
कोरबा (खटपट न्यूज)। सांपों के लिए कोरबा का वातावरण अनुकूल है यही वजह है कि यहां सांप काफी ज्यादा मिलते है। कोरोना काल में भी टीम ने बेहतर काम किया। अब तक 2650 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें जंगल में छोड़ा गया। सांप रिहायशी क्षेत्रों से लेकर गैराज, वर्कशॉप के अलावा वाहनों में छिपे मिले है। स्नैक रेस्क्यू टीम ने डॉयल 112 के सहयोग से काम किया है। संस्था में 19 सदस्य है, जल्द ही संस्था का पंजीयन भी कराया जाएगा। पंजीयन के बाद सभी सदस्यों को आईकार्ड जारी किया जाएगा। इसके बाद संस्था के अधिकृत व्यक्ति ही सांप पकड़ सकेंगे।
उक्त बातें स्नैक कैचर जितेन्द्र सारथी ने प्रेस क्लब तिलक भवन में मीडिया से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में अब तक की स्थिति में टीम ने कोरबा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मैन पावर और संसाधन के दम पर बेहतर काम किया। पुख्ता नेटवर्क का लाभ यह रहा कि किसी भी स्थान पर सांप निकलने की सूचना मिलने पर अधिकतम 30 मिनट के भीतर उपस्थिति दर्ज कराई गई। कहीं पर एक-दो सदस्यों तो कहीं ज्यादा कार्यबल के साथ सर्पों को पकड़ने का काम संभव किया गया इनमें अधिकांश सर्प बेहद विषैले प्रजाति से संबंधित रहे। क्षेत्र में इस वर्ष के सबसे अधिक लंबाई वाले और वजनी अजगर को पकड़ने का काम भी इस टीम ने किया। जितेंद्र ने बताया कि खरमोरा क्षेत्र में कोबरा के अंडों के साथ उनके कई सदस्य थोक के हिसाब से मिले। सर्पों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि सांप पकड़ने के लिए वे किसी से कोई राशि नहीं लेते और न ही किसी प्रकार का डोनेशन लिया जाता है। सभी जगह नि:शुल्क सेवा पहुंचाई जाती है। उन्होंने कहा कि जिले में स्नैक पार्क बनाए जाने की जरूरत है जिससे सांपों को संरक्षण मिलेगा। इससे कोरबा जिले को एक विशेष पहचान मिलेगी।
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