0 रेंजर का कहना- चाहे कितना बड़ा स्ट्रक्चर क्यों ना हो मिक्सर मशीन व वाईब्रेटर मशीन ज़रूरी नहीं!
कोरबा-कटघोरा(खटपट न्यूज़)। एक चर्चित कहावत है-फोकट का चंदन घिस भाई नंदन। इस कहावत को कटघोरा वन मंडल बहुत ही ज्यादा चरितार्थ कर रहा है। सरकार और कैम्पा मद मिलने वाली भारी-भरकम राशि को फोकट का चंदन की तरह मनमाने तरीके से उपयोग किया जा रहा है। सरकार को तो यह भनक तक नहीं लगने दिया जा रहा है कि उसके रुपए किस कदर दुरुपयोग हो रहे हैं। यूँ तो कटघोरा वनमंडल पिछले सालों से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से गहरा नाता बनाकर सुर्खियाँ बटोर रहा है वहीं तकनीकी मामलों में खुद ही विशेषज्ञ और जानकार बने बैठे हैं। हैरान कर देने वाला बयान देने से भी रेन्जर नहीं चूकते। इनका कहना है कि कितना ही बड़ा स्ट्रक्चर क्यों ना हो फ़ारेस्ट के काम में मिक्चर मशीन और वाईब्रेटर मशीन का कोई काम नहीं होता। सब मज़दूरों से किया जा सकता है और चैतमा रेंज में हुए स्टाप डेम के काम को बिना मिक्चर मशीन और वाईब्रेटर मशीन उपयोग किए कराया है। दूसरे रेन्जों में भी कुछ ऐसी ही कहानी है।

दूसरी तरफ तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना मिक्चर मशीन और वाईब्रेटर मशीन उपयोग किये कराए गए 1:2:4 के अनुपात का कांक्रीट गुणवत्ताहीन है और उसकी लाईफ़ कुछ ज्यादा नहीं रहती है । ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के एसओआर में कांक्रीट या अन्य कार्यों के मूल दर के अलावा मज़दूरी दर अलग से उल्लेख है और उस मज़दूरी दर में सिर्फ़ मज़दूरों का ही भुगतान किया जा सकता है ना कि किसी प्रकार की मशीनरी का। जैसे कि कांक्रीट का दर 3913.90 रुपए प्रति घन मीटर है और उसमें 839.30 रुपए मज़दूरी दर दिया है तो शेष 3074.60 रुपए में सीमेंट ,रेत , गिट्टी के अतिरिक्त मिक्चर मशीन , वाईब्रेटर मशीन और डीज़ल पम्प का दर भी शामिल होता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार मिक्चर मशीन और वाईब्रेटर मशीन के बिना किए गए कांक्रीट अपने आप में ग़लत और गुणवत्ताहीन है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ऐसे काम का बिल बनाना तथा बिल पास करना वसूली योग्य होता है।
ग़ौरतलब है कि वर्तमान में चैतमा रेंज में कई स्टाप डेम का कार्य प्रगति पर है, केंदई में भी काम हुआ और देयक का भुगतान भी हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि कार्य को रेंजर की देखरेख में अघोषित ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। कार्य में भले ही मिक्चर मशीन का प्रयोग किया जा रहा हो लेकिन बिल व्हाउचर में कांक्रीट मिक्सिंग मज़दूरों से कराया जाना बताया जा रहा है जो प्रक्रिया से हट कर और ग़लत है। रेंजर द्वारा गैर तकनीकी भाषा में यह बयान दिया जा रहा है कि काम पूरी गुणवत्ता को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है परंतु मिक्शर मशीन और वाईब्रेटर मशीन के बिना हेंडमिक्सिंग से। रेंजर का यह बयान अपने आप में हास्यास्पद है। एक स्टाप डेम में तो बिना खुदाई किए ज़मीन की सतह पर ही बेस डालकर स्ट्रक्चर तैयार कर दिया गया और सूत्र बताते हैं कि केंदई और चैतमा रेंज के ऐसे कार्यों का वनमण्डल से त्वरित भुगतान भी हो जाता है। लगभग 50-50 लाख के ऐसे स्टाप डेम के कार्य और इस तरह के भुगतान में तकनीकी प्रक्रिया को ताक पर रख दिया गया है। उच्चाधिकारियों को तकनीकी मार्गदर्शन लेकर तत्काल संज्ञान में लेते हुए जन व सरकार हित में कार्यवाही करना चाहिये ताकि भ्रष्टाचार और शासन के पैसों की बर्बादी पर रोक लग सके।
00 सत्या पाल 00 (7999281136)















