Thursday, March 26, 2026
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जप्त सिलाई मशीनों की होगी लैब टेस्टिंग, संचालक बता रहे असली

कोरबा (खटपट न्यूज)। ब्रांडेड उषा कंपनी के नाम की नकली सिलाई मशीन बेचने के मामले में पुलिस की पड़ताल जारी है वहीं इनके विक्रेता इस तरह के आरोप को नकारते हुए अधिकृत विक्रेताओं से मिला हुआ सामान ही बेचने की बात कह रहे है। पुलिस द्वारा असली-नकली का अंतर जानने के लिए पाटर्््स की लैब टेस्टिंग जल्द ही कराई जाएगी।
गौरतलब है कि विगत दिनों सिलाई मशीन की प्रख्यात कंपनी उषा इंटरनेशनल के द्वारा उसके ब्रांड की जांच के लिए नियुक्त एजेंसी के वरिष्ठ जांच अधिकारी दिलीप कुमार व दीपक कुमार के द्वारा कोरबा एवं पाली के कुल 5 दुकानों में जांच की गई। कोरबा के पावर हाऊस रोड स्थित 2 दुकानों से कुल 18 एवं पाली के 3 दुकानों से कुल 7 नग सिलाई मशीन की जब्ती पुलिस की मौजूदगी में नकली होना बताकर कराई गई। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट पर कापीराइट एक्ट की धारा 63 के तहत कोतवाली व पाली पुलिस द्वारा जुर्म दर्ज कर विवेचना की जा रही है। इस बारे में पुलिस ने कहा है कि असली और नकली का अंतर जानने के लिए उषा सिलाई मशीन की निर्माता कंपनी के ही मैकेनिकों की मदद के साथ लैब टेस्टिंग भी कराई जाएगी। पूरी तस्दीक होने के बाद जांच को आगे ले जाया जाएगा। इधर दूसरी ओर उपरोक्त पांचों विक्रेताओं का कहना है कि वे अधिकृत विक्रेताओं के पास से सिलाई मशीन लाकर अपनी दुकान में रखकर बेचने का काम करते रहे हैं। वर्ष 1973 से सिलाई मशीन बेच रहे पप्पू चोपड़ा का कहना है कि वे एसएस प्लाजा स्थित बालाजी इलेक्ट्रानिक और रायपुर के अजंता सिलाई से उषा ब्रांड की सिलाई मशीन लाकर बेचते रहे हैं। कार्टून में पैक होकर आने वाली मशीन को सिर्फ झाड़-पोछकर बेचने का काम अब तक करते आए हैं। किसी भी तरह की एसेंबलिंग आज तक नहीं की गई। मशीन के अंदर क्या असली और क्या नकली है, इसे निर्माता और अधिकृत विक्रेता ही बता सकेंगे। पाली के व्यापारियों ने बताया कि रायपुर में उषा मशीन की डिपो है जहां से मशीन वे लाकर बेचते हैं। बिलासपुर से भी मशीन लाकर बेचते रहे हैं।
0 मशीनों के सप्लायर पहुंचे, शिकायतकर्ता नहीं आए
पाली के सिलाई मशीन के व्यापारी ने बताया कि गुरुवार को प्रकरण की जांच के सिलसिले में बिलासपुर-रायपुर से उषा मशीन वाले आए थे। बिलासपुर से श्री शारदा, विष्णु सेल्स, कृष्णा सेल्स, ए-वन के संचालक व रायपुर से विजय सेल्स के संचालक जो उषा सिलाई मशीन के छत्तीसगढ़ सप्लायर हैं, वे पाली पहुंचे थे और शाम करीब 7.30 बजे तक पाली थाना में मौजूद रहकर रिपोर्टकर्ता का इंतजार करते रहे लेकिन वे नहीं पहुंचे। आज भी सुबह 10 बजे तक आने की बात रिपोर्टकर्ता ने कही थी लेकिन दोपहर तक नहीं पहुंचे। पीड़ित व्यवसायियों की मांग है कि उषा कंपनी के उच्च स्तरीय मैकेनिक अथवा जानकार के द्वारा जब्त किए गए मशीनों की प्रमाणिकता की जांच कराई जाए। अधिकृत विक्रेताओं ने भी अपनी तरफ से क्लीन चिट दी है कि सप्लाई की जा रही मशीनें कहीं से भी नकली नहीं हैं।
0 पंचिंग नंबर में अंतर को बताया नकली का आधार
जांच करने आए अधिकारियों में से दिलीप कुमार ने मशीनों को नकली बताए जाने के आधार को मीडिया से साझा करने से इनकार किया। दूसरी ओर व्यापारियों ने बताया कि इन लोगों के द्वारा सिलाई मशीन में मौजूद पंचिंग नंबर में अंकों का अंतर के आधार पर नकली बताया गया है। पाली के व्यवसायी ने बताया कि कम्पास बाक्स, सुई में उषा नहीं लिखे होने, बाबीन टीने की बजाय प्लास्टिक का होने को आधार बनाया गया है। व्यवसायियों की माने तो पंचिंग का नंबर अलग-अलग लॉट में अलग-अलग आता है और उनके पास उषा मशीन का बार कोड स्कैनर, सीरियल नंबर, जीएसटी बिल सहित अन्य सभी  वे आधार है जो उनके सामान को असली बताने के लिए पर्याप्त हैं।

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