Friday, March 27, 2026
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बाजारों में लोग बेकाबू: लाकडाउन 10 दिन का पर खरीदारी महीने भर की कर रहे… राशन-सब्जियों की जमाखोरी पर कानूनी कार्रवाई के हैं निर्देश…

कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोरोना वायरस के फैलाव से बदलते माहौल के बीच जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चावल-दाल जैसी राशन सामग्रियों और सब्जियों के दाम बढ़ने तथा उनकी कालाबाजारी एवं जमाखोरी की अपुष्ट खबरों पर कलेक्टर ने लॉकडाउन के पहले दो दिन किसी भी परिस्थिति में अति आवश्यक चीजों को, सामान्य दिनों के दामों से अधिक दाम पर नहीं बेचने की अपील दुकानदारों से करते हुए इस लड़ाई में सभी व्यापारियों से अपना सहयोग देने की अपील की है और राशन, सब्जियों आदि की कालाबाजारी तथा जमाखोरी नहीं करने को कहा है।


इसके विपरीत शनिवार को जैसे ही सोशल मीडिया में लॉकडाउन लगने की खबर आम हुई, लोग दुकानों और बाजारों में टूट पड़े। आलम यह था कि लोग शनिवार के बाद दूसरे दिन भी अपने कार व अन्य वाहनों में बैठने की जगह छोड़कर सारा सामान भरते नजर आए। राशन दुकानों सहित अन्य प्रतिष्ठानों में मास्क, सेनेटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रही किंतु इसका पालन कराने वाला नगर निगम सहित अन्य अमला कहीं भी दूर-दूर तक नजर नहीं आया। राशन, तेल व अन्य सामानों की बढ़ती कीमतों के भय से लोगों ने जमकर जमाखोरी का रास्ता अपनाया। बाजारों में लोग इस तरह टूट पड़े हैं मानों लाकडाउन महीने भर चलेगा, और सामान नहीं मिलेंगे। बाजार में लोगों और दुकानदारों को बेक़ाबू होते देर नहीं लगी और माहौल मेला जैसा हो गया है। सड़कों पर जगह-जगह जाम भी लग रहे हैं।
हालांकि दूसरी ओर कलेक्टर ने सभी व्यापारियों और राशन दुकानों में उपलब्ध सामग्रियों का स्टॉक निरीक्षण करने के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों को दिये हैं। तहसीलदारों एवं पटवारियों को निर्देशित किया गया है कि लॉकडाउन के पहले दो दिन ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में आलू-प्याज, तेल, दाल, चावल, दूध, सब्जी, नमक आदि जरूरी खाद्य सामग्री उचित दामों पर ही मिलना सुनिश्चित करें। किसी भी दुकानदार द्वारा आवश्यक वस्तुओं को एमआरपी से अधिक दाम में बेचते हुये पाया गया तो उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता 1860 के तहत् कड़ी कानूनी कार्यवाही की जायेगी। कलेक्टर ने निगरानी के लिए प्रशासनिक अधिकारियों एवं सेक्टर ऑफिसर्स को जिम्मेदारी दी है। देखना यह है कि इन दो दिनों में कलेक्टर के निर्देशों का पालन किस हद तक करा पाने में संबंधित अधिकारी सफल होंगे?

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