जुबानी सच : जांच में निगेटिव मिले लोगों ने दुबारा न सैम्पल दिया न जांच कराया फिर भी पॉजीटिव, कंट्रोल रूम के फोन से हुए परेशान…..

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमितोंं के आंकड़ों के बीच चौकाने वाली जानकारी है कि जांच में निगेटिव होकर घर में बेफिक्र और स्वस्थ बैठे कई लोगों को पाजिटिव बताया गया है। इनके पास कंट्रोल रूम से गए एक फोन ने न सिर्फ तनाव पैदा कर दिया बल्कि वे हलाकान भी हैं कि ऐसा कैसे हो गया जबकि दुबारा न तो जांच कराया है और न ही जांच के लिए सैम्पल दिया गया। इनका मोबाइल नंबर तो सही है लेकिन पता में सिर्फ कोरबा लिखा गया जबकि गांव का नाम होना चाहिए।

प्रतीकात्मक चित्र

जिला प्रशासन के कोविड कंट्रोल रूम से फोन करने वालों को ऐसे लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा है। ग्रामीण अंचल के निगेटिव आए इन लोगों ने खरी-खोटी सुनाई कि आखिर उनका नाम पॉजीटिव की लिस्ट में कैसे आ गया? 27 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए 1020 संक्रमितों की सूची में से 9 ऐसे लोग निकले जिन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाया है। इस तरह के गंभीर मामले को बताने और समझने के लिए सीएमएचओ डॉ. बीबी बोर्डे से उनके मोबाइल नंबर 98265-40777 पर संपर्क किया गया पर इस बार भी फोन नो रिप्लाई रहा। आइए, जानते हैं किसने क्या बताया इस बारे में……
0 केस-1 : पॉजीटिव की लिस्ट में शामिल एंटीजन टेस्ट वाले अजय कुमार को फोन लगते ही बताया कि यहां अजय नाम का कोई नहीं रहता और कोई भी इस मोबाइल नंबर का शख्स पॉजीटिव नहीं आया है, बार-बार फोन आ रहा है।
0 केस-2 : हरदीबाजार के उतरदा-बोईदा निवासी रामस्वरूप पटेल 55 वर्ष को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आने व आक्सीजन लेवल गिरने पर जिला अस्पताल ले गए। 24 अप्रैल को अस्पताल के बाहर नाक का सैम्पल लेकर जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। भर्ती होने पर फिर नाक से ही सैम्पल लिए और रिपोर्ट निगेटिव रही। 27 अप्रैल को सुधार होने पर घर ले आए। रात में फोन आया कि रामस्वरूप पॉजीटिव है। पुत्र शैलेन्द्र पटेल ने बताया कि उनके पिता स्वस्थ हैं और कोई तकलीफ नहीं फिर रिपोर्ट पॉजीटिव कैसे आ गई?
0 केस-3 : मानिकपुर निवासी राकेश 40 वर्ष 21 अप्रैल को छुरी जाते वक्त सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। उसे पीएचसी छुरी में भर्ती कराया गया जहां कोरोना टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट मिली। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया जहां भी जांच में निगेटिव रहा। राकेश के पुत्र राज उरांव ने बताया कि जांच के दौरान नाक से ही सैम्पल एक बार लिया गया था और दुबारा कोई जांच फिर नहीं कराई गई और न सैम्पल दिया गया।
