Friday, March 27, 2026
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भू-विस्थापितों को भ्रमित कर रहा एसईसीएल, स्वीकृति को रोजगार देने का आदेश प्रचारित करा रहा…

कोरबा(खटपट न्यूज़)। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति के जिला कोर कमेटी मेम्बर गजेंद्र सिंह ठाकुर ने एसईसीएल प्रबंधन द्वारा भू-विस्थापितो को गुमराह करने का आरोप लगाया है ।
उन्होंने जारी बयान में कहा है कि वर्ष 1996 में कुसमुंडा परियोजना के लिए अर्जित भूमि के बदले नौकरी के लिए विभिन्न कारणों का हवाला देकर रोजगार प्रदान करने में बहानेबाजी किया जाता रहा है जिसके कारण यहां के भू-विस्थापितो ने एक-दो माह के अंतराल में कई बार खदान का उत्पादन ठप कर विरोध जताया और कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है। प्रबंधन ने परेशान होकर मई महीने 5 लोंगो का प्रपोजल बनाकर एसईसीएल मुख्यालय भेजा था। बोर्ड ने जून महीने की बैठक में स्वीकृत किया था और 17 जुलाई 2021 को महाप्रबंधक कुसमुंडा को कार्यालयीन आदेश जारी कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रबंधन द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि 5 खातेदारों को रोजगार मिल गया है जबकि पत्र में भू-राजस्व विभाग द्वारा कार्मिक विभाग को विधिवत अग्रिम कार्यवाही के लिए निर्देशित किया है जिसमें अभी कई अड़चने शेष हैं जिसके लिए भू-विस्तापित परिवारों को सँघर्ष करना पड़ेगा ।

गजेंद्र सिंह

उन्होंने बताया कि हमने अपने संगठन ऊर्जाधानी भुविस्थापित किसान कल्याण समिति के माध्यम से पुराने रोजगार के लंबित मामलों पर हर स्तर पर आवाज उठाई थी। लंबित रोजगार के मामलों सहित 15 सूत्रीय मांगों पर विगत 8 जून को 8 घण्टे तक दीपका खदान को पूरी तरह से ठप्प करने के बाद 30 जून 2021 को आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता में एसईसीएल मुख्यालय के अधिकारियों के साथ साढ़े 5 घण्टे की मैराथन बैठक में केवल लंबित रोजगार के मामले पर डेढ़ घण्टे तक लंबी चर्चा किया गया था जिसमे एक माह के भीतर लंबित रोजगार के मामले पर कार्यवाही होने का आश्वसन दिया गया था। अभी जारी निर्देश को क्षेत्रीय प्रबंधन रोजगार उपलब्ध कराना बताकर गुमराह कर रहा है। यह ऊर्जाधानी सन्गठन को कमजोर करने के लिए व अन्य सन्गठन को सामने करके भ्रामक जानकारी फैलाने का कार्य कर रही है जिसकी कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने भूविस्थापितो को किसी भी दलालों के झांसे में नही आने की अपील की है । अन्यथा भू- विस्थापितो का आंदोलन कमजोर होने का फायदा उठाकर प्रबंधन अपनी मनमानी करता रहेगा।
0 श्रेय लेने वालों का कोई भी योगदान नहीं मेरे आंदोलन में : निरूपा
एसईसीएल कुसमुंडा में वर्ष 1996 में भूमि अर्जन के बाद 25 वर्षो तक अपने रोजगार के लिए संघर्ष करते हुए नौकरी के लिए स्वीकृति मिलने के बाद प्रसारित समाचार से आहत निरूपा कंवर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने सँघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा है कि कुछ लोग श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं कि उनके आंदोलन से मुझे नौकरी मिलने जा रही है ,जबकि उनका कुछ भी योगदान नहीं है ।

परिवार के साथ निरूपा

उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में ग्राम बरकुटा में उसके पिता धजाराम के नाम की 5. 52 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। वर्ष 1996 से 4 बार अलग-अलग समय मे नौकरी के लिए नामांकन जमा करवाए गए । 10 फरवरी 2014 को एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा बिना सूचना जारी किए मेरे साथ ही अन्य 17 लोंगो की मकान पर बुलडोजर चला दिए गये। 7 मई 2015 को एसईसीएल प्रबंधन के मुख्य महाप्रबंधक यूके सिंह के साथ जनपद सदस्य रूकमणी कंवर , ब्रजेश श्रीवास और अन्य लोंगो की मौजूदगी में समझौता कराया गया था । मकान ढहाए जाने के खिलाफ कोर्ट में नामजद परिवाद भी दायर किया था ।7 मई 2015 को समझौता होने के बाद से नौकरी की मांग पर लगातार झूझना पड़ रहा है । हमारे घर मे देखभाल करने वाला कोई नही था । 100 साल की बूढ़ी माँ , मानसिक रूप से विकलांग भाई , और परित्यक्ता बहन को लेकर लगातार सँघर्ष करने के विवश हो गयी थी इसलिए अपने ससुराल को छोड़कर मायके में रहने लग गयी थी और रोजी मंजूरी करके सबका भरण पोषण कर रही हूं । पुरखो की जमीन के बदले नौकरी नही मिलने और जमीन खरीदकर छोटे रकबे वाले का नौकरी लग जाने से आहत थी ।
0 ऊर्जाधानी संगठन ने उठाई मांग
महिला खातेदारों की रोजगार की मांग को उर्जाधानी भुविस्थापित सन्गठन द्वारा 07 सितंबर 2019 को जिला प्रशासन की मीटिंग में उठाये जाने पर कुसमुंडा जीएम पी रंजन शाह ने महिलाओं को पात्रता नही होने की जानकारी दी । राजस्व शिविर में भी इसकी शिकायत करने पर राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के अधकारियों को फटकार लगाई थी किन्तु एसईसीएल द्वारा घुमाया जाता रहा । भुविस्थापित सन्गठन के बृजेश श्रीवास और उनके साथियों के सहयोग से कई बार खदान में काम बन्द कर विरोध भी किया ।
0 अफवाह के कारण खदान में किया विरोध, नियुक्ति पत्र नहीं मिला
निरूपा कंवर ने बताया कि मई 2021 को कुसमुंडा प्रबंधन ने हमारे बीच के 5 लोंगो का फाइल कार्यवाही के लिए भेजा था जिसपर PAP बोर्ड ने जून महीने में स्वीकृति प्रदान कर दी और 17 जुलाई को स्वीकृति आदेश जारी किया था। उसमें मेरे जमीन में किसी अन्य को नौकरी दी जा रही है ऐसा अफवाह सुनने पर 21 जुलाई को खदान में परिवार सहित विरोध के लिए गए थे । अभी भी बोर्ड द्वारा स्वीकृति को नौकरी प्रदान करने की जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है जबकि कोई नियुक्ति पत्र नही दी गयी है कार्यवाही को आगे बढाने का निर्देश जारी हुआ है । हमे अभी और सँघर्ष करना है ।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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