Wednesday, March 25, 2026
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मदरसा के छात्रों को सांप्रदायिक विखंडन का नहीं, सामाजिक सद्भाव और शान्ति का एजेंट बनाएं : अखलाख

0 मदरसों में धर्म के अलावा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विषयों की शिक्षा देना जरूरी करें

कोरबा(खटपट न्यूज़) । ‘मदरसा शिक्षा प्रणाली और इसके अध्यापन के पारंपरिक तरीके के बारे में दृश्टिकोण’ विषय पर राय रखी गयी।
हाजी अखलाख खान ने इस विषय पर कहा कि कुछ लोग पूरे पाठ्यक्रम को त्रुटिपूर्ण मानते हैं और उसके जीर्णोद्धार की बात करते हैं वहीं कुछ लोग आधुनिक विज्ञान को मदरसा पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर देते हैं। मदरसा शब्द का उपयोग कभी-कभी इन संस्थानों में अध्यनरत छात्रों को पर अलौकिक कट्टरपंथी रूढ़िवादी और आधुनिक विरोधी के तौर पर किया जाता है। भारत में मदरसा संस्थानों पर समय-समय पर तरह-तरह के कलंक लगाए जाते हैं क्योंकि कट्टरपंथी इस्लाम के आव्हान के लिए इन पर संदेह किया जाता है जो कि भारतीय बहुलवादी संस्कृति के लिए खतरा माने जाते हैं । इसके अलावा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए इसका योगदान बहुत कम है क्योंकि ज्यादातर मदरसे के छात्रों को धर्म संबंधित शिक्षा दिया जाता है जो कि नौकरी के बाजार के मांग को पूरा नहीं कर पाता इसलिए ज्यादातर छात्रों को धर्म संबंधित काम जैसे मस्जिद में इमाम और युवाओं को कुरान पढ़ने जैसे कार्य में जुड़े रहते हैं। मदरसों के एक वर्ग के छात्र ही शिक्षा संस्थानों में प्रवेश किए और नौकरी के बाजार के लिए तैयारी की जाती है। इसके अलावा मदरसों को सामाजिक तकनीकी से अध्यापन के तरीके की कमी के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है।

अखलाख खान ने कहा कि मदरसा प्रणाली में प्रकृति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान ,मानव विज्ञान आदि से संबंधित पाठ्यक्रमों को पारंपरिक मदरसा प्रणाली में न्यूनतम स्नातक स्तर तक शामिल करने की आवश्यकता है ताकि छात्राओं को अपने भविष्य चुनने के साथ-साथ इस्लाम में परंपरागत हासिल हो सके मदरसा संस्थानों को मुस्लिम समुदाय के सामाजिक विखंडन और आर्थिक पिछड़ेपन को समग्र रूप से समझना चाहिए। छात्रों को सांप्रदायिक विखंडन के एजेंट बनने के बजाय समाजिक सद्भाव और शान्ति के एजेंट के रूप में तैयार करने पर होना चाहिए मदरसा प्रणाली को आवश्यक संरचनात्मक परिवर्तन से गुजरना पड़ता है और बदली समाजिक परिस्थितियों से उत्पन्न समस्याओं के लिए व्यवहारिक दृष्टिकोण का पालन करके समस्याओं के समाधान के दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए । हाजी अखलाक ने कहा कि मदरसा संस्थानों के संरचनात्मक परिवर्तन छत्राओं को इस्लामिक कानून में परम्परागत होने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिए यानी एक धर्मशास्त्री होने के साथ-साथ छात्र एक वैज्ञानिक अर्धशास्त्री,बुद्धिजीवी बन सके ताकी मुस्लिम समाज के साथ साथ देश का भी उत्थान हो सके।

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