Friday, March 27, 2026
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मोहित का मोहभंग या फिर सीएम से करेंगे शिकायत…? डीएफओ शमा फारुखी की वनमंत्री से शिकायत के एक माह बाद भी कार्यवाही न तबादला….!

कोरबा-कटघोरा(खटपट न्यूज़)। कटघोरा वनमण्डल में वन्यप्राणियों की मौत, हाथियों के हमले से हो रहे जन-धन के नुकसान और निर्माण कार्यो में अनियमितता के अलावा कई अन्य आरोपों का सामना कर रही वनमण्डल कटघोरा की डीएफओ (आईएफएस) शमां फ़ारूक़ी के संबंध में पाली-तानाखार विधायक और कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहितराम केरकेट्टा ने भारी-भरकम शिकायत की है।

विधायक ने सूबे के वन मंत्री मो. अकबर को शमां फ़ारूक़ी के आरोपों की पूरी फेहरिस्त 10 नवम्बर 2020 सौंपी और डीएफओ के तत्काल तबादले की पुरजोर मांग की। इस पत्र के बाद दिसम्बर माह में वन अधिकारियों की जारी तबादला सूची में फारुखी का नाम नहीं था। इससे सवाल अब भी कायम है कि क्या वाकई में कांग्रेस की सरकार में कांग्रेस के ही विधायक/जनप्रतिनिधि की बातों/शिकायतों को तवज्जो नहीं मिल रही या फिर कारण कुछ और है? क्या यह शिकायत पत्र महज किसी तरह का दबाव बनाने के लिए लिखा गया था जो काम हो जाने के बाद सिर्फ मजमून बन कर रह गया है? जनता के सामने जनता के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधि का यह दोहरा चरित्र है, यदि हाँ तो यह अनुचित है और यदि नहीं, तो फिर शिकायत पत्र लिखने के बाद विधायक खामोश क्यों हैं जबकि वन अधिकारियों के तबादले भी हो गए और कटघोरा वन मंडल में ही हाथियों से 3 मौतें भी इस अंतराल में हो गईं। विधायक ने दो बार घटनास्थल गांव का दौरा भी किया पर वह तल्खी और व्यवस्था के प्रति नाराजगी नजर नहीं आई, इसके मायने भी लोग तलाश रहे हैं। क्या मोहितराम का शिकायत से मोह भंग हो गया है या वे सीएम के कोरबा प्रवास का इंतजार पुनः शिकायत के लिए कर रहे हैं? वैसे भी जिले के लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि क्या अब भाजपा विधायक ननकीराम कंवर के पास ही जाना पड़ेगा, जो जनहित के लिए अपनी ही सरकार से लड़ पड़ते रहे हैं?
0 जनप्रतिनिधि भी हैं परेशान

शिकायत पत्र में विधायक मोहितराम केरकेट्टा ने साफ तौर पर बताया है कि कटघोरा वनमण्डल अधिकारी के कामकाज के तौर-तरीकों से जनप्रतिनिधि भी बेहद परेशान हैं लिहाजा डीएफओ का स्थानान्तरण करते हुए उनके पूरे कार्यकाल की सूक्ष्मता से जांच कराई जाए। श्री केरकेट्टा के लगाए आरोपों में ज्यादातर वनमण्डल अंतर्गत मजदूरी के लंबित भुगतान से जुड़े हुए हैं। साथ ही कैम्पा मद के तहत निर्माण में भर्राशाही का आरोप भी है। हालांकि इस पत्र के वास्तविकता की पुष्टि हम नहीं करते बावजूद अपनी ही सरकार में एक मौजूदा विधायक ने भारतीय वन सेवा के अफसर पर जिस तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं वह कई तरह के सवाल खड़े करता है।
0 वन मंत्रालय मेहरबान

खटपट न्यूज के अनुसार कटघोरा वनमण्डल में पदस्थ शमां फ़ारूक़ी अपनी पदस्थापना के दौरान ही आईएफ़एस अवार्ड हुई थीं जिसके बाद उन्हें कटघोरा वनमंडल का पूर्ण प्रभार सौंप दिया गया था। बता दें कि शमां फ़ारूक़ी शुरू से अपने कामकाज के तरीकों को लेकर जनप्रतिनिधि और मीडिया के निशाने पर रही हैं। उन पर ना सिर्फ निर्माण कार्यो में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे बल्कि मजदूरों के भुगतान और मातहत रेंजरों की मनमानी की खबरें भी सामने आती रही है. उनके ही कार्यकाल में अब तक तीन हाथियों, एक तेंदुए की मौत भी हो चुकी है बावजूद प्रदेश का वन मंत्रालय उन पर पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है। चूंकि अब खुद सत्तासीन विधायक ने उन पर गंभीर आरोप मढ़े हैं लिहाजा विपक्ष को भी एक नया मुद्दा मिल गया है।

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