Monday, March 23, 2026
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जनपदों में प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार अलग-अलग अधिकारियों को, स्वीकृति के लिए लगानी पड़ रही दौड़, लेट-लतीफी से विकास और भुगतान प्रभावित…

कोरबा(खटपट न्यूज़) । जिले के दो ब्लाक के विकास कार्यों के राशि भुगतान के लिए 70 किलोमीटर तक की दौड़ लगाई जा रही है। भुगतान में विलंब से पंचायतों का विकास कार्य ठप्प पड़ गया है। करतला एवं पाली ब्लाक में प्रभारी जनपद सीईओ की नियुक्ति एवं उनका वित्तीय अधिकार जिला मुख्यालय में बैठे डिप्टी कलेक्टर को देने की वजह से यह हालत निर्मित हुए हैं। दोनों ब्लाक के सरपंच मुख्यमंत्री के समक्ष गुहार लगाने का मन बना चुके हैं ताकि जनपद पंचायत के सीईओ को पूर्व की तरह ही दोनों प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार एक साथ रहे।

दो जनपद पंचायतों का संचालन जिला मुख्यालय से हो रहा है। ज्ञात हो कि करतला एवं पाली में प्रभारी जनपद सीईओ के रूप में क्षेत्र संयोजक राधेश्याम मिर्झा और व्याख्याता विजय कुमार चौहान सीईओ पदस्थ हैं लेकिन इन दोनों को सिर्फ प्रशासनिक अधिकार दिया गया है। इन दोनों जनपद पंचायतों का वित्तीय अधिकार डिप्टी कलेक्टर आशीष देवांगन को दिया गया है। जिला मुख्यालय से करतला की दूरी करीब 50 किलोमीटर तो पाली 70 किलोमीटर दूर है। वित्तीय मामलों के लिए बाबुओं को चेक पंजी, बिल रजिस्टर सहित समस्त वित्तीय लेखा लेकर लंबी दूरी तय करना पड़ रहा है ।
यहां यह बताना भी लाजिमी है कि जिला मुख्यालय में 3 डिप्टी कलेक्टर आशीष देवांगन ,भरोसा राम ठाकुर और संजय मरकाम हैं। संजय मरकाम अतिरिक्त तहसीलदार भैसमा पदस्थ हैं। इन अधिकारियों के होते हुए एक डिप्टी कलेक्टर को 2 जनपद पंचायत का वित्तीय प्रभार देना चर्चा में है। साथ ही कटघोरा में जिन सीईओ एचएन खोटेल की कार्यशैली को लेकर बड़ा बखेड़ा हुआ और तलाबंदी के बाद उन्हें हटाया गया, फिर से कटघोरा जनपद के सीईओ पदस्थ करना भी हैरानी वाला रहा। प्रशासनिक गलियारे बताते हैं कि अतिरिक्त तहसीलदार भैसमा को करतला जनपद सीईओ का प्रभार दिया जा सकता था जिससे करतला के बाबुओं को वित्तीय मामलों के लिए जिला मुख्यालय दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। करतला जनपद सीईओ को वित्तीय अधिकार दिया जा सकता था पर इसकी अनदेखी हुई है ।

फाइल फोटो

0 बेवजह की परेशानी बढ़ाने का काम
2 जनपद पंचायतों का वित्तीय प्रभार जिला मुख्यालय में बैठे एक डिप्टी कलेक्टर को देने से पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है । समय पर चेक नहीं कटने से अधिकांश पंचायतों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है । नाम न छापने की शर्त पर परेशान सरपंचों ने बताया कि काउंटर हस्ताक्षर के लिए बिल प्रशासनिक प्रभार वाले जनपद सीईओ के पास से होकर आगे बढ़ता है। शासन-प्रशासन को जल्द ही पूर्ण प्रभार वाले जनपद सीईओ की पदस्थापना करनी चाहिए। यह भी सवाल किया है कि क्या एक अधिकारी प्रशासनिक और वित्तीय दोनों का प्रभार नहीं संभाल सकता, जैसा कि पहले होता आया है और शेष 3 जनपदों में पूर्ण प्रभार वाले सीईओ बैठे भी हैं या फिर प्रशासन को अपने अधिकारी की कार्यक्षमता या फिर वित्तीय मामलों में विश्वसनीयता कम है? सरपंचों ने बताया कि वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष अपनी समस्या रखने का प्रयास करेंगे। दूसरी तरफ इन मामलों में नियुक्तिकर्ता अधिकारी और उनके उच्च अधिकारी का रवैया भी कुछ ज्यादा स्पष्ट नहीं हो रहा है। प्रशासनिक कामकाज में अपारदर्शिता और संवादहीनता इसकी एक बड़ी वजह है।
0 सब कमीशन के लिए किया गया : ननकीराम
रामपुर विधायक ननकीराम कंवर का कहना है कि कमीशनखोरी के लिए इस तरह का कृत्य किया गया है। पंचायतों का विकास कार्य बाधित हो रहा है। कलेक्टर को चाहिए कि वो ये सब बन्द कराएं ,पूर्ण प्रभार वाले जनपद सीईओ की पदस्थापना करें । अन्यथा मैं स्वयं मुख्यमंत्री से प्रशासन के इस रवैय्ये की शिकायत करूँगा।

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