रेत चोरों से कुछ बचे तो निगम को मिले,घाट चलाने पर बनी है सहमति

0 शहर में हो रही रेत चोरी,ग्रामीण क्षेत्र में पकड़े 6 ट्रैक्टर
0 सरकारी संपत्ति की सुरक्षा/संरक्षण में विभाग को रुचि नहीं


कोरबा(खटपट न्यूज़)। कलेक्टर संजीव कुमार झा द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत खनिज विभाग द्वारा अवैध रेत परिवहन में कार्यवाही करते हुए कुल 6 ट्रेक्टर को जब्त किया गया। कार्यवाही में कनवेरी से 1 ट्रैक्टर ( CG 12 BD 3137) , बगदर से 5 ट्रेक्टर ( CG 12 U 1765 तथा 2 Mahindra sold , 2 Sonalika sold) को पकड़कर उरगा नाका में अभिरक्षा में रखा गया है। खनिज अधिनियम के तहत आगे की कार्यवाही की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा बताया गया कि अवैध रेत परिवहन पर यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी।
अब दूसरी तरफ कार्यवाही की जमीनी हकीकत यही है कि सरकारी संपत्ति खनिज की सुरक्षा/संरक्षण में विभाग को खास रुचि नहीं नहीं है। कार्यवाही उन्हीं अवैध मामलों में होती है जिसमें या तो वे स्वयं चाहें या फिर कलेक्टर का निर्देश हो,वरना जिला मुख्यालय में ही दिन दहाड़े रेत का अवैध खनन और परिवहन लगातार हो रहा है। आधिकारिक तौर पर गैर आबंटित व बन्द पड़े मोतीसागर पारा सीतामणी घाट इसका ज्वलन्त उदाहरण है। इस क्षेत्र में लगे सीसी कैमरे से इसकी पुष्टि कलेक्टर चाहें तो करवा सकते हैं बशर्ते कैमरे इस निकासी व परिवहन मार्ग में लगे हों, रिकार्ड डिलीट न कराया गया हो। इसी तरह बरमपुर का भी इलाका रेत चोरी में संलिप्त है।
सीतामणी से रेत इस कदर चोरी हो रही है कि आने वाले दिनों में जब निगम इसे अपने हाथ में लेगा, तब उसके लिए कुछ बचेगा भी या नहीं,इस पर संशय उत्पन्न होने लगा है। यह कहने में गुरेज नहीं कि खनिज अमला रेत जैसी कीमती किंतु सहज ही मिल जाने वाले खनिज की चोरी रोक पाने में बिल्कुल नाकाम है। इस मामले में वह पुलिस प्रशासन की भी मदद नहीं ले रहा और रेत चोरी पकड़कर एफआईआर कराने से बच रहा है। विडम्बना है कि खनिज अधिकारी और उनके इंस्पेक्टर अमले की कमी का रोना रोते हैं लेकिन पुलिस की मदद लेना जरूरी नहीं समझते। पुलिस के अधिकारी और टीआई भी अपने हाथ खींचे हुए हैं कि यह हमारा काम नहीं है। यह और बात है कि पिछले समय सीएम के फरमान के बाद पुलिस वाले बिना तकनीकी जानकारी के ही रेत पकड़ने उतर जाया करते थे व दो एफआईआर भी दर्ज की गई। अनेक थाना-चौकी प्रभारियों की सहमति से अभी रेत की चोरियां बढ़ी हैं,इसमें कोई संदेह नहीं। जिनके हाथ में कानून है,वही अनदेखी करेगा तो मनोबल बढ़ना तय है।

सीधी सी बात है कि बन्द और गैर आबंटित घाट से रेत का खनन और परिवहन रोकने की पूरी जिम्मेदारी खनिज अमले की है,दूसरा विभाग क्या करेगा ! साहब की चोरों पर दरियादिली के किस्से अब आम होने लगे हैं फिर विभाग के दो लोग यह तय कर रहे हैं कि किस पर कार्यवाही करना है और किसे बख्शना है। इधर नदियों से बेतरतीब अवैध रेत दोहन से होने वाले नुकसान की सुध लेने पर्यावरण विभाग को भी फुर्सत नहीं है जबकि हसदेव और अहिरन नदी को नुकसान रेत के चोर पहुंचा रहे हैं।

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