और राजनीति को शामिल कर देने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन्होंने पार्टी व संगठन के लिए तमाम यातनाएं सही, उन्हें इस तरह भुला देना अत्यंत गंभीर बात है। अमित की इस मामले में भाजपा जिलाअध्यक्ष से काफी तीखी बहस भी हुई और यह भी सवाल किया कि आखिर मीसाबंदियों का नाम तय करने का अधिकार उन्हें किसने दिया है? कौन मीसाबंदी है और कौन नहीं, इसका प्रमाण अध्यक्ष से तय नहीं होगा बल्कि पार्टी के लिये यातनाएं सहने वाले सदैव सम्मान के हकदार हैं। अमित ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि डॉ. राजीव सिंह पार्टी अध्यक्ष नहीं बल्कि एक कारपोरेट सीईओ की तरह काम कर रहे हैं। इस विषय पर संगठन पदाधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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