0 सत्या पाल 0
कोरबा/गरियाबंद (खटपट न्यूज)। एक कहावत है- घायल की गति घायल जाने… अर्थात जो घायल होता है वही दूसरे घायल की दशा को भली-भांति समझता है।
कोरोना की इस महामारी ने कितनों के घर उजाड़े, बच्चों से माँ-बाप छीने, न जाने कितनों माँ-बाप की गोद सूनी कर दी और न जाने कितनों की जिंदगी, घर-परिवार यह निगोड़ा कोरोना तबाह करेगा?

इस महामारी के विकट दौर से कलाकार, संगीतकार भी जूझ रहे हैं जो कभी अच्छे वक्त पर/मांगलिक अवसरों पर अपने साजो-सामान से, सुरों के तार से मन को झंकृत कर तन को थिरकने-झूमने के लिए मजबूर कर दिया करते थे। कोरोना की मार ने इन जादुई हाथों से सुरों के तार को, झुमाने वाली आवाज को थाम लिया है। इन कलाकारों की मर्मान्तक व्यथा निवारण करने न कोई विकल्प सूझ रहा न रास्ता निकल रहा है।
समय और कोरोना की मार से मजबूर ऐसे ही एक बेंजो वादक की पीड़ा को, उसकी बीमार बेटी के इलाज के लिए चोरी-छिपे साज को कबाड़ में बेचने के लिए ले जाने की कोशिश और लाकडाउन की सख्ती में जांच के दौरान पकड़े जाने पर उजागर हुई तकलीफ को बड़े ही मार्मिक तरीके से सामने लाया है संवेदनशील पुलिस अधिकारी सुखनंदन राठौर ने। ये पहले कोरबा जिले में बतौर सीएसपी अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में एडिशनल एसपी बतौर गरियाबंद जिले में सेवारत हैं। वर्दी में कड़क मिजाज वाले इस अफसर के सीने में इंसानियत भरा दिल भी धड़कता है। वे खुद भी कलाकार हैं, कला के प्रेमी हैं तो इस विकट दौर में कलाकारों की व्यथा को भी बखूबी समझते हैं। उन्होंने इसे एक शॉर्ट वीडियो के जरिये बड़ी ही खूबसूरती से कड़क औऱ नरम मिजाज, संजीदा दिल पुलिस अधिकारी के साथ-साथ इंसानियत के रिश्ते को दर्शाया है। बता दें कि सुखनंदन राठौर ने अपराध की रोकथाम, इसके दुष्परिणाम, सड़क दुर्घटना को नियंत्रित करने जैसे गंभीर विषयों पर शॉर्ट वीडियो बनाए हैं/भूमिका निभाई है जिन्हें सराहना मिली है।
0 पीरा कलाकार के – अंतआर्त्मा रो उठती है
यह शार्ट वीडियो नि:संदेह हमें/सभी कला प्रेमियों को प्रेरित करता है कि कला को पल्लवित-पुष्पित और सुशोभित करने वाले जरूरतमंद कलाकारों के लिए अपने मानवीय /सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर उनके बोझ को कुछ हद तक हल्का करें। दरअसल यह अंश आरम्भ फिल्म्स के द्वारा निर्मित व भूपेन्द्र साहू द्वारा निर्देशित फिल्म पीरा कलाकार के, का है। उदित और नवोदित कलाकारों के अरमानों को कोरोना ने कैसे कुचला और इनके उड़ते पंखों को समेट कर किस तरह पीड़ा के सागर में डुबोया, इसकी एक झलक दिखाई गई है। गरियाबंद जिला के एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर भी इस फिल्म का एक हिस्सा बने हैं। मर्माहत करने वाले कथानक का अंत सुखद है।














