रायपुर ,डायरेक्टर जैसे एचओडी पद पर आमतौर पर ऐसा होता नहीं, पर छत्तीसगढ़ में हुआ है कि कोई अफसर एक जगह पर पूरे 21 साल तक टिक गया। और, उसे कोई भी सरकार हिला नहीं पाई। कल 30 जून को वे उसी पद से रिटायर हुए थे, जिस पद पर एक नवंबर 2000 को आसीन हुए थे।बात हो रही है आयुष संचालक डाॅ0 जीएसा बदेशा की। मध्यप्रदेश से अलग होने पर ज्वाइंट डायरेक्टर बदेशा छत्तीसगढ़ आए थे। उस समय मध्यप्रदेश से इस विभाग में कोई सीनियर अफसर आया नहीं। लिहाजा, बदेशा को डायरेक्टर का प्रभार दे दिया गया। उसके कुछ दिन बाद अजीत जोगी सरकार ने उन्हें पूर्णकालिक डायरेक्टर बना दिया। इसके बाद दो सरकार बदल गई। लेकिन, बदेशा की कुर्सी सुरक्षित रही। 15 साल बीजेपी की सरकार आइ्र्र तो आयुष विभाग के लोगों को लगा कि अब बदेशा की कुर्सी नहीं बचेगी। लेकिन, इस सरकार में भी उन्होंने ढाई साल निकाल दिए। कई बाद चर्चा चली कि किसी आईएएस को आयुष का डायरेक्टर बनाया जाएगा। जैसा कि मध्यप्रदेश जैसे अनेक राज्यों में है भी। वहां आईएएस डायरेक्टर होते हैं। लेकिन, बदेशा का सत्ता में प्रभाव ऐसा था कि न किसी आईएएस की इंट्री हो पाई और न ही विभाग के किसी अफसर को यह मौका मिल पाया।छत्तीसगढ़ में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई विभागाध्यक्ष जैसे पद पर कोई अफसर 21 साल बैठा रह गया होगा। मध्यप्रदेश में भी ऐसा कभी नहीं हुआ। अविभाजित मध्यप्रदेश में बदेशा ने यह एक अनूठा रिकार्ड बनाया है।बदेशा कल शाम रिटायर हुए। कोरोना के प्रोटोकाॅल के तहत उन्हें वर्चुअल विदाई दी गई। बदेशा का चार्ज डायरेक्र हेल्थ नीरज बंसोड़ को दिया गया है।
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