
कोरबा। आश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा तिथि इस महीने में खास रही की कोरबा जिले के सुदूर वनांचल देवपहरी का हिंगलाजगढ़ जन आस्था और भक्ति का विशेष केंद्र बन गया। देश के पांच शक्तिपीठों सहित सिद्धिदात्री देवी और बलूचिस्तान के हिंगलाज देवी के नाम से भी यहां अखंड ज्योति यहां पर प्रतिष्ठित हुई। अब यहां भक्तों को अखंड ज्योत के दर्शन प्राप्त होंगे।

सोमवार को देव्पहरी आंचल शक्ति की उपासना और आस्था को बल देने वाले नवरात्र पर्व पर अभूतपूर्व उमंग उत्साह और भक्ति की तरंगों में हिलोरे लेता नजर आया। शक्ति स्थल से यहां तक पहुंची अखंड ज्योत अभिलाषा लोगों की पूरी हुई जो उन्होंने काफी समय से अपने मन में रखी थी।

उत्तर से वैष्णो देवी , दक्षिण से कामाक्षी देवी, पूर्व से कामाख्या , पश्चिम से कालिका देवी पावागढ़ और मध्य भारत से शारदा देवी की अखंड ज्योति को लाने की जिम्मेदारी सेवाभावी भक्तों ने पुरी की। इसमें मात्र शक्ति का भी विशेष सहयोग रहा। सभी प्रकार की बाधाओं को पार करते हुए भक्त वृन्द कोरबा पहुचे। स्थानीय स्तर पर पूजा अर्चना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अखंड ज्योति यात्रा के लिए स्थानीय लोगों ने विशेष वातावरण तैयार किया और माता की अगवानी की। पिछली रात गढ़ ऊपरौड़ा में विश्राम के बाद नवरात्रि की सुबह अखंड ज्योति यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण सफर शुरू हुआ। मातृशक्ति सहित ग्रामीणों ने अपने सिर पर अखंड ज्योत को धारण किया और 20 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देवपहरी पहुंचे।
परंपरागत रूप से पूरे रास्ते पर इस यात्रा का स्वागत हुआ। गोमुखी सेवा धाम परिसर में अखंड ज्योत लाने वाले समूह के स्वागत में उत्साह नजर आया। देवी भक्ति गीतों की गूंज ने यहां के पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।

हिंगलाजगढ़ में घट स्थापना और जवारा पूजन के बाद शक्तिपीठों से लाई गई अखंड ज्योत की स्थापना की गई। गोमुखी सेवा धाम में लंबे समय से हिंगलाज देवी की पूजा करते आ रहे पारस बैग और संपत बैगा के द्वारा परंपराओं की पूर्ति कराई गई। आश्विन नवरात्र पर्व पर हिंगलाजगढ़ और सिद्धीदात्री मंदिर परिसर में आयोजित अनुष्ठान का दायित्व पंडित रमाकांत पांडे और पंडित विष्णु शंकर मिश्रा ने पुरा किया।
जनजातीय समाज को बनाया यजमान
गोमुखी सेवा धाम के हिंगलाजगढ़ में इस नवरात्र पर शक्तिपीठों की अखंड ज्योति प्रतिष्ठित करने का अवसर कई मायनो में महत्वपूर्ण रहा। सर्व समावेशी और सर्वस्पर्शी अवधारणा को स्वीकृति देते हुए इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जनजाति समाज का प्रतिनिधित्व सबसे ऊपर रहा। अनुष्ठान में यजमान के तौर पर कोरवा, पंडो, बिरहोर, मंझवार, कंवर व गोंड़ समाज के प्रतिनिधि सपत्नीक शामिल हुए।














