0 एटक महामंत्री हरिद्वार सिंह ने दी जानकारी, किया लगातार प्रयास
कोरबा/बिलासपुर (खटपट न्यूज़)। एसईसीएल में फर्जी नौकरी के कारण बर्खास्त कर्मचारियों को उनके बकाया राशियों का भुगतान होगा। एसईसीएल एटक के महामंत्री एवं एसईसीएल संचालन समिति के सदस्य कामरेड हरिद्वार सिंह ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि फर्जी नौकरी करने के शिकायतों के आधार पर सिर्फ चिरिमिरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ो कर्मचारियों को एसईसीएल प्रबंधन द्वारा कंपनी की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उन कर्मचारियों को पीएफ, ग्रेजुटी, पेंशन आदि का भुगतान भी नहीं किया गया है लेकिन अब उपरोक्त बकाया राशियों का भुगतान करने हेतु आदेश महाप्रबंधक (कार्मिक/प्रशासन) एसईसीएल बिलासपुर के द्वारा जारी कर दिया गया है। अब उन समस्त बर्खास्त कर्मचारियों को उनके बकाया राशियों का भुगतान होगा।
कामरेड हरिद्वार सिंह ने बताया है कि एसईसीएल संचालन समिति की दिनांक 9 जनवरी 2021 को मैनपाट, अंबिकापुर में हुई बैठक में संचालन समिति के सदस्यों द्वारा फर्जी शिकायतों के आधार पर बर्खास्त किए कर्मचारियों के मुद्दे एवम उनके बकाया भुगतान को प्रमुखता से उठाया गया जिस पर विस्तृत चर्चा हुई। एटक यूनियन ने प्राथमिकता के साथ इस मुद्दे को उठाया। अंततः सहमति बनी कि हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कानूनी सलाह लेकर बर्खास्त कर्मचारियों के बकाया राशि का भुगतान करने हेतु ठोस कार्रवाई किया जायेगा। इसके पूर्व भी संचालन समिति की कई बैठकों में इस मुद्दे पर कई बार चर्चा हुई। तथा यूनियन द्वारा भी लगातार क्षेत्र से लेकर कंपनी तक समस्त आईआर बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया और इस पर चर्चा हुई। विगत 3,4 वर्षों में यूनियन की जो भी बैठकें प्रबंधन के साथ हुई हैं उसमे हमेशा ही दो प्रमुख मुद्दे रहे हैं पहला ठेका मजदूर एवं दूसरा फर्जी शिकायत का मामला।
हरिद्वार सिंह ने स्वयं सीवीसी, नई दिल्ली, एसईसीएल बिलासपु के सीएमडी, डीपी, सीवीओ, आदि को कई बार इस संबंध में पत्र लिख कर मांग किया है- पत्र क्रमांक-134 दिनांक 16.01.2018, 212 दिनांक 19.09.2019, 274 दिनांक 22.06.2020, इसके अतिरिक्त कोयला मंत्री के एसईसीएल प्रवास के दौरान पत्र कोयला मंत्री को प्रेषित पत्र क्रमांक 162 दिनांक 24.09.2018 के द्वारा मांग किया। मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी ऋषि कुमार जब सीबीआई के डायरेक्टर बने तब दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में अपने व्यक्तिगत संबंधों के चलते श्री सिंह ने स्वयं मुलाकात कर इस मुद्दे को उनके समक्ष रखा और विस्तृत चर्चा भी हुई।
श्री सिंह ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि अन्य लोगों ने इस मुद्दे को उठाया है लेकिन इस मुद्दे के समाधान में मुख्य भूमिका एसईसीएल संचालन समिति की रही। यूनियन की रही। यूनियन एवं मजदूरों के दबाव से ही यह संभव हुआ है। यह कोयला मजदूरों की जीत है।
इस निर्णय से एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ो कर्मचारी जो बर्खास्त हो चुके हैं एवं लगभग 800 कर्मचारी जिनका प्रकरण प्रबंधन के पास लंबित हैं, सभी को लाभ मिलेगा और कोयला क्षेत्रों में दलाली करने वाले, ब्लैकमेल करने वाले जिनका कोई आधार नहीं है, और जो इसे अपना व्यापार बना चुके हैं, ऐसे लोगों का व्यापार बंद हो जायेगा जो कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर धन उगाही कर रहे हैं।















