कोरबा(खटपट न्यूज़)। जरूरतमंद लोगों के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी किया जाने वाला राशन कार्ड बनवाने के लिए भले ही नियमों का सरलीकरण किया गया है लेकिन अधीनस्थों की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना कार्यों के कारण अनेक हितग्राहियों को महीनों तक चक्कर लगाना पड़ जाता है।

करतला जनपद पंचायत के माध्यम से जिला कार्यालय में आने वाले राशन कार्ड के आवेदनों के मामले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। बताया गया कि दिसंबर माह में राशन कार्ड बनाने हेतु जनपद में आवेदन जमा किया गया था किन्तु निराकरण आज तक नहीं हो सका है। निर्धारित समय सीमा में राशन कार्ड बनकर आवेदक को प्राप्त हो जाना चाहिए था किंतु ऐसा नहीं हुआ। जनपद कार्यालय से आवेदन जिला खाद्य शाखा को प्रेषित भी हो चुका है और जनवरी माह में प्रेषित इस आवेदन पर राशन कार्ड जारी नहीं किया जा सका है। आवेदक के द्वारा संपर्क करने पर संबंधित खाद्य निरीक्षक के द्वारा कहा जा रहा है कि आपका आवेदन कहीं गुम हो गया है। अब यह समस्या आवेदक के सामने खड़ी हो गई है कि आखिर अपना राशन कार्ड कैसे बनवाए? विभागीय लापरवाही की वजह से वह 4 महीने से चक्कर पर चक्कर काट रहा है लेकिन जनपद से लेकर जिला मुख्यालय तक के बीच कहीं ना कहीं अप्रत्यक्ष लाभ की प्रत्याशा में राशन कार्ड बनाने हेतु आवेदन का निराकरण नहीं होना आवेदक के लिए कस्टप्रद साबित हो रहा है। उस पर जिम्मेदार कर्मी के द्वारा यह कहा जाना कि आवेदन कहीं खो गया है, यह गैर जिम्मेदाराना है। यदि आवेदन के गुम होने में सत्यता है तो क्या सिर्फ एक ही आवेदन गुम हुआ है या फिर ऐसे कई आवेदन खो हो गए हैं ? क्या यह एक बड़ी वजह है जिससे राशन कार्ड के आवेदन लंबित रहते हैं, या फिर कुछ खर्चा-पानी हासिल करने की मंशा से इस तरह की बहाने बाजी की जाती है! वैसे बता दें कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन संबंधी राशन कार्ड बनाकर जारी करने के एवज में न्यूनतम 2000 से 3000 रुपये का चढ़ावा मध्यस्थों द्वारा खाद्य विभाग में देने के नाम पर लिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जनपद कार्यालय हों या नगरीय क्षेत्रों के लिए नगर निगम/नगर पालिका या नगर पंचायत के दफ्तर, जमा आवेदन खाद्य विभाग में पहुंचकर निराकृत होते हैं और ऐसे में सारा भेंट-चढ़ावा कागजों को आगे बढ़ाने से लेकर पीडीएफ निकालने तक के एवज में यहां से वहां तक लिया जाता है।
करतला जनपद के मामले में आवेदक को इस बात की आशंका है कि उसके राशन कार्ड को इसलिए नहीं बनाया गया क्योंकि उसने चढ़ावा नहीं दिया है वरना एकमात्र उसका आवेदन गुम हो जाना आश्चर्य से कम नहीं। इस आवेदक ने अपना नाम इसलिए सामने नहीं लाना चाहा है ताकि उससे किसी तरह की दुर्भावना ना रखी जाए। उसने अपेक्षा जताई है कि शासन-प्रशासन की मंशा अनुरूप उसे बार-बार घुमाया ना जाए और आवेदन पर कार्रवाई करते हुए राशन कार्ड जारी किया जाए।















