0 मानव-हाथी द्वंद की समस्या का स्थाई हल निकलेगा, सार्थक व ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरबा जिले में प्रस्तावित नकिया हाथी अभ्यारण्य का कोर एरिया बढ़ाकर 450 वर्ग किलोमीटर से 3827 वर्ग किलोमीटर करने का निर्णय सरकार ने लिया है। इसके साथ ही धारा 36 ए के तहत गठन भी किया है जिससे क्षेत्रवासियों को विस्थापन की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा और रहवासियों को वन से मिलने वाले विभिन्न प्रकार के उत्पादों से वंचित नहीं होना पड़ेगा। सरकार के इस प्रयास से दशकों से चली आ रही मानव-हाथी द्वंद की समस्या का स्थाई हल निकलेगा। इसके लिए स्वयंसेवी संस्था सार्थक के सचिव लक्ष्मी चौहान ने प्रभावित क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को धन्यवाद प्रेषित किया है।
0 वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम धारा 36 (ए) के तहत फायदे

सार्थक के सचिव लक्ष्मी चौहान ने इसके फायदे बताए हैं कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 में 3 ऐसे प्रावधान हैं जिसके तहत राज्य सरकार किसी वन्य प्राणी क्षेत्र को संरक्षित कर सकती है। यह प्रावधान राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण और संरक्षण रिजर्व बनाने से संबंधित है। राष्ट्रीय उद्यान या अभ्यारण बनाने में भविष्य में वनवासियों के विस्थापन का खतरा होता है, जबकि 2003 संशोधन के आधार पर आई धारा 36 (ए) के तहत समस्त शासकीय भूमि को अधिसूचित कर वृहद क्षेत्र को संरक्षण रिजर्व बनाने से वनवासियों के लिये कभी विस्थापन का खतरा नहीं होता और ना ही वन क्षेत्र में उनके निजी या सामुदायिक अधिकार प्रभावित होते हैं। लघु वन उपज के संग्रहण में भी कोई रोक नहीं लगती अर्थात् हाथी रिजर्व क्षेत्र के अंदर पड़ने वाले गांवों के निवासियों के खेत मकान या आजिविका पर कोई भी विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कुछ राज्यों ने जो हाथी रिजर्व बनाए हैं, उन्हें कोई कानूनी संरक्षण इसलिए नहीं है क्योंकि उनका गठन वन्य प्राणी अधिनियम 1972 के तहत राज्य के द्वारा ना किया जाकर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक तौर पर किया गया है। लेमरू के 450 वर्ग किलोमीटर की प्रशासनिक स्वीकृति इसी के तहत थी। आज अगर छत्तीसगढ़ हाथी रिजर्व क्षेत्र को 450 वर्ग किमी को बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगा तो संभव है कि वहां मामला लटक जाए। इसलिए यह सबसे उपयुक्त है कि छत्तीसगढ़ हाथी रिजर्व का गठन धारा 36 (ए) के तहत करे।















