मनमानी व कार्यवाही से नाराज कर्मचारी 28 दिसंबर से धान खरीदी का करेंगे बहिष्कार, मौखिक आदेश के पालन में जताई असमर्थता…..

कोरबा(खटपट न्यूज़)। 28 दिसम्बर से छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान खरीदी बंद हो सकती है । प्रशासन द्वारा पटवारियों के माध्यम से जारी किए उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा से भी कम धान खरीदी करने समिति प्रबंधकों पर बनाए जा रहे दबाव के साथ साथ प्रबंधक ,फड़ प्रभारियों को हटाए जाने की कार्यवाई से सहकारी समितियां आक्रोशित हैं । इन्होंने मौखिक आदेश के पालन में असमर्थता भी जताई है।
जिले में भी 1 दिसम्बर से 31 जनवरी तक समर्थन मूल्य के आधार पर प्रदेश में धान खरीदी की जा रही है । राज्य शासन ने गत वर्ष की तरह इस साल भी किसानों को प्रति क्विंटल धान के लिए 2500 रुपए भुगतान करने का निर्णय लिया है । केंद्र शासन पतला धान 1888 रुपए तो मोटा एवं स्वर्णा धान 1868 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीद रही है । इस राशि के ऊपर2500 रुपए प्रति क्विंटल के लिए अंतर की राशि देश के पूर्व स्व.प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर शुरू किए गए राजीव न्याय योजना के रूप में 4 किश्तों में बोनस के तौर पर किसानों के खाते में जारी कर रही है ।इस तरह देखें तो इस साल भी जिले के किसानों को प्रति क्विंटल धान के लिए 2500 रुपए की राशि मिलेगी। पटवारियों द्वारा गिरदावली में प्रविष्ट बोनी रकबा के आधार पर जारी किए गए उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा अनुसार धान की खरीदी किए जाने का प्रावधान है। लेकिन वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य शासन इस साल किसानों को गत वर्ष की तरह 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की राशि का भुगतान कर पाने में सक्षम नजर नहीं आ रही है । प्रशासन के आला अधिकारी समिति प्रबंधकों पर कार्यवाई का भय दिखाकर पटवारी द्वारा जारी किए गए उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा से भी 40 से 50 फीसदी तक कम धान खरीदी करने का दबाव बना रहे हैं । प्रदेश के कोरबा जिले से यह मामला सामने आ रहा है । जिन समितियों में प्रशासन द्वारा मौखिक रूप से दिए गए लक्ष्य से अधिक मात्रा में धान खरीदी होती नजर आ रही है ,वहाँ के प्रबंधकों ,फड़ प्रभारियों ,कम्प्यूटर ऑपरेटरों को हटाए जाने की साजिश चल रही है । ताजा मामला कोरबा जिले का है ,जहाँ इस तरह की कार्यवाई के बाद जिला सहकारी कर्मचारी विक्रेता संघ ने 28 दिसम्बर से धान खरीदी कार्य का बहिष्कार किए जाने का ऐलान कर दिया है । इसके लिए 25 दिसम्बर को समिति के कर्मचारी औपचारिक बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप देंगे। दरअसल बुधवार को कोरबा एसडीएम सुनील नायक के प्रतिवेदन पर अपर कलेक्टर ने बरपाली (श्यांग)के प्रभारी प्रबंधक चंद्रेश कश्यप को हटाकर बरपाली (श्यांग ) के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सज्जाद मोहम्मद को प्रभारी प्रबंधक बना दिया है । साथ ही कम्प्यूटर ऑपरेटर फिरोज खान को 90 किलोमीटर दूर कोरबा शहर से लगे दादरखुर्द स्थानांतरण कर दिया है । वहीं दादरखुर्द के ऑपरेटर संतोष पटेल को बरपाली ( श्यांग ) में पदस्थ कर दिया है । इससे पहले पठियापाली के फड़ प्रभारी श्यामलाल यादव एवं अखरापाली के कम्प्यूटर ऑपरेटर गुलशन पटेल को भी हटाया जा चुका है ।