0 केस-4 : ग्राम तिलकेजा कलमीभाठा की तिहारीन बाई और ममता जांगड़े को फोन कर बताया कि वे पॉजीटिव हैं। तिहारीन के पुत्र व ममता के पति लुकेश्वर जांगड़े के बताए अनुसार 20 अप्रैल को पिता जागेश्वर प्रसाद को तकलीफ होने पर तिलकेजा के सरकारी अस्पताल में सबका कोरोना टेस्ट कराया गया। पिता और बड़ा भाई ताराचंद एवं 2 भतीजे पॉजीटिव मिले जबकि लुकेश्वर, तिहारिन व ममता निगेटिव रहे। 22 अप्रैल को जागेश्वर की मौत हो गई। ताराचंद व दोनों बेटों की सरकारी दवाई चल रही है। एक बार टेस्ट के बाद दुबारा कोई जांच नहीं हुई और उसी दिन सिर्फ नाक से ही सैम्पल जांच के लिए किया गया था और मोबाइल पर मैसेज आया। लुकेश्वर उसकी मां व पत्नी को कोई तकलीफ नहीं थी फिर भी ऐहतियातन दवा दुकान से मंगाकर कोरोना दवाई की 5 दिन की खुराक इन्होंने सेवन भी कर लिया।
0 केस-5 : तिलकेजा निवासी पंच कुंवर 58 वर्ष, बोधिन बाई 50 वर्ष को पॉजीटिव बताने का 5 बार फोन कंट्रोल रूम से गया जिससे परिजन परेशान हुए। पुत्र मुन्ना सिदार के मुताबिक उसकी पत्नी संतोषी को 7 अप्रैल को प्रसव के लिए कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया गया। प्रसव के 2 दिन बाद जिला चिकित्सालय जाकर कोरोना जांच कराने कहा गया। जांच में पत्नी पॉजीटिव निकली और दवा खाकर ठीक हो गई। ऐहतियातन 18 अप्रैल को तिलकेजा उप स्वास्थ्य केन्द्र में घर के सभी 7 लोगों का सिर्फ नाक का सैम्पल देकर कराया गया और 22 अप्रैल को रिपोर्ट में सभी निगेटिव मिले। कोई भी घर से बाहर नहीं निकला और न किसी को तकलीफ है फिर रिपोर्ट कैसे पॉजीटिव आ गई?
0 केस-6 : तिलकेजा के ही खैरभाठा में भांजा धनंजय कश्यप के घर रह रही राजकुमारी 45 वर्ष के पॉजीटिव होने का फोन दर्ज नंबर पर कंट्रोल रूम से किया गया। पॉजीटिव जानकर धनंजय व राजकुमारी हैरान हो गए। धनंजय ने नाराजगी जाहिर कर बताया कि उसकी मामी सण्डैल में अकेले रहती है। 18 अप्रैल से पहले बुखार आने पर फोन किया तो उसे ले आया फिर तिलकेजा में आई मेडिकल टीम से कोरोना टेस्ट कराने पर 20 अप्रैल को मिली रिपोर्ट में निगेटिव मिली। सिर्फ एक बार नाक का सैंपल देकर जांच कराया, दुबारा कोई जांच हुआ नहीं और न ही सैम्पल दिया गया, मामी पूरी तरह स्वस्थ है फिर रात में फोन कर पॉजीटिव कैसे बता रहे? धनंजय ने आज पुन: अस्पताल ले जाकर गले और नाक दोनों का सैम्पल लेकर जांच कराया है जिसकी रिपोर्ट कुछ दिन बाद मिलेगी।
0 नाक के साथ गले का भी स्वाब जरूरी
एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कोरोना जांच की तीन पद्धतियों में रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए संदेही का नाक का स्वाब लिया जाता है, आरटीपीसीआर और ट्रू-नॉट से टेस्ट के लिए नाक और गला दोनों का स्वाब लेना जरूरी है। रैपिड टेस्ट की रिपोर्ट कुछ ही देर में मिल जाती है जबकि आरटीपीसीआर के लिए सैम्पल रायगढ़ भेजा जाता है और ट्रू-नॉट जांच की सुविधा जिला अस्पताल व एनकेएच में है। यह भी बताया कि बार-बार सैम्पल लेने की बजाय एक ही बार नाक और गले से स्वाब ले लिया जाता है। एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने पर दूसरे सैम्पल को आरटीपीसीआर या ट्रू नॉट टेस्ट के लिए भेजते हैं। इसकी रिपोर्ट आने तक संदिग्ध को घर पर ही रहने कहा जाता है। लेकिन जब हमने इन प्रभावित लोगों से पूछा तो सभी ने प्रारम्भिक जांच हेतु दल द्वारा सिर्फ नाक से ही और मात्र एक बार स्वाब का सैम्पल लेना बताया । अब चूक या समझ में भूल कहा हुई, टीम जाने।

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