Friday, March 27, 2026
Home कोरबा प्रधानमंत्री आवास फर्जीवाड़े पर रिकव्हरी और एफआईआर की सुस्त चाल, 3 माह...

प्रधानमंत्री आवास फर्जीवाड़े पर रिकव्हरी और एफआईआर की सुस्त चाल, 3 माह भी कम पड़े

0 करुमौहा सरपंच तत्कालीन आवास मित्र चन्द्रशेखर मंझवार ने फर्जी जियो टैगिंग कर 72 अपूर्ण आवासों की राशि डकारी है

कोरबा(खटपट न्यूज़)। हर गरीब और कच्चे मकान व झोपड़ी में रहने वालों को पक्की छत देने की प्रधानमंत्री आवास जैसी अति महत्वपूर्ण योजना को उनके द्वारा ही पलीता लगाया जा रहा है, जिन पर इसके क्रियान्वयन की प्रारंभिक व मैदानी जिम्मेदारी रही है। आवास मित्र के द्वारा 72 हितग्राहियों के अपूर्ण आवासों को जियो टैगिंग में पूर्ण दर्शाकर पूरी राशि का आहरण कर लिया गया। फर्जी जियो टैगिंग और आवास योजना में फर्जीवाड़े की जांच तो शुरू कर दी गई और जल्द कार्यवाही के भी संकेत दिए गए लेकिन मार्च माह में खुलासे और कार्यवाही प्रतिवेदन के 3 माह बाद भी न एफआईआर और न ही रिकव्हरी की कार्यवाही की जा सकी है। क्या यह प्रशासनिक कार्यवाही की बेहद सुस्त चाल का नतीजा है या फिर कहानी पर्दे के पीछे कुछ और ही है? इस तरह की संदेहास्पद और बेहद सुस्त कार्यशैली भ्रष्ट आचरण के दूसरे लोगों को भी ऐसे आचरण अपनाने के बाद बचाव का रास्ता निकालने के लिए प्रेरित करने से नहीं चूकती बल्कि गलत करने के बाद भी आंखें तरेरने का दुःसाहस तक कर लेते हैं।

फाइल फोटो

मामला कोरबा जनपद पंचायत के अंतर्गत दूरस्थ वनांचल ग्राम श्यांग, सिमकेंदा व सोल्वा का है। ग्राम श्यांग के 46 हितग्राहियों, सिमकेंदा के 23 व सोलवा पंचायत के 3 हितग्राहियों के नाम वर्ष 2016 से 2019 के मध्य प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत किए गए। इन आवासों के निर्माण हेतु आवास मित्र चंद्रशेखर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आवास योजना के लिए प्रथम किश्त 2 से 4 लाख रुपए जारी किए गए। इसके पश्चात इन सभी आवासों को वर्ष 2018 व 2019 में पूर्ण करना आवास मित्र के द्वारा बताया गया। आवास पूर्ण होने की अवधि को दर्शाते हुए एमआईएस के अनुसार आवास की स्थिति पूर्ण बताई गई। चूंकि शासन के द्वारा योजना में सामने आई गड़बड़ियों और अनियमितताओं के मद्देनजर इसकी जियो टैगिंग का कार्य कराया गया लेकिन जियो टैगिंग में फर्जीवाड़ा आवास मित्र चंद्रशेखर मंझवार ने सभी 72 आवासों को पूर्ण बताया और इस आधार पर संपूर्ण राशि का आहरण कर लिया। 1 लाख 20 हजार रुपए शासन की ओर से निर्धारित राशि के मान से 72 आवासों का 86 लाख 40 हजार रुपए होता है जिनमें से अधिकांश रकम को वह गबन कर लिया।
इस गड़बड़ी की शिकायत श्यांग पंचायत के सचिव विनोद कुमार राठिया व ग्रामीणों ने की है। जनपद सीईओ जीके मिश्रा के द्वारा ब्लाक समन्वयक अभिषेक चौरसिया के जरिए प्रारंभिक पड़ताल कराई गई जिसमें भौतिक सत्यापन में 38 आवास डोर स्तर, 27 आवास छत स्तर, 3 आवास प्लींथ स्तर तक निर्मित पाए गए। ग्राम पंचायत सिमकेंदा में मानसिंह यादव पिता नान्हीराम, मान सिंह पिता जांजीराम, रूपम सिंह पिता डिहू राम, चमार राय के आवास का कार्य तो प्रारंभ भी नहीं हुआ था। जबकि इन आवासों को एक साल पहले ही पूर्ण होना आवास मित्र ने दर्शा दिया और इस तरह अपूर्ण आवासों के साथ-साथ अप्रारंभ आवासों की भी राशि निकालकर गबन कर लिया।
इस मामले में सीधे तौर पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर वसूली की भी कार्यवाही होनी है जो लंबित रखा जाना समझ से परे है, उसे बचने- बचाने का अवसर देना भी कहा जा सकता है। बताया जाता है कि रिकवरी का प्रतिवेदन जिला पंचायत में लटका कर रखा गया है जो अभी तक एसडीएम के टेबल पर नहीं पहुंच सका है। दूसरी ओर इस मामले में श्यांग थाना में विवेचना जारी है जो कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुआ। शिकायतकर्ताओं के बयान लिए गए हैं लेकिन एफआईआर लंबित है। इसके पीछे मंशा गरीब हितग्राहियों को आवास लाभ मिल जाने की है लेकिन अपराध तो चंद्रशेखर ने किया है जिसके लिए एफआईआर दर्ज होना चाहिए।
00 सत्या पाल 00 (7999281136)

Advertisement Carousel