बुधवार को जारी किए गए आदेश में धान उपार्जन कार्य के सुव्यस्थित कार्य संचालन का हवाला दिया गया है जबकि इस तरह का आदेश अनियमितता बरतने पर धान खरीदी के मध्यावधि में किया जाता है ।बताया जा रहा है कि प्रशासन के मौखिक धान खरीदी लक्ष्य को सफल नहीं बनाने वाले समिति के कर्मचारियों के खिलाफ यह कार्यवाई की गई है । प्रशासनिक अधिकारियों के इस कार्यवाई को समिति प्रबंधक पूर्वाग्रह से ग्रसित बताते हुए अब विरोध प्रदर्शन का मन बना चुके हैं । जिला सहकारी कर्मचारी विक्रेता संघ के अध्यक्ष के आह्वाहन पर सभी समिति के कर्मचारी 28 दिसम्बर से धान खरीदी का कार्य बंद करने की ठान चुके हैं । इसके लिए 25 दिसम्बर को बैठक कर रूपरेखा बनाई जाएगी । बताया जा रहा है कि कोरबा एसडीएम सुनील नायक के प्रतिवेदन पर अपर कलेक्टर कोरबा श्रीमती प्रियंका ऋषि महोबिया ने फड़ प्रभारी को धान खरीदी कार्य से पृथक करते हुए ऑपरेटरों के कार्यस्थल में बदलाव किया है जबकि सहकारिता सेवा नियम में निहित प्रावधान अनुसार समिति के किसी भी स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाई का अधिकार सिर्फ उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं को है । इस तरह देखा जाए तो प्रशासन ने प्रबंधक एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ नियम विरुद्ध तरीके से कार्यवाई की है ।

0 पटवारियों पर दर्ज हो एफआईआर कहा जा रहा है कि जिस तरह पटवारियों द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा से भी 30 से 50 फीसदी तक कम धान खरीदी करने का दबाव बनाया जा रहा है ,उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है । पटवारियों द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा को अगर प्रशासन गलत मानता है तो सीधे पटवारियों पर कार्यवाई की जाय जिन्होंने सांठ-गाँठ कर उत्पादन प्रमाण पत्र में रकबा बढ़ा दिया है । समिति प्रबंधक या समिति के अन्य कर्मचारी किसान द्वारा लाए गए धान को उत्पादन प्रमाण पत्र के आधार पर नहीं रोक सकते।

0 विधानसभा में उठाएंगे सवाल : ननकीराम प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री व रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने भी प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं । उन्होंने कहा है कि पहले प्रदेश में पंजीकृत रकबा से कम का उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किया गया। अब पटवारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाणपत्र में दर्ज रकबा से भी कम धान खरीदी किए जाने की साजिश चल रही है ताकि किसानों का कम से कम धान लिया जा सके । उन्होंने कहा है कि भैसमा ,तिलकेजा सहित अन्य समितियों में प्रशासन द्वारा इस तरह का दबाव बनाए जाने की सूचना मिल रही है । किसानों का एक-एक दाना धान खरीदने का वादा करने वाली राज्य सरकार धान खरीदी के हर मोर्चे पर फेल रही है । राज्य शासन से विधानसभा में इस मुद्दे पर जवाब मांगेंगे । कर्मचारियों पर नियम विरुद्ध कार्यवाई करने वाले अफसरों के खिलाफ उचित कार्यवाई की मांग करेंगे ।

0 ऐसे में नहीं कर सकेंगे धान खरीदी जिला सहकारी कर्मचारी विक्रेता संघ के अध्यक्ष नर्मदा देवांगन का कहना है कि प्रशासन के तमाम आला अधिकारियों त्रि सदस्यीय निगरानी दल( नोडल ,आरएईओ,पटवारी ) की मौजूदगी में धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है । उसके बाद भी पटवारियों द्वारा जारी किए गए उत्पादन प्रमाण पत्र में दर्ज रकबा से कम धान खरीदी करने का दबाव बनाया जा रहा है । बेवजह कर्मचारियों पर कार्यवाई की जा रही है । ऐसी स्थिति में धान खरीदी का कार्य कर पाना सम्भव नहीं है ,हम सभी 28 दिसम्बर से धान खरीदी कार्य का बहिष्कार करेंगे ।

0 दलालों के द्वारा धान खपाए जाने की सूचना थी कोरबा एसडीएम सुनील नायक का कहना है कि बरपाली ( जिल्गा) में 2 दलालों के नाम पर पंजीयन कर धान खपाए जाने की सूचना मिली थी । जिसके आधार पर आवश्यक कार्यवाई की अनुशंसा किए थे । गत वर्ष भी वहाँ से इस तरह की शिकायतें मिली थी ।पटवारियों के द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र के लक्ष्य के आधार पर ही धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है ,कहीं कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा ।

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