साहब! यहां राख से तालाब पाट दिए,श्मशानघाट भी नहीं बख्शे और आप सड़क व खेत की बात कर रहे हैं…

0 खामोशी का भरपूर फायदा उठा रहे मनरेगा तालाब के गुनाहगार
0 शिकायतें हुईं भी तो मतलब के लिए, फिर गायब हो गए

मनरेगा तालाब की तत्कालीन फोटो जिसका अब अस्तित्व मिटा दिया गया

कोरबा (खटपट न्यूज)। ऊर्जा की नगरी कोरबा में राखड़ पर चहुंओर हल्ला है। बीच सड़क पर राख गिरने से बवाल मचता है, किसान के खेत में राख पाट दी जाती है तो खामोश रहते हैं। मनरेगा से निर्मित तालाब का लाभ ग्रामीणों को मिलना शुरू होने से पहले ही उसे राखड़ पाटकर दफन कर दिया जाता है और नामोनिशान तक मिटा दिए जाते हैं लेकिन कहीं भी शोर नहीं होता। मुर्दों का स्थल भी राखमय कर दिया गया है। स्कूल के आसपास राख पाटी गई है जिसके उड़ने से लोग हलाकान होते हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को झांकने की फुर्सत नहीं, कार्यवाही तो दूर की बात। इस मुद्दे पर न तो तत्कालीन कलेक्टर ने संज्ञान लिया और न ही वर्तमान कलेक्टर ले रहे हैं।

निरीक्षण के लिए तालाब के ऊपर मौजूद जांच दल की फाइल फोटो

मामला कोरबा जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरीडीह का है। यहां मनरेगा योजना से लगभग 13 लाख की लागत से तालाब का निर्माण धनवारपारा में कराया गया। वर्ष 2016-17 में 12 लाख 82 हजार 700 रुपए की लागत से निर्मित कराए गए तालाब का लाभ किसी भी ग्रामीण को नहीं मिल सका और इससे पहले कि यह तालाब ग्रामीणों को विभिन्न तरीके से शासन की योजनाओं के अंतर्गत शामिल होकर लाभ दे पाता, राखड़ के दलालों ने इसे संयंत्र की राख से पटवा दिया। यह मामला इसी साल अप्रैल माह में उजागर हुआ और खटपट न्यूज ने इसे प्रमुखता से शासन-प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों के ध्यानाकर्षण में लाया। मामला सामने आते ही दो अलग-अलग टीम से जांच कराई गई जिन्होंने तालाब को राख से पाटना पाया और जांच प्रतिवेदन जिला सीईओ नूतन कंवर को सौंप दिया। जांच के वक्त राख के ऊपर मिट्टी पाटी जा रही थी लेकिन इसे भी रोकना मुनासिब नहीं समझा गया और कुछ दिन बाद तालाब की शिला-पट्टिका को उखाड़कर तोड़फोड़ कर नामोनिशान तक मिटा दिया गया। जांच के बाद फाईल को अधिकारी दबाकर बैठ गए हैं। हालांकि पूर्व वित्त आयोग के अध्यक्ष विरेन्द्र पांडेय ने इस मामले की शिकायत की लेकिन वे शिकायत के बाद पूरी तरह शांत बैठ गए, इसकी वजह वे ही जानें। दूसरी तरफ क्षेत्र के विधायक ननकीराम कंवर, उनके प्रतिनिधि, सांसद प्रतिनिधि, क्षेत्र के जिला व जनपद सदस्य, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, मनरेगा कर्मी से लेकर जिला स्तर के अधिकारी और क्षेत्र में विपक्ष की भूमिका निभा रहे जनप्रतिनिधि इस मामले में पूरी तरह से रहस्यमयपूर्वक खामोश हैं। बरीडीह में न सिर्फ मनरेगा के पैसे का दुरुपयोग हुआ बल्कि आने वाले दिनों में यदि तालाब की आवश्यकता हुई तो फिर से खोदवाने के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे जो सरकारी धन का दुरुपयोग ही होगा। यहां कई टन राख पाटने वाले ठेकेदार को बचाने की पूरी कवायद में जिला स्तर के अधिकारी भी लगे हुए हैं। ठेकेदार को सुप्रीम कोर्ट, मनरेगा के नियमों और कलेक्टर के निर्देशों से ऊपर रख दिया गया है।
0 श्मशानघाट को भी नहीं बख्शा

करतला ब्लाक के ग्राम जर्वे के श्मशानघाट को भी राखड़ के दलालों ने नहीं बख्शा है। यहां श्मशानघाट में कब्रों तक राखड़ पाट दिया गया है। मुक्तिधाम में आने वाले ग्रामीणों को गहरे शोक के वक्त भी राखड़ से दो-चार होना पड़ता है। अंतिम संस्कार के लिए पहले राख हटानी पड़ती है फिर आगे की प्रक्रिया पूरी हो पाती है। यह मामला पहले भी संज्ञान में लाया गया लेकिन आज तक न तो राख हटवाई गई और न ही इसके ऊपर मिट्टी पटवाया जा सका है। नि:संदेह ग्रामीण स्तर पर भी उदासीनता बरती जा रही है।
गौरतलब है कि कलेक्टर संजीव झा के द्वारा बैठक लेकर राखड़ की उपयोगिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राखड़ को सड़क पर, किसानों के खेत में न फेंका जाए। राखड़ के परिवहन से लेकर निस्तारण में पूरी सावधानी बरती जाए ताकि जनस्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव न पड़े। सड़क और खेत पर राखड़ को लेकर तल्ख कलेक्टर की जानकारी में बरीडीह का मामला लाया नहीं जा रहा है।
0 अवैध रेत के गड्ढों ने ली जान तो रचा सारा खेल
यह बात सामने आई कि गांव में एक जनप्रतिनिधि के संरक्षण में अवैध रेत खोदने के कारण 3-4 बड़े-बड़े डबरीनुमा गड्ढे थे जिन्हें हादसों के मद्देनजर पटवाने के लिए 29 जनवरी 2021 को ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराया गया था। इसी आधार पर तत्कालीन एसडीएम सुनील नायक एवं क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल अधिकारी द्वारा पंचायत भवन के आसपास एवं धनवारपारा के गड्ढों को पाटने की अनुमति 17 जुलाई 2021 को दी गई थी। इस कथित अनुमति का अपने अनुसार दुरुपयोग कर व सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करते हुए ग्राम पंचायत ने मनरेगा निर्मित तालाब को ही पटवा दिया। सरपंच-सचिव ने जानते हुए भी नियमों का उल्लंघन किया है।

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