Tuesday, March 24, 2026
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विडंबना : लिपिकों के हवाले कोरबा जिले के सभी उप पंजीयक कार्यालय, तहसीलदार/नायब तहसीलदार को आखिर क्यों नहीं सौंपा जा रहा प्रभार…?

कोरबा (खटपट न्यूज)। जमीनों की खरीदी-बिक्री का महत्वपूर्ण कार्य संपादित करने वाले उप पंजीयक कार्यालयों में जिम्मेदार अधिकारियों की कमी लगातार बनी हुई है। आलम यह है कि पंजीयन लिपिकों से उप पंजीयक का कार्य कराया जा रहा है। अब लिपिक उप पंजीयक बन गए हैं तो भला लिपिक का मूल कार्य कौन करेगा?

व्यवस्थाओं को खुलेआम अंगूठा दिखाए जाने का कोरबा जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी कड़ी में जिले के कोरबा, कटघोरा, हरदीबाजार व पाली उप पंजीयक कार्यालय भी अव्यवस्था की मार झेल रहे हैं। जिला पंजीयक आशुतोष कौशिक कोरबा के अलावा जांजगीर-चांपा जिले का भी प्रभार संभालते हैं और उनकी दफ्तर में आवाजाही अपेक्षाकृत कमतर बताई जाती है। उप पंजीयक कोरबा कार्यालय में पदस्थ श्री देवता के सेवानिवृत्त होने तथा कटघोरा उप पंजीयक कार्यालय में पदस्थ किरण खलखो का तबादला जांजगीर जिले में होने उपरांत उन्हें जिला पंजीयक द्वारा कार्यमुक्त कर दिए जाने के बाद दोनों महत्वपूर्ण कार्यालय उप पंजीयक विहिन है। सूत्रों के मुताबिक जिला पंजीयक ने हरदीबाजार उप पंजीयक कार्यालय के लिपिक पवन मरावी जो कि वहां उप पंजीयक का कार्यभार संभाल रहे थे, उन्हें कोरबा उप पंजीयक का प्रभार सौंपा है। पाली में भी लिपिक ही उप पंजीयक बने हुए हैं। पंजीयन लिपिकों से उप पंजीयक जैसा महत्वपूर्ण कार्य कराया जाना अपने आप में ही सवाल उत्पन्न करता है।
0 महानिरीक्षक पंजीयन के आदेश की खुली अवहेलना कर रहे जिला पंजीयक
बता दें कि इसके पूर्व में कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक रायपुर धर्मेश साहू (आईएएस) के द्वारा 17 मार्च 2020 को लिपिकों से पंजीयन कार्य संपादित कराने के संबंध में समस्त वरिष्ठ एवं जिला पंजीयक को निर्देश जारी किया गया था। इसके अनुसार उप पंजीयक के अवकाश अथवा पद रिक्त होने पर एवं पदेन कार्यालयों में पंजीयन लिपिकों को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 12 के अंतर्गत पंजीयन कार्य संपादित करने के लिए अधिकृत किया जाना प्रचलन में है। चूंकि पंजीयन का कार्य महत्वपूर्ण होने के कारण ऐसी स्थिति में उप पंजीयक की अनुपस्थिति या पद रिक्त रहने पर उप पंजीयक का कार्य संबंधित तहसीलदार/नायब तहसीलदार को ही सौंपा जाना चाहिए। महानिरीक्षक पंजीयन धर्मेश साहू ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन पंजीयन कार्यालयों में पंजीयन लिपिक को पंजीयन कार्य हेतु अधिकृत किया गया हो, उसे तत्काल निरस्त करें तथा भविष्य में उप पंजीयक के अवकाश अथवा पद रिक्त होने की स्थिति में तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार को पंजीयन कार्य हेतु अधिकृत करें। इस निर्देश का कड़ाई से पालन करने हेतु भी वरिष्ठ जिला पंजीयक को कहा गया है। समस्त जिला कलेक्टरों को भी यह पत्र सूचनार्थ प्रेषित किया गया है।
पंंजीयन महानिरीक्षक के उक्त आदेश का कोरबा जिले में पालन होता नजर नहीं आ रहा। पंजीयन के कार्यों में हमेशा से सवाल उठाए जाते रहे हैं और जिस तरह से कोरबा जिला में जमीनों की हेरा-फेरी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, उसके मद्देनजर लिपिक की बजाय तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार को उप पंजीयक का प्रभार नहीं देना समझ से परे हैं। इसे लेकर उप पंजीयक कार्यालय एवं प्रशासनिक गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएं भी व्याप्त है कि आखिर महानिरीक्षक पंजीयन के आदेश का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा, क्या उप पंजीयक कार्यालय में ऐसा कुछ होता है, जिसका राज खुलने का डर है।

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