0 नाली के किनारे तो नाली के बीच खड़ा कराया बिजली का खम्भा, कालोनी निर्माण पर कैसी निगरानी..?

कोरबा (खटपट न्यूज)। दर्री क्षेत्रांतर्गत बसाई गई पुष्प पल्लव आवासीय कालोनी फेस-4 के रहवासियों को बिजली के कमजोर हो खंभे के गिरने और यदि ऐसा हुआ तो हाईटेंशन तार के भी टूट जाने से होने वाले हादसे की कल्पना कर जान-माल के नुकसान का भय सता रहा है। कालोनी के निर्माण और निर्माण के दौरान आवश्यक निगरानी के अभाव में इस तरह की समस्या उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
रहवासियों के बताए अनुसार यह कालोनी नगर पालिक निगम को हैंडओवर नहीं होने से कई तरह की व्यवस्थाएं बिल्डर के जिम्मे हैं। यहां के लोग बिजली की मूलभूत सुविधा से भी जूझ रहे हैं। सड़क रौशनी की माकूल व्यवस्था न होने से अंधेरा रहता है वहीं 11 केवी तार युक्त बिजली का खंभा नाली के किनारे ही खड़ा कर दिया गया है। कालोनी में जय अम्बे टेंट हाउस के पास कमजोर कांक्रीट के सहारे खड़ा यह खंभा जमीन का साथ छोड़ता जा रहा है और कभी भी गिर सकता है। इस खंभे को थामने के लिए सड़क के दूसरी ओर स्थित खंभे से इसे रस्सी से बांधकर सहारा देने का काम बिल्डर ने किया। फिर एक ही खंभे में 11 केवी व 220 केवी लाइन का तार खींचा गया है।

नींव से कमजोर हुए खंभे को रस्सी बांधकर दूसरे खंभे का सहारा दिए जाने की खबर जब “खटपट न्यूज” ने प्रसारित की तो इसके अगले दूसरे दिन बिल्डर ने रस्सी को खुलवा दिया। बताया गया कि रस्सी तो खुल गई किंतु खंभे की कमजोरी दूर करने कोई जतन नहीं किया। फलतः नाली के किनारे उसी कमजोर/क्षतिग्रस्त नींव पर खम्भा भगवान भरोसे खड़ा है। अब कालोनी के लोगों ने यह नजारा देखा तो वे भी बिल्डर की गजब व्यवस्था को देख कर सोच में पड़ गए कि खंभे की नींव को मजबूत करने कांक्रीटीकरण क्यों नहीं कराया गया? आखिर खतरा तो यथावत है।
0 खम्भा पहले खड़ा किया या नाली पहले बनाया…!

इसी कालोनी से एक और तस्वीर सामने आई है जिसमें बिजली का खम्भा नाली के बीच में ही स्थापित करा दिया गया है। लगभग पूरी कालोनी में ऐसा है। अब या तो नाली पहले बनी या खम्भा पहले खड़ा किया गया, लेकिन दोनों ही सूरतों में जो भी हुआ है/हो रहा है, उसे कालोनीवासी अनुचित ठहरा रहे हैं। कालोनीवासियों ने कालोनी विकास पर निगरानी रखने वाले विभागीय अफसरों की भी कार्यशैली को सवालों के घेरे में रखा है और बिल्डर की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। विद्युत खम्भे, ट्रांसफार्मर स्थापना आदि विद्युत संबंधी कार्य सही ढंग से नियमों के अनुसार हो रहे हैं या नहीं, यह देखना विद्युत विभाग का काम है। इसी तरह निगम क्षेत्र में निर्माण होने से कालोनी के नियम पूर्वक निर्माण की भी जवाबदारी उसकी बनती है पर दोनों ही विभाग मूकदर्शक हैं।
अब देखना यह है कि इस तरह की अव्यवस्था पर कौन, कितना, किस तरह और कब तक संज्ञान लेता है? फिलहाल फेस 4 के लोग तो खम्भा गिरने और कोई अनहोनी होने की आशंका से डर-डर कर रह रहे हैं।
